क्यों कर यू खफा हो तुम ...............
इतना तो बता दो क्या खता है मेरी
हर शाम तेरी ख्वाहिश..
हर सुबह तेरी पूजा
हर सपने में तुम
हर गम में तेरी छांव की चाह...
गर ये खता है तो ...
उपरवाले से ये दुआ करूँगा ..
अनगिनत जनम बख्से मुझे इंसानी रूह में ..
और हर जनम मैं ये खता करता जाऊ ...
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