Sunday, March 24, 2013

नाटक


तेरे रोज़ रोज़ के नाटक से मैं तंग आ चुका हु, हर १० दिन में एक ही नाटक और ऐसा कई दिनों से कर रहे हो तुम , अगर कोई दिक्कत है तो मुझे बताओ ... तुम्हारी चुप्पी तो मुझे और जायदा परेशां करती है ...और सबसे बड़ी बात तो ये भी है के इन दिनों मैं खुद ही बहुत परेशां सा रहने लगा हूँ ..और फिर तुम्हारा ये नाटक ...कभी कभी इतनी खीज उठती है की की बस बहुत हो गया ....तुम्हे लगता है की इस तरह किसी प्रॉब्लम का हल मिल जाये तो बहुत बढ़िया ..
  मुझे तो ऐसा ही लगता है कि ऐसे ही नाटक करने से तुम्हारे सरे प्रॉब्लम दूर होते है...और अगर ऐसा है तो बहुत ही बढ़िया है ..

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