ये कहानी हमारी ही थी ,पर लफ्जो को मुस्कुराना तो तुमने ही सिखाया था, कुछ पन्ने स्याह थे उसके ,पर हर पन्ने पर नाम तुम्हारा था
Saturday, November 26, 2016
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कभी कभी मैं सोचता हूँ कि मैं कहाँ आ गया , और कहाँ जा रहा हूँ , न तो कोई मंजिल है और न ही कोई रास्ता, बस जीना है तो जिए जारहाहूँ, क्या यही हो...
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Good Story and a lot of history.... M loving it ..It seems Hindi is also comlicated foe me..Complicated words by author ....But m learni...
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बिखर जाने का मन कर रहा है ....कभी कभी ही तो ऐसा महसूस होता है जिंदगी में ..जब पूरी दुनिया, ये शहर , ये जॉब बेमतलब के लगने लगते हैं ....और त...
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