पता नहीं क्या कहूँ , या समझ में ही नहीं आ रहा के कैसे तुझे थैंक्स कहूँ। अपनी जिंदगी के २ सबसे कीमती और सबसे महत्वपूर्ण साल मैंने यहाँ गुजरे ,मेरे 25th और 26th years …मुझे याद आता है वो 1st अगस्त 2011 का दिन जब मैंने निम्बहेरा ज्वाइन किया था, तब तो शायद मैं बहुत डरा हुआ था , सिर्फ ये सोचकर के के पता नहीं यहाँ कैसे दिन गुजरूँगा। छोटी जगह , और पता नहीं यहाँ कुछ सुविधा हो भी या न हो। फिर फिर यहाँ आते ही मैं रजनीश सर से मिला और दो दिन में ही ऐसा लगा की शायद बहुत अच्छी जगह में हु और धीरे धीरे यहाँ एडजस्ट होता चला गया। आर के जैन सर और फिर सोनी सर , भगवान का आशीर्वाद रहा की मुझे इतने अच्छे सर मिले जिन्होंने जिन्दगी का और बैंकिंग में रास्ता दिखाया।
शुरुआत में तो मैं बहुत परेशां सा रहा , कुछ समझ में ही नहीं आता था कि क्या करना है और कहाँ जाना है। सुरुआत के पुरे महीने तो मुझे मकान ही नहीं मिला था , लेकिन धीरे धीरे सब कुछ व्यवस्थित होने लगा ! जिंदगी के बहुत सारे चीज़ मिले तो शायद जिंदगी का पहला था, मेरा पहला bike मेरा पहला टीवी , मेरा पहला फ्रिज और पता नहीं क्या क्या पहला। इतनी तो इबादत जरुर करूँगा तुम्हारी के तूने बहुत कुछ बक्शा मुझे बहुत कुछ।
जब ब्रांच से परेशां होने लगा तो फिर मुझे agri वाली सीट मिल गयी, जहाँ मैंने दिल खोल कर काम किया और sirf यही नहीं पुरे ब्रांच का कम किया , mast होकर काम करना और पूरी बेफिक्री से लेकिन पूरी ईमानदारी से , मैंने यही पे सीखा, kitna भी टेंशन क्यूँ न हो मस्त रहना है. और फिर जिन्दादिली भी।
२१ नवम्बर को मैं कृष्णा से और प्रमोद से मिला। और तब से जिंदगी में अच्छे बदलाव आने भी शुरू हो गए क्यूँ शायद हमउमर वालो का साथ सबसे शानदार होता है, फिर मिला मैं पवन गोयल से। साथ ही साथ कितने लोग आते रहे जिंदगी में। ब्रिजेन्द्र , ब्रिज वीर, हम खाते पीते और खूब मस्ती करते रहे क़ुच लोगो के बारे में जरुर लिखूंगा।
कृष्णा, मस्त एकदम भगवन कृष्णा की तरह , मदमस्त अल्हड , लेकिन बहोत साफ दिल, और नेक , सच कहता हु भगवन ने ऐसा दिल सिर्फ कुछ लोगो को ही वरदान दिया है. कम में थोडा ढीला जरुर है लेकिन कभी किसी का भी बुरा नहीं सोचता। हमेशा अच्छा करने का सोचता है और यही तो बड़प्पन है, इतना जिम्मेदार बंदा इस उम्र में बहोत कम लोग होते हैं ,अपने सारे छोटे भाई बहनों को साथ में रखकर पढाना लिखना बहुत बड़ी बात होती है, uski पूरी सैलरी ख़तम हो जाती है लेकिन वो कभी कुछ भी शिकायत नहीं करता जिंदगी से, बिना बोले त्याग , शायद ये uske liye बहोत बड़ा ward होगा और शायद मेरे लिए भी , लेकिनह शायद ये सच है की ये उसका बहोत बड़ा virture है। मैंने बहुत कुछ सीखा भी है उस से और ये दुआ करता hun की जहाँ भी रहे अच्छे से रहे अच्छा कम करे और बहुत आगे जाये। मुझे लगता है वो जिंदगी से बहुत कुछ deserve करता है। बहुत साडी अच्छी दुआ मेरे तरफ से उसके लिए।
