Tuesday, December 10, 2013

इम्तेहान

कभी कभी इम्तेहान देता रहता हु , खुद के होने का इम्तेहान , कभी चुप रहकर और कभी तो खुद पर हंसकर।  सच तो ये है कि इतनी टेंशन है जिंदगी में कि अगर हर चीज़ को सीरियसली लिया जाये तो जिंदगी बहुत कड़वी हो जायेगी। हम कभी कभी तो इंसान कि तरह व्यव्हार करते है , और कभी मशीन कि तरह।  पर सच तो ये है कि इंसान बन कर रहना बहुतो को परेशां कर सकता है , फिर बेहतर होता है कि मशीन ही बने रहो , लेकिन ऐसा भी नहीं हो सकता ना,

बस हँसते रहो , झेलते रहो :)  

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