पिछले 5 दिनों से बहुत परेशान हूँ , और शर्मिंदा भी ...उलझा हुआ सा , फंसा हुआ सा महसूस करता हूँ कभी कभी , और इसी परेशानी में एक फैसला कर लिया ...कुछ दूसरा उपाय भी तो नहीं है ..और ये फैसला शर्मिंदा होने से तो बेहतर है ....भगवान ने चाहा तो फिर इसका विकल्प मुझे मिल जायेगा ...कभी तो उपरवाले को बहुत अहसानमंद हो जाता हूँ की मुझे संदीप और अमित जैसे दोस्त मिले ....
बस यही मानता हूँ, कि जो भी होता है अच्छा होता है ...और ये भी मानता हूँ कि जब दिन बुरे होते हैं तो आपके साथ सब कुछ बुरा ही होता ही ..पर हार कभी नहीं मानता मैं ..आशावादी हूँ , जब अच्छे दिन आयेंगे तो सब कुछ अच्छा होगा , व्यक्तिगत, व्यावसायिक और आध्यात्मिक स्तर पर ......बस इन्तेजार कर रहा हूँ की कब मेरे साथ कुछ अच्छा होना शुरू होता है ......
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