घर , एक साल हो गये , पिछले साल इसी टाइम भैया क़ी शादी मे गया था , वक़्त का तो जैसे पाता ही नहीं चालता , मानों पर लगा कर उङ रहा हो। जनवरी की उथल पुथल के समय से ही घर जाने का सोच रहा था , जो अब सम्भव हुआ है , ट्रांसफर के बाद पहली बार घर जा रहा हूँ। कुछ पल अपनी जिंदगी के पुरसुकून निकालने।
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