Tuesday, September 11, 2012

कभी कभी ...


कभी कभी तुम ऐसा जरुर सोचते होगे की मैं इतना निष्ठुर कैसे हो जाता हूँ , no phone calls , no messages , no  contact , seems vanished   ....ये सारी चीजें बहुत तकलीफ पहुंचाती है , पर पता है वक़्त सारे जख्मो को भर देता है बस दिल खुला होना चाहिए ....पता है , मैंने जिंदगी में बहुत खिल्दंडा पंथी  किया है, बहुत  सारे लोगो को दुःख पहुँचाया है ...yes I did hurt a lot of people , and  know what , I got punished hard by nature ...and  it really made me ralise that I was a sh**t ...played with emotions ...played with sentiments...

And now I feel , it's time to understand myself,   to be serious. I know I had collected lot of tear , which is making my life a misery...Now I don't want to hurt anyone , by my words or by my deeds...Life is too short..We have to live it to it's fullest...

पता है वक़्त के साथ सब कुछ घुलता मिलता जाता है , दुःख, विषाद, हंसी ,ख़ुशी , ..जब हम बहुत तनाव में होते हैं तो ऐसा लगता है , कि अब सब कुछ ख़तम, अब कुछ रहा नहीं इस जिंदगी में , और जब कुछ वक़्त गुजर जाता है तो हम खुद पे हँसते हैं, हाँ कितना बेवकूफ  था मैं , इतने छोटी सी चीज  से हार मान गया था ...या फिर ऐसा लगता है कि किसी के बिना जिंदगी चलती ही नहीं . पर जब थोडा वक़्त और गुजर जाता है तो हम ये महसूस करते हैं कि , मेरी जिंदगी तो उसी कि वजह से तकलीफदेह थी ....और तभी ये अहसास होता है अपने बेवकूफ होने का ...

और सच तो ये है कि अब मैं किसी को बेवकूफ बनाना नहीं चाहता , क्यूंकि कभी कभी लगता है आप किसी को बेवकूफ नहीं बना रहे होते हैं बल्कि जिंदगी खुद आपको ही बेवकूफ बना रही होती है...और मैंने ऐसा जाना है कि हर वक़्त जिंदगी ने मुझे बेवकूफ बनाया है. जब मैं  पूरी दुनिया का मजाक बना रहा होता हूँ तो प्रकृति मुझ पर हंस रही होती है ...अट्टहास करके ...

बस अब और नहीं , अब और आंसू नहीं बटोरने मुझे ....थोडा तकलीफदेह तो जरुर है  but  , थोड़े वक़्त गुजर जाने पर तेरे मन का मैल भी धुल जायेगा , अपने लिए जितना घृणा मैंने बटोर लिए है वो भी कम हो जायेगा ..बस ये जरुर याद रखना के वक़्त सबसे बड़ा मरहम है ...धीरे धीरे सब कुछ घुल मिल जायेगा , इस जिंदगी के अनवरत प्रवाह में , सच है यहाँ कुछ भी रुकता नहीं, कुछ भी ठहरता नहीं..सब कुछ चलायमान है ...प्रेम और घृणा भी ...इंसान तो खैर है ही ...बस मन में किसी के लिए भी , किसी के लिए भी , जिसने कुछ अच्छा चाहा हो तुम्हारे लिए या जिसने तुम्हारी  जिंदगी के कुछ पन्ने अँधेरे से श्याह कर दिए हो  ...कोई भी विद्वेष मत रखना ...क्यूंकि कोई भी बुरा नहीं होता ..कोई भी बुरा नहीं होता ..

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