समझता हूँ की एक अच्छा इन्सान बनने के लिए थोडा और गलने की जरुरत है . क्यों मैं उन सब लोगों का दिल दुखाता रहता हूँ जिन्होंने हमेशा मेरी अच्छे की कामना की है , सिर्फ अच्छे की और मैं अपने कर्मों से और शब्दों से हमेशा उन्हें तकलीफ ही पहुंचाता हूँ...सिर्फ अपने आपको बड़ा दिखने के लिए और शायद सिर्फ मजाक के लिए ही सब का मजाक उडाता रहता हूँ ......तब तो शायद मुझे कुछ भी पता नहीं चलता पर जब पता चलता है कि मेरी वजह से उनको तकलीफ पहुंची है तब अपने हृदय रहित होने का पता चलता है ...
और तो और क्यों मैं किसी के आंसुओं का भागी बनता हूँ ...और शायद यही आंसू मुझे भाग्यहीन बनाते है ..तब मैं शायद अकेले में पश्चाताप करता हूँ...और कर भी क्या कर सकता हूँ , थोडा और जलना है मुझे , थोडा और गलना है मुझे , थोडा अच्छा होने के लिए ...और मुझे शायद भावनाओ कि भी क़द्र होनी चाहिए ...किसी के emotions से मैं कैसे खेल जाता हूँ ......
क्यूँ कर मैंने ऐसा हूँ यार ..क्यों कर , और पता नहीं कब तक अपने आप को बदल पाउँगा.....
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