Tuesday, January 26, 2010
अच्छे लोगों के साथ ही ऐसा क्यों होता है !!
कभी कभी सोचता हूँ ,अच्छे लोगों के साथ ही बुरा क्यों होता है ,क्यों होता है ...कर्म का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान मामा जाता है हमारी जिंदगी में ...लेकिन ऐसा क्यों होता है की अच्छे कर्म के बाद भी ,तुम्हारे साथ अच्छा नहीं है ..बहुत कुछ निर्भर करता है ....साथ के लोगों पे !!!!क्योंकि उनके सोच पे आपका कोई भी जोर नहीं होता है ..और न ही हम उन्हें बदल सकते हैं .है न
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कभी कभी मैं सोचता हूँ कि मैं कहाँ आ गया , और कहाँ जा रहा हूँ , न तो कोई मंजिल है और न ही कोई रास्ता, बस जीना है तो जिए जारहाहूँ, क्या यही हो...
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Good Story and a lot of history.... M loving it ..It seems Hindi is also comlicated foe me..Complicated words by author ....But m learni...
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बिखर जाने का मन कर रहा है ....कभी कभी ही तो ऐसा महसूस होता है जिंदगी में ..जब पूरी दुनिया, ये शहर , ये जॉब बेमतलब के लगने लगते हैं ....और त...
हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें
ReplyDeleteप्रिय बन्धु
ReplyDeleteChitthajagat men aapkaa swagat hai.
> भारत पूरी क्षमता, योग्यता, संरचनात्मकता से संपन्न है.
>
> भारतीय आकाशमंडल ऐसे अनेकानेक जगमगाते हुए सितारे हैं, जो पूरे विश्व को अपने
> ज्ञान और संरचनात्मकता से जगमगा रहे हैं. भारत का प्राचीन इतिहास हमारे सिर को
> गौरव से ऊँचा कर देता है. हमारे देश की गाथाएँ हमें ईमानदारी, सदाशयता,
> आत्मविश्वास, समर्पण की भावनाओं से ओतप्रोत करती हैं, ताकि हम अपने लक्ष्य को
> प्राप्त कर सकें और देश की शान को बढा सकें. गणतंत्र दिवस की मंगलकामनाएं.
>
> हमारी कामना है कि-
>
> स्वतंत्रता का जश्न मनाएँ, मिलकर हम सब आज
> हों पूरे संकल्प हमारे, मधुरिम बने समाज.
>
> *'शोध दिशा' का दिसंबर २००९ अंक जो माँ को समर्पित है*. www.*
>
> hindisahityaniketan.com पर पोस्ट कर
>
> दिया गया है.*
> *आप उसका भी आनंद ले सकते हैं. आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी, ताकि उसे
> आगामी अंक में छापा जा सके. *
>
> *डा. गिरिराज शरण अग्रवाल*
>
> * **डा. मीना अग्रवाल*
>
> संपादक ‘शोध दिशा’
> --