Friday, May 27, 2011

I wept after a long time for myself!!!

पता नहीं कितने दिनों के बाद मैं खुद के लिए रोया.....ये self assessment ke classes ने
तो माथा ही ख़राब कर दिया है ! पर सच है मैं सोच रहा था और समझ रहा था , मैं पहले ऐसा नहीं हुआ करता था , I remember my school day...I used to be a good and eneregetic guy and was lyk a motivator... par dhire dhire jis tarah mera patan पतन हुआ मैं खुद ही अचंभित हो रहा हूँ....बीच में बहुत सारी परेसानिया आईं और मैं धीरे धीरे उनमे खुद को ढालता चला गया फिर कभी खुद पे ध्यान ही नहीं दिया, मैं पढ़ाकू बनता चलता गया और खुद को कमजोर करता चला गया , जीतनी नकारात्मक प्रवृतिया थी आती चली गयीं .....अब मैं ध्यान देता हूँ तो पता हूँ उन परेसनियों के दिनों में मेरी सारी सकारात्मक ऊर्जा थी ओर चली गई , मेरे मूल्य खोते चले गए और मुझे कुछ पता ही नहीं चला ....मैं स्व-केन्द्रित होता चला गया, अकेला पन का चोला पता नहीं कब मैंने ढँक लिया, भीड़ से और लोगो से एक दुरी बनता चला गया...ऐसा तो नहीं था मैं , हर वक़्त नकारात्मक सोचना , अपने आप को कम कर आंकना और हमेशा से एक दर....एक भय ....
भयाक्रांत मैं कभी अपने आप को समझ ही नहीं पाया...ठुकराए जाने का डर ,हार जाने का डर ,पता नहीं कितने डर मैंने खुद से पल लिए ...मेरे सरे निर्णय इसी डर से आक्रांत होने लगे और मैं अपनी पहचान खोने लगा...और फिर शुरू हुआ अपने आप को सामने लेन का खेल और फिर ओर कुछ नकरातमक , विस्वास की कमी होने लगी और अभी तक मैं इसी भय मैं फंसा हुआ हूँ...हमेशा से डरपोक बना रहता हूँ , की पता नहीं की कल क्या हो॥ हर वक़्त सबके बारे में नकारात्मक सोचता हूँ , नकारात्मक बोलता हूँ और isi attention grabbing ke chakkar me ....dost kam aur dushman jayada banne lage और आब महसूस करता हूँ की कहाँ गलती हुई.....
आज के क्लास में पता चला की यहाँ गलती हुई और मैं अपने बचपन में चला गया....और फुट फुट कर रोया.....कभी कभी लगता है आंसू में आप ओर कुछ भुला देते हैं ......
थैंक्स उ स्टेट बैंक टीम की उन्होंने ये महसूस कराया की तुम वो नहीं हो जो तुम सोचते हो....कुछ और ही हो ...इतिहास को पीछे छोड़ कर तुम्हे आगे बढ़ाना है और अपनी हर चीज़ पूरी करनी है....कुछ चीजों का निर्णय लिया है ...और अआब उनपे ही आगे बढ़ना हैं ...फिर से वही अपने आप को आगे लाना है और हमेशा आशावादी बनना है !!!

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