Tuesday, April 15, 2014

गुमनाम है कोई , बदनाम है कोई.

20 साल बाद , हाँ यही नाम है ,बहुत पुरानी थ्रिलर है ,
और पता नहीं कितनी बार  सुन रखा है इस song को ,
रेडियो के गीतमाला में या फिर 10.30  के छायागीत प्रोग्राम में ,
और जितनी  बार सुनता हूँ  नया  ही होता है ,कभी पुराना  नहीं होता।
सच है रेडियो मेरी जिंदगी का हिस्सा रहा है और सदा रहेगा।                                                              
और जब जब मेरे जेहन में ये गीत गूंजता है, मुझे हमेशा जीने का एक नया सबक मिल जाता है.
और शायद जिंदगी की असलियत बयां कर जाता है :-                                                                                                                                                               
 गुमनाम है कोई , बदनाम है कोई, किसको खबर कौन  है वो ,अनजान है कोई......
किसको समझें हम अपना ,कल का नाम है एक सपना
आज अगर तुम जिन्दा हो , तो कल के लिए.....
कल के लिए माला जपना .......

पल दो पल की मस्ती है ,बस दो दिन की बस्ती है..
चैन  यहाँ पर महंगा है और मौत यहाँ .....
और मौत यहाँ पर सस्ती है ....

कौन बला तूफानी है , मौत को खुद हैरानी है ,
आये सदा विरानो से , जो पैदा हुआ
जो पैदा हुआ वो फ़ानी है .....
( फ़ानी -नश्वर )

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