Monday, September 9, 2013

झुकी झुकी सी नज़र बेकरार है के नहीं।

जगजीत सिंह जी का गाया ये song जब जब सुनता हूँ,  अजीब सी सिहरन होती है दिलो दिमाग मे. हर वक़्त ये पूछ पड़ता हूँ, दबा दबा सा सही इनमे प्यार है के नहीं। ।  तू अपने दिल की जवां धडकनों को गिन के बता  , मेरी तरह बेकरार है की नहीं। ।  और इस गाने का एक अंतरा जो बहुत ही दिल के करीब है , जब भी कमजोर हो रहा होता हूँ तो गुनगुना लेता हु। .. 
          तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को.. 
          तुझे भी अपने पे ही ऐतबार है के नहीं....

          

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