प्रमोद , अच्छा यार बुरा ज्यादा मायने कभी नहीं रखता, वो बिना किसी पार्टी में शरीक होते हुए भी हमारे लिए सबकुछ करता रहा , मैं उसकी सबसे बड़ी बात मानता हूँ ,कभी भी किसी बात का बुरा नहीं मानता , बस सब कुछ करता जाता है , एक कमजोरी देखि मैंने की वो बहोत मेहनत करता है फिर भी किसी चीज़ को अंजाम तक पहुंचाते पहुंचाते अटक जाता है , और शायद ये उसकी सबसे कमजोर कड़ी है, अब भी मैं यही कहता हूँ प्रमोद किसी भी कम को हाथ में ले तो उसे अंजाम तक पहुंचा। प्रमोद के लिए यही दुआ है की बहोत जल्दी ही बहोत जल्दी आगे की तरफ जाये।
फिर दिसम्बर 2011 का दिन , फिर जनवरी 2012, मुझे याद भी आता है अपना 25th B'day on 7th January 2012 . पता है कभी कभी आपकी जिंदगी में अच्छे लोग आते है तो कुछ बुरे लोग भी , पर सच तो ये है की कोई बुरा नहीं होता। .everyone is bounded with their situations ..sometimes u get frustrated for everything..and then u started to ask question....n what I did , I never asked any questions to GOD or anyone...and that was the only best part from me..."Aceept whatever comes in your life, in the same form as it comes"......
ha ha ha ...I remember Swami Sukhbodhanand ...Suffer, and when u suffer, suffer joyfully.....any way ek bad caption yad aa gaya mujhe.. "जिंदगी को कुछ तरह आसान कर लिया हमने , कुछ से माफ़ी मांग ली और कुछ को माफ़ कर दिया। " और सच में एक बन्दे से मैं माफ़ी मांगता हूँ , लेकिन शायद माफ़ी के काबिल भी नहीं होऊंगा ,मेरी वजह से जो दुःख उसे पहुंचा और जो तकलीफ पहुंची उसका शायद एक कतरा भी मैं अपनी माफ़ी वाले शब्द से वापस नहीं ले पाउँगा। बस इतना ही कहूँगा , "मन की किताब से तुम , मेरा नाम ही मिटा देना , गुण तो न था कोई भी , अवगुण मेरे भुला देना "
ठीक उसी वक़्त निम्बहेरा ने मुझे एक अच्छी सौगात दी। दीदी की शादी पक्की हो गयी और बड़े अच्छे से हो गयी , बुरा तो ये भी रहा की एन वक़्त पर दादाजी नहीं रहे। . बाबा मैं अभी भी आपको बहुत याद कर रहा हूँ। दीदी की शादी के बाद का आया हुआ मैं घर गया ही नहीं , पुरे साल भर ऐसा ही चलता रहा , निम्बहेरा ने एक और सौगात दी भैया की शादी भी हुई , और तब मैं घर गया पुरे साल भर बाद।
फिर गुप्ता सर मिले , सब कुछ मस्त सा चलने लगा , हमने खूब सारी पार्टियाँ की और खूब कम भी किया। गुप्ता सर का स्नेह और आशीर्वाद बना रहा मुझपर ,और श्रीवास्तव सर , जिनके बारे में कुछ भी लिखूंगा तो कम पड़ेगा। इनके स्नेह और आशीर्वाद से २ साल कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। अभी ३ दिन हो गए मुझे निम्बहेरा छोड़े हुए , लेकिन अब भी वह की खुशबु बरक़रार है , और मुझे लगता ही की ताउम्र ये बरकरार रहेगी , मैं अपने साथ हुई har अच्छी चीज़ को याद रखना चाहूँगा और जो कुछ भी यहाँ बुरा हुआ मेरे साथ वो तो मैं कबका भूल चूका हूँ।
