काफी दिनों से कुछ लिखा नहीं और अब ऐसा कुछ लिखने का मन भी नहीं होता। ऐसा लगता है जैसे विचारों का प्रवाह ख़तम सा हो गया हो ..खैर जो भी हो ..पर आज जो कुछ भी हुआ , ऐसा लगता है लिख लेना चाहिए , ताकि मुझे भी हमेशा याद रहे कि मैं एक ऐसे इंस्टिट्यूट में काम करता हु जहाँ बहुत गन्दी राजनीती चलती है .
आज जितनी निराशा मुझे हुई वो शायद मैं बयां नहीं कर पाउँगा .ऐसा कोई भी कैसे कर सकता है या सोच भी सकता है कि अगर दो लोगो को ब्रांच से विदा करना है तो एक को पार्टी और शुभकामना सहित और एक को बस यु ही बे आबरू . पता नहीं लोगो की इंसानियत कहा ख़तम हो जाती है .मैं तो सिर्फ ये सोचता हु की अगर ऐसा आपके साथ हो तो आपको कैसा मह्सुश होगा , तब शायद आप अपने आप को shattered मह्सुश करेंगे . मुझे तो ताज्जुब तब हुआ पता चला की ये सब शर्मा सर की जानकारी में हुआ . और जब मैं उनके पास गया सिर्फ ये पूछने की ऐसा कैसे हो रहा है और क्यों हो रहा है तो उनका जो उत्तर था उसे शायद shameless कहने में मुझे तो कोई shame नहीं होगा . एक झटके में उनकी सारी image ही change हो चुकी थी . वो image जो पिछले 1 साल से मैंने अपने ज़ेहन में बैठा रखी थी . इतने साल बैंकिंग में गुजरने के बाद और पता नहीं कितने लोगो से आप मिले होंगे ..क्या सही है और क्या गलत है में रत्ती भर का भी फर्क नज़र नहीं आता और ना ही आपने थोड़े से भी सोचने की भी जरुरत नहीं समझी की उस बन्दे के ऊपर क्या गुजर रही होगी ...जब इन्सान का गला भरी हो तब ही कुछ समझ में आता है .....मैं तो भगवान से बस यही दुआ करूँगा की कही कभी भी ऐसा आपके साथ न हो ..
जो भी हुआ , मुझे आत्मपरीक्षण पर ले आया है की मैं जहाँ बैठा हुआ हु और जहाँ नौकरी कर रहा हु , अन्दर में बहुत ही गन्दी राजनीती है . जो आपको कभी भी बे आबरू और रुसवा कर सकती है और फिर ये भी सोचता हु ऐसे जगह में और ऐसे लोगो के बीच में काम करने का क्या फायदा , पर शायद अपने पास कोई दूसरा उपाय भी तो नहीं है ...जो भी हो हर चीज़ से , चाहे वो अच्छी हो या बुरी , कुछ न कुछ सिखने को मिलता है ...और आज वाली घटना से , जिसने मेरे मन में अशांति भर दिया है , कुछ न कुछ तो जरुर ही सिखा होऊंगा ...
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