6 महीने पूरे हुए सांचौर में , पता ही नहीं चला कि कैसे वक़्त निकल गया। 26 सितम्बर से कब 26 मार्च हो गया। सच कहा गया है जिंदगी कभी रूकती नहीं , अनवरत चलती रहती है। चूक जाते हैं तो बस हम। कभी खुद पहचानने में या फिर या फिर कभी दुसरो को पहचानने में। देखते देखते पूरी जिंदगी ऐसे ही निकल जाती है। बस खुद के लिए कुछ अच्छे पल निकाल लो या फिर कुछ अच्छे , बेहतरीन पल बुन लो। इन बेहतरीन पलों से ही तो जिंदगी बनती है , बाकी तो क्या है , जिंदगी ऐसे भी चलती रही है और वैसे भी चलती रहेगी।
छोड़ो सनम काहे का गम , हँसते रहो , खिलते रहो।
मिट जायेगा सारा ग़िला , हमसे गले मिलते रहो :)
छोड़ो सनम काहे का गम , हँसते रहो , खिलते रहो।
मिट जायेगा सारा ग़िला , हमसे गले मिलते रहो :)
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