मालीवाल जी , हमेशा लड़ जाता था मैं और वापस thodi देर में उन्हें हंसाकर आता था ,रण सिंह जी को याद करना चाहूँगा , जय भोले , विनोद सोनी , मस्त बंदा है , पंडत जी , जिन्होंने मुझे सिंगल से डबल होने का आशीर्वाद कभी नहीं दिया , हा हा हा , फिर सुरेश जी , बहुत बढ़िया वक़्त गुजरा सुरेशजी के साथ ,और वो अब भी याद करते हैं , हेमंत , जिस से मैंने बेफिक्री सीखी , अरे सर टेंशन क्यों लेते हो , सबकुछ होता रहेगा , बैंक का काम तो होता रहेगा। एक बंदी आई, शीतल, सच तो ये है की मैंने उसे कुछ भी नहीं सिखाया, but मैंने उससे सीखा , बहुत कुछ , जिंदगी के बारे में , जिम्मेदारियों के बारे में और भी बहोत कुछ। फिर भराडिया सर , और शर्मा सर , शुक्रगुजार हूँ की इतने अच्छे लोग मिले मुझे। जाकिर भाई भी बहोत याद आयेंगे मुझे , ब्रांच के बहार बहुत वक़्त गुजारा है। हर चीज़ में साथ दिया ! कैलाश जी भी , पुराने दिनों के चालान , हा हा हा और फिर unka दिया हुआ सब आईडिया ,
ले लो न जी साब। खुद सब को कुछ न कुछ बक्श्ता है। और गार्ड्स में विनोद जी , भोला , कभी कभी मैं iritate ho जाया करता थे लेकिन end में उनका बहुत अच्छा होने सब chizo पे bhari pad जाया करता है। last में हुई एक buri चीज़ ने मुझे बहोत परेशां किया और मुझे khud को gira हुआ सा mahsush हुआ, पर thode दिन में लगा की उस bande में bachpana है , और शायद अच्छे बुरे की और इस duniya की समझ नहीं है , हमेशा कहा करता था की उसे protect करने की jarurat है duniya की buraion से और mujh पर ही ilzam , khair जो भी हुआ मेरे लिए एक सबक ही था ,मैंने अब भी यही कहता हूँ बचपना है और उसने जो कुछ भी कहा किया उसके लिए मेरे मन में द्वेष नहीं है , मैं अब भी उसे सलाह दूंगा की अच्छे बुरे की पहचान करना सीखे।
और अंत में एक एक बहुत प्यारी वजह,कुछ नहीं लिखूंगा । और कुछ भी इसलिए नहीं लिखूंगा की , मुझे बहुत कुछ अभी लिखना है और शायद जिंदगी भर।कुछ न कुछ तो लिखता रहूँगा न यार जिंदगी भर, अच्छा या बुरा। अच्छी चीज़े तो मैं हमेशा संजोता हूँ , और बुरी सबकुछ भूल जाता हु। ।
अलविदा निम्बाहेरा , फिर मिलेंगे और जरुर मिलेंगे , इसी वादे के साथ,
बीच राह में दिलबर, बिछड़ जाये कहीं हम अगर ,और सूनी सी लगे तुझे जीवन के ये डगर।
हम लौट आयेंगे , तुम यु ही बुलाते रहना ,
कभी अलविदा न कहना, कभी अलविदा न कहना।
शुरुआत में तो मैं बहुत परेशां सा रहा , कुछ समझ में ही नहीं आता था कि क्या करना है और कहाँ जाना है। सुरुआत के पुरे महीने तो मुझे मकान ही नहीं मिला था , लेकिन धीरे धीरे सब कुछ व्यवस्थित होने लगा ! जिंदगी के बहुत सारे चीज़ मिले तो शायद जिंदगी का पहला था, मेरा पहला bike मेरा पहला टीवी , मेरा पहला फ्रिज और पता नहीं क्या क्या पहला। इतनी तो इबादत जरुर करूँगा तुम्हारी के तूने बहुत कुछ बक्शा मुझे बहुत कुछ।
जब ब्रांच से परेशां होने लगा तो फिर मुझे agri वाली सीट मिल गयी, जहाँ मैंने दिल खोल कर काम किया और sirf यही नहीं पुरे ब्रांच का कम किया , mast होकर काम करना और पूरी बेफिक्री से लेकिन पूरी ईमानदारी से , मैंने यही पे सीखा, kitna भी टेंशन क्यूँ न हो मस्त रहना है. और फिर जिन्दादिली भी।
२१ नवम्बर को मैं कृष्णा से और प्रमोद से मिला। और तब से जिंदगी में अच्छे बदलाव आने भी शुरू हो गए क्यूँ शायद हमउमर वालो का साथ सबसे शानदार होता है, फिर मिला मैं पवन गोयल से। साथ ही साथ कितने लोग आते रहे जिंदगी में। ब्रिजेन्द्र , ब्रिज वीर, हम खाते पीते और खूब मस्ती करते रहे क़ुच लोगो के बारे में जरुर लिखूंगा।
