कल सुना ..
हर सुबह तुम मेरा इन्तेजार करते हो
वहीँ ...जहाँ से मैं रोज गुजरता हूँ .....
वक़्त से पहले पहुँच कर .
सिर्फ इस आस में की एक मुलाक़ात हो ..
सच ही तो है की ..जिन्दा रहने के लिए एक मुलाक़ात जरुरी होता है ...
बारिश में खड़े रहते हो..
भीग जाते हो ..
तबियत भी ख़राब ...
पर कुछ है जो तुम्हे मजबूर करती है ..
उस रस्ते पे आने को ..
कुछ रूहानी सी ..
कुछ अनकही , अनजानी सी ..
क्यों है ऐसा और कुछ शिकायत भी नहीं ...
पर उस मुलाक़ात का क्या ..
जिसका कोई मतलब ही न हो..
हाँ ये तुम्हे भी पता है और मुझे भी ..
क्यों कर तुम मेरी आस पलते हो ..क्यों कर
समझाना चाहता हूँ तुझे ...
पर समझा नहीं पता ..
हार जाता हूँ मैं ...
उस चीज़ से जो रूहानी होती है ..
कभी तो डर भी लगता है मुझे ..
उस चीज़ से ..
जो अनकही भी है और अनजानी भी ...
कुछ रुखा सा मैं भी हूँ
कुछ बिखरा हुआ सा भी ..
चाहता था हर पन्ना समेट लू अपनी जिंदगी का
पर हर पन्ने के साथ कुछ और बिखर जाते हैं..
और तब एक सवाल करता हूँ ...
खुद से ...और फिर खुद ही उत्तर ढूंढ़ लेता हूँ ...
हर सवाल का उत्तर नहीं ढूंढ़ना चाहिए..
(Some questions better not to be answered )..
तुझे भी यही कहता फिरता हूँ ..
जिंदगी कुछ सवालो के जवाब खुद ही दे देती है ..
वक़्त आने पर...
बस वही मैं भी कर रहा हूँ ..
तुम भी करो...
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