Saturday, September 15, 2012

ऐसा कैसे हो जाता है ....


पता नहीं मैं कभी कभी ऐसा कैसे बोल जाता हूँ , आज सुबह पवन आया था ब्रांच में , मैं तो ऐसे ही निरपेक्ष रहता हु ,  पर पता नहीं मुझे क्या हो गया था , बहुर बुरे शब्दों का इस्तेमाल कर दिया मैंने उसके लिए और उसके सामने ही , थोडा गुस्सा निकल गया, पर उसके जाने के बाद मुझे बहुत ही ख़राब लगने लगा , पता नहीं क्यों , रोने का मन होने लगा , लगा की फुट फुट कर रो पडू , मैं ऐसा किसी को कैसे बोल सकता हु, क्यूँ मैं किसी भी चीज़ के लिए किसी को भी  दोषी ठहरा  सकता हूँ , पता है पवन खुद ही टेंशन में है और मैंने ऐसा बुरा बोलकर उसे बहुत तकलीफ पहुंचा दिया ..पता नहीं मेरे अन्दर का इंसानियत थोड़े देर के लिए कहा मर जाता है , मैं खुद ही कहा करता हूँ कोई कोई भी बुरा नहीं होता , फिर मैं क्यों  बुरा सोचने लगता हूँ , क्यों किसी को hurt करना शुरू कर देता हूँ ..ऐसा लग रहा है  की मैं अभी जाऊ और पवन से अपने शब्दों के लिए माफ़ी मांगू.....

जो भी हो , अब मुझे ध्यान रखना है , जो होना होता है वो तो हो ही जाता है और जो चीज़ गुजर गई हो उसे सुधारा भी नहीं जा सकता , लेकिन भविष्य में इसका ख्याल रखा जा सकता है की मैं अपने शब्दों से किसी को आहत न करू ..बस भगवन से माफ़ी मांगता हूँ की क्यों मैंने पवन को हर्ट किया , भगवन , मुझे माफ़ करो ...

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