कृष्णा, मस्त एकदम भगवन कृष्णा की तरह , मदमस्त अल्हड , लेकिन बहोत साफ दिल, और नेक , सच कहता हु भगवन ने ऐसा दिल सिर्फ कुछ लोगो को ही वरदान दिया है. कम में थोडा ढीला जरुर है लेकिन कभी किसी का भी बुरा नहीं सोचता। हमेशा अच्छा करने का सोचता है और यही तो बड़प्पन है, इतना जिम्मेदार बंदा इस उम्र में बहोत कम लोग होते हैं ,अपने सारे छोटे भाई बहनों को साथ में रखकर पढाना लिखना बहुत बड़ी बात होती है, uski पूरी सैलरी ख़तम हो जाती है लेकिन वो कभी कुछ भी शिकायत नहीं करता जिंदगी से, बिना बोले त्याग , शायद ये uske liye बहोत बड़ा ward होगा और शायद मेरे लिए भी , लेकिनह शायद ये सच है की ये उसका बहोत बड़ा virture है। मैंने बहुत कुछ सीखा भी है उस से और ये दुआ करता hun की जहाँ भी रहे अच्छे से रहे अच्छा कम करे और बहुत आगे जाये। मुझे लगता है वो जिंदगी से बहुत कुछ deserve करता है। बहुत साडी अच्छी दुआ मेरे तरफ से उसके लिए।
प्रमोद , अच्छा यार बुरा ज्यादा मायने कभी नहीं रखता, वो बिना किसी पार्टी में शरीक होते हुए भी हमारे लिए सबकुछ करता रहा , मैं उसकी सबसे बड़ी बात मानता हूँ ,कभी भी किसी बात का बुरा नहीं मानता , बस सब कुछ करता जाता है , एक कमजोरी देखि मैंने की वो बहोत मेहनत करता है फिर भी किसी चीज़ को अंजाम तक पहुंचाते पहुंचाते अटक जाता है , और शायद ये उसकी सबसे कमजोर कड़ी है, अब भी मैं यही कहता हूँ प्रमोद किसी भी कम को हाथ में ले तो उसे अंजाम तक पहुंचा। प्रमोद के लिए यही दुआ है की बहोत जल्दी ही बहोत जल्दी आगे की तरफ जाये।
फिर दिसम्बर 2011 का दिन , फिर जनवरी 2012, मुझे याद भी आता है अपना 25th B'day on 7th January 2012 . पता है कभी कभी आपकी जिंदगी में अच्छे लोग आते है तो कुछ बुरे लोग भी , पर सच तो ये है की कोई बुरा नहीं होता। .everyone is bounded with their situations ..sometimes u get frustrated for everything..and then u started to ask question....n what I did , I never asked any questions to GOD or anyone...and that was the only best part from me..."Aceept whatever comes in your life, in the same form as it comes"......
ha ha ha ...I remember Swami Sukhbodhanand ...Suffer, and when u suffer, suffer joyfully.....any way ek bad caption yad aa gaya mujhe.. "जिंदगी को कुछ तरह आसान कर लिया हमने , कुछ से माफ़ी मांग ली और कुछ को माफ़ कर दिया। " और सच में एक बन्दे से मैं माफ़ी मांगता हूँ , लेकिन शायद माफ़ी के काबिल भी नहीं होऊंगा ,मेरी वजह से जो दुःख उसे पहुंचा और जो तकलीफ पहुंची उसका शायद एक कतरा भी मैं अपनी माफ़ी वाले शब्द से वापस नहीं ले पाउँगा। बस इतना ही कहूँगा , "मन की किताब से तुम , मेरा नाम ही मिटा देना , गुण तो न था कोई भी , अवगुण मेरे भुला देना "
ठीक उसी वक़्त निम्बहेरा ने मुझे एक अच्छी सौगात दी। दीदी की शादी पक्की हो गयी और बड़े अच्छे से हो गयी , बुरा तो ये भी रहा की एन वक़्त पर दादाजी नहीं रहे। . बाबा मैं अभी भी आपको बहुत याद कर रहा हूँ। दीदी की शादी के बाद का आया हुआ मैं घर गया ही नहीं , पुरे साल भर ऐसा ही चलता रहा , निम्बहेरा ने एक और सौगात दी भैया की शादी भी हुई , और तब मैं घर गया पुरे साल भर बाद।
