Friday, January 24, 2014

the worst days....

पिछले तीन दिनों से मैं बहुत परेशां हूँ , एक तो वो २२ का रात में मुझे किसी ने कॉल किया और फिर परेशां किया , फिर कल एक चिड़िया मेरे बाइक के निचे आकर मर गयी और आज सुबह मेरी वजह से मेरे पीछे चल रहा बाइक सवार गिर कर घायल हो गया , और आज दिन में एक बन्दे ने मेरी झूठी शिकायत करी जिसकी वजह से मैं अभी भी परेशां सा महसुश कर रहा हुँ।  पता नहीं क्यों हो रहा है कुछ समझ में नहीं आ रहा है .पर सब कुछ बुरा नहीं होता , कुछ न कुछ अच्छा जरुर होता है और कोई न कोई अच्छा इंसान  जरुर   आस पास होता है , उम्मेद सिंह , आज यहाँ पर बैठा है और मेरे लिए खाना बना रहा है और सिर्फ यहाँ इसलिए है कि मैं  परेशां न रहूँ।।। सच है खुदा भी कभी कभी मेरे लिए नेमत बख्शता है। 

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