भुखमरिया ,ये शब्द मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा रहा है ,और शायद अब ये मेरी नियति में छप गया है। इस शब्द को मैंने डिक्शनरी में भी ढूंढने की कोशिश की और इसका अर्थ मिला भूख से मरने की अवस्था और मैं पूरी तरह से सहमत नहीं हूँ इस अर्थ से। शायद इसका अर्थ होना चाहिए सब कुछ होते हुए भी भूख से मरने की अवस्था।
अब शुरुआत करता हूँ कि कब मेरा इस शब्द से पाला पड़ा ,बहुत पूरानी बात है,एक बहुत अच्छे ओहदे पर बैठा व्यक्ति जब हाफ प्लेट तड़का,2 रोटी और आधी कप चाय से अपना पेट भर लेता हो तो भुकमरिया शब्द जेहन में चस्पा हो जाता है। और इस बहुत पुरानी बात को याद करता हूँ तो ऐसा लगता है कि मैं ठीक वहीँ बैठा हूँ ,2 रोटी हाफ प्लेट तड़का और फिर आधी चाय। उस व्यक्ति को याद करता हूँ और वहां खुद को पाकर मुस्कुरा पड़ता हूँ। कल ही एक मित्र से बात कर रहा था ठीक कहा भाई ने तुम इतना सोचते हो इसलिए ही ये शब्द तुम्हारे आस पास ही भटकता रहता है।
बैंकिंग में हूँ तो थोड़ा बहुत अर्थशास्त्र भी पढ़ लेता हूँ , तो बहोत पहले पढ़ी थी ,Cycle of poverty ,गरीबी का दुःश्चक्र ,कहते है गरीबी जब एक बार पीछा पकड़ लेती है तो कितनी भी कोशिश करो ख़तम नहीं होती ,चलती रहती है ,चलती रहती है जब तक कोई बहरी प्रभाव न पड़े. कम से कम ३ पीढ़ियों तक ,चाहे कोई कितना भी क्यों न कमा ले। तीन पीढ़ियों तक तो वो परिवार भुखमरिया ही बना रहेगा। अब सोचता हूँ कितना बड़ा अनुभव रहा होगा और कितना सच्चा अनुभव रहा होगा इस थ्योरी को लिखने वाले का।
चलो अब बात कुछ और भी करते हैं ,चलो बहुत कमाने लग गए ,खूब पैसा फिर भी ये भुखमरियागिरि कभी ख़तम नहीं होगी , क्यूंकि जो अनुभव इस दुष्चक्र में पड़ चुका होता है वो कभी पीछा नहीं छोड़ेगा। पैसे खूब कमा लोगे लेकिन ट्रैन के जनरल डिब्बे में ही सफर करना ज्यादा अच्छा लगेगा ,अपनापन तो वहीँ मह्सुश होगा न। एयरपोर्ट की 15 ,20 हज़ार तनख्वाह वालो से तो आप बात ही नहीं कर पाएंगे ,भुखमरियागिरी आड़े जाएगी न। डोमिनोस या केएफसी से आर्डर करने से ज्यादा बेहतर सड़क के किनारे लगे थडियो और ठेलो का स्वाद ही भला लगेगा। रेमंड्स ,लेवाइस ,लाइफस्टाइल के शोरूम से बेहतर तो वही फुटपाथिया कपडा ,हाँ जी सही पकडे हैं रांची मेन रोड हनुमान मंदिर के पीछे 100 रुपया ,100 रूपया वाला कपडा ही मन को भायेगा। भुखमरिया गिरी ही है भाई।
बस बहुत लम्बा निबंध लिखा जा सकता है , ये जो शब्द चस्पा हैं न जिंदगी में , बहुत लम्बा। और लिखूंगा भी लेकिन अभी नहीं फिर कभी।