फिर गुप्ता सर मिले , सब कुछ मस्त सा चलने लगा , हमने खूब सारी पार्टियाँ की और खूब कम भी किया। गुप्ता सर का स्नेह और आशीर्वाद बना रहा मुझपर ,और श्रीवास्तव सर , जिनके बारे में कुछ भी लिखूंगा तो कम पड़ेगा। इनके स्नेह और आशीर्वाद से २ साल कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। अभी ३ दिन हो गए मुझे निम्बहेरा छोड़े हुए , लेकिन अब भी वह की खुशबु बरक़रार है , और मुझे लगता ही की ताउम्र ये बरकरार रहेगी , मैं अपने साथ हुई har अच्छी चीज़ को याद रखना चाहूँगा और जो कुछ भी यहाँ बुरा हुआ मेरे साथ वो तो मैं कबका भूल चूका हूँ।
मालीवाल जी , हमेशा लड़ जाता था मैं और वापस thodi देर में उन्हें हंसाकर आता था ,रण सिंह जी को याद करना चाहूँगा , जय भोले , विनोद सोनी , मस्त बंदा है , पंडत जी , जिन्होंने मुझे सिंगल से डबल होने का आशीर्वाद कभी नहीं दिया , हा हा हा , फिर सुरेश जी , बहुत बढ़िया वक़्त गुजरा सुरेशजी के साथ ,और वो अब भी याद करते हैं , हेमंत , जिस से मैंने बेफिक्री सीखी , अरे सर टेंशन क्यों लेते हो , सबकुछ होता रहेगा , बैंक का काम तो होता रहेगा। एक बंदी आई, शीतल, सच तो ये है की मैंने उसे कुछ भी नहीं सिखाया, but मैंने उससे सीखा , बहुत कुछ , जिंदगी के बारे में , जिम्मेदारियों के बारे में और भी बहोत कुछ। फिर भराडिया सर , और शर्मा सर , शुक्रगुजार हूँ की इतने अच्छे लोग मिले मुझे। जाकिर भाई भी बहोत याद आयेंगे मुझे , ब्रांच के बहार बहुत वक़्त गुजारा है। हर चीज़ में साथ दिया ! कैलाश जी भी , पुराने दिनों के चालान , हा हा हा और फिर unka दिया हुआ सब आईडिया ,
ले लो न जी साब। खुद सब को कुछ न कुछ बक्श्ता है। और गार्ड्स में विनोद जी , भोला , कभी कभी मैं iritate ho जाया करता थे लेकिन end में उनका बहुत अच्छा होने सब chizo पे bhari pad जाया करता है। last में हुई एक buri चीज़ ने मुझे बहोत परेशां किया और मुझे khud को gira हुआ सा mahsush हुआ, पर thode दिन में लगा की उस bande में bachpana है , और शायद अच्छे बुरे की और इस duniya की समझ नहीं है , हमेशा कहा करता था की उसे protect करने की jarurat है duniya की buraion से और mujh पर ही ilzam , khair जो भी हुआ मेरे लिए एक सबक ही था ,मैंने अब भी यही कहता हूँ बचपना है और उसने जो कुछ भी कहा किया उसके लिए मेरे मन में द्वेष नहीं है , मैं अब भी उसे सलाह दूंगा की अच्छे बुरे की पहचान करना सीखे।
और अंत में एक एक बहुत प्यारी वजह,कुछ नहीं लिखूंगा । और कुछ भी इसलिए नहीं लिखूंगा की , मुझे बहुत कुछ अभी लिखना है और शायद जिंदगी भर।कुछ न कुछ तो लिखता रहूँगा न यार जिंदगी भर, अच्छा या बुरा। अच्छी चीज़े तो मैं हमेशा संजोता हूँ , और बुरी सबकुछ भूल जाता हु। ।
अलविदा निम्बाहेरा , फिर मिलेंगे और जरुर मिलेंगे , इसी वादे के साथ,
बीच राह में दिलबर, बिछड़ जाये कहीं हम अगर ,और सूनी सी लगे तुझे जीवन के ये डगर।
हम लौट आयेंगे , तुम यु ही बुलाते रहना ,
कभी अलविदा न कहना, कभी अलविदा न कहना।
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