Friday, January 13, 2017

When you suffer, suffer joyfully...

कहते हैं न कि जब suffering आता है तो बिना कहे आता है ,और सब तरफ से आता हैं , हम कितने भी ज्ञानी क्यों न हो जाये कितने बड़े क्यों न हो जाये , बड़ी बड़ी बातें क्यों न कर ले , जब वक़्त बुरा होता है तो ये सब कुछ सिर्फ मन को बहलाने के काम आता है।  वास्तव में दुःख मनुष्य के मन का स्टेट है और उसे सिर्फ वही मह्सुश कर सकता है जिसके साथ वो होता है।  मैं गीता की, कर्मा की, प्रारब्ध की, बातें क्यों न कर लूँ , लेकिन जब अपने जन्मदिन पर अपने सबसे पुराने और अच्छे दोस्तों का फ़ोन नहीं आता, भाई दुःख तो बहुत होता है। और वह भी तब जब आपके गृह बहोत बुरे चल रहे हो और आप खुद को बहोत लो फील कर रहे हों।

सच हैं की पुरानी दोस्ती को महज इस बात से तौला नहीं जा सकता कि, आपके जन्मदिन पर शुभकामनाये नहीं दी गयी ,पर यह भी सच है की आपकी छोटी सी जिंदगी भी इन्ही छोटी छोटी चीजों से बनी होती है। मैंने इस ब्लॉग को पिछले लगभग १ डेढ़ सालो से छोड़ रखा हैं और आज इसे वापस पढता हूँ तो लगता हैं की जरुरी हैं कि इसे जारी रखा जाना चाहिए , कम से कम अपनी भावनाओ को शब्द तो देने में समर्थ रहूँ, वार्ना ऐसा न हूँ की शायद अपने भावनायों को , दुःख को , अपनी खुशिओं को व्यक्त करना भी भूल जाऊ।
suffering का जो दौर चल रहा है अपने  जीवन में , पता नहीं कब ख़तम हो।  पर इतना तय है इस दफा भी मैं कुछ मजबूत होकर और कुछ अच्छा बनकर निकलूंगा। कहते हैं न ,Whatever comes to you , accept it gracefully.When you suffer suffer It  joyfully. जब  आपके खिलाफ परिस्थितियां हो जाये और आप एकदम लाचार हो जाये आपको चुपचाप किनारे बैठ कर वक़्त को गुजर देने देना चाहिए। जब अच्छा वक़्त निकल गया तो बुरा भी निकल जायेगा। अकेलेपन का ये दौर भी निकल जायेगा, बहुत कुछ अच्छा सीखा जायेगा और बहुत कुछ अचछा बना जायेगा।


                      

No comments:

Post a Comment

निष्पृह