पिछले हफ्ते भर से मैं गर्दन के दर्द से परेशां रहा और कुछ भी खुश होने जैसा नहीं था , फिर अचानक से फितूर आया के कुछ किया जाये ..बस कार चलाना सीखने लगा हूँ , हाँ कल से ही , और अच्छा लगता है ड्राइविंग सीट पर बैठ के , और दूसरी बात तो ये के सुबह का पूरा समय बेकार में जा रहा था , तो थोडा work out की भी सूझी , और समझाता हूँ के दिन भर बैठे बैठे काम करता हूँ तो अपने आप को फिट रखने के लिए जरुरी भी था , तो GYM भी join कर लिया , हाँ कल से ही ....और इन दोनों के लिए मैं जाकिर भाई को धन्यवाद् देना चाहूँगा ..कभी कभी तो समझ में ही नहीं आता की भगवन ने कुछ लोगो को ही इतनी इनायत क्यों दी है ..
Wednesday, February 6, 2013
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
कभी कभी मैं सोचता हूँ कि मैं कहाँ आ गया , और कहाँ जा रहा हूँ , न तो कोई मंजिल है और न ही कोई रास्ता, बस जीना है तो जिए जारहाहूँ, क्या यही हो...
-
Good Story and a lot of history.... M loving it ..It seems Hindi is also comlicated foe me..Complicated words by author ....But m learni...
-
बिखर जाने का मन कर रहा है ....कभी कभी ही तो ऐसा महसूस होता है जिंदगी में ..जब पूरी दुनिया, ये शहर , ये जॉब बेमतलब के लगने लगते हैं ....और त...
No comments:
Post a Comment