दम मलंग मलंग, दम दम मलंग मलंग , है इश्क़ मेरा
इश्क़ लबो पे , इश्क़ दुआ में ,
जिस्म में, रूह में ,इश्क़ रवा रवा रवा ,
इश्क़ नज़र में इश्क़ बशर में.
अक्श में रक्श में , इश्क़े निशां निशां निशां। .
दम मलंग मलंग , इश्क़ है मलंग मेरा। …
वास्तव में इश्क़ तो रूहानी होता है , और अब इश्क़ को मलंग का शब्द दिया है। ।शायद ये मलंग शब्द सूफी है। सूफियो ने इसे अपना अहसास दिया है तो ये गाना बहुत प्यारा बन बैठा है। सच तो ये है इश्क़ को कोई सा भी नाम दे दो, इश्क़ तो इश्क़ ही रहेगा। आवारा इश्क़ , बंजारा इश्क़ और पता नहीं क्या क्या। सबसे बड़ी बात तो ये है कि आप इस मलंग इश्क़ को कैसे मह्सुश करते हो। और जब आप इश्क़ में होते हो तो शायद खोना , पाना बड़ी बात नहीं होती , और जब ये सोचते हो के ऐसा क्यों हो रहा है तो फिर वो इश्क़ मलंग नहीं रह पाता , सच तो ये है कि वो इश्क़ ही नहीं रह पता। बस इश्क़ में इश्क़िया। ..
इश्क़ लबो पे , इश्क़ दुआ में ,
जिस्म में, रूह में ,इश्क़ रवा रवा रवा ,
इश्क़ नज़र में इश्क़ बशर में.
अक्श में रक्श में , इश्क़े निशां निशां निशां। .
दम मलंग मलंग , इश्क़ है मलंग मेरा। …
वास्तव में इश्क़ तो रूहानी होता है , और अब इश्क़ को मलंग का शब्द दिया है। ।शायद ये मलंग शब्द सूफी है। सूफियो ने इसे अपना अहसास दिया है तो ये गाना बहुत प्यारा बन बैठा है। सच तो ये है इश्क़ को कोई सा भी नाम दे दो, इश्क़ तो इश्क़ ही रहेगा। आवारा इश्क़ , बंजारा इश्क़ और पता नहीं क्या क्या। सबसे बड़ी बात तो ये है कि आप इस मलंग इश्क़ को कैसे मह्सुश करते हो। और जब आप इश्क़ में होते हो तो शायद खोना , पाना बड़ी बात नहीं होती , और जब ये सोचते हो के ऐसा क्यों हो रहा है तो फिर वो इश्क़ मलंग नहीं रह पाता , सच तो ये है कि वो इश्क़ ही नहीं रह पता। बस इश्क़ में इश्क़िया। ..
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