Thursday, September 6, 2012

दो नगमे .....


पिछले तीन चार दिनों से  ये  गाना  सुन रहा हूँ ,
पर पता ही नहीं  के क्या है ..सुनता ही जा रहा हूँ ..
सच है यार ,हम  खुशियाँ ढूंढ़ ही नहीं पाते 
बस  दोषारोपण करते फिरते है , जमाना ख़राब है ,
बन्दे बन्दे में दाग है ....
मुझे कबीर का एक  दोहा याद आ  जाता है 
बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिल्या कोई...
जो मन खोज्या आपनो , मुझसे बुरा न कोई ...

ये बहुत बढ़िया song , I  want  to  share  


"ये जमाना ख़राब है , मिया ये कैसा मजाक है ..
बन्दे बन्दे में दाग  है , मिया कैसा मजाक है, 
मैं नसीहत क्या दू , सब तो है सयाने यहाँ

फिर भी साफ साफ कह दू
सब कुछ है  ला ला ला ...

तुझ में रहने रब आया तो बेघर क्यूँ  कहलाये ,
मुरखपन में क्यूँ पगले तू आज को आग लगाये ,
सारी पढाई किस पीपल  के पेड़ पे टांग आया,
बाँट बटोरे के  हारा तब जाना क्या पाया,
क्यूँ बेफजूली में  man, man   चला  हार  के ,
नीरस  ही  रह  जायेह  न , तू  ख़ुशी  तलाशता  फिरता  कहा ....."

And one more song , of course from Coke studi season -2...
It like bhakti, bhakti , where a devotee dovote himself to divine without any question..
It feels like am in trance..
like am doinig yoga and left my body ..
forgot my all problems , all issue ..like am in another world , 
where, I find hapiness everywhere, love , affection ...
far, far  away form this world of hatrate, frustration and dark..
completely merged with God...
It works like advaitva sindhanta of hinduism...
"अहम् ब्रह्मास्मि "..
I am the "One"...

So enjoy this divine fusion..

मदारी, मदारी मदारी मेरा तू, 
मैं जम्बुरा रे , जम्बुरा रे जम्बुरा ..
तेरी रुखी सूखी , सूखी रुखी खाके देखा ..
हर एक निवाला अमृत लागे ..
तेरे रहमोकरम से, रहमोकरम से ,
हर फूटी किस्मत उठ के भागे 
जितना भर दे खिलौना में चाभी , 
उतनी है उसकी रफ़्तार.
तू चलता है जीवन का मेला ..
तू ही सुने हम सब की गुहार ...


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