Tuesday, December 10, 2013

इम्तेहान

कभी कभी इम्तेहान देता रहता हु , खुद के होने का इम्तेहान , कभी चुप रहकर और कभी तो खुद पर हंसकर।  सच तो ये है कि इतनी टेंशन है जिंदगी में कि अगर हर चीज़ को सीरियसली लिया जाये तो जिंदगी बहुत कड़वी हो जायेगी। हम कभी कभी तो इंसान कि तरह व्यव्हार करते है , और कभी मशीन कि तरह।  पर सच तो ये है कि इंसान बन कर रहना बहुतो को परेशां कर सकता है , फिर बेहतर होता है कि मशीन ही बने रहो , लेकिन ऐसा भी नहीं हो सकता ना,

बस हँसते रहो , झेलते रहो :)  

Wednesday, December 4, 2013

दम दम मलंग मलंग , है इश्क़ मेरा

दम मलंग मलंग, दम दम मलंग मलंग , है इश्क़ मेरा
इश्क़ लबो पे , इश्क़ दुआ में ,
जिस्म में, रूह में ,इश्क़ रवा रवा रवा ,
इश्क़ नज़र में इश्क़ बशर में.
अक्श में रक्श  में , इश्क़े निशां निशां  निशां। .
दम मलंग मलंग , इश्क़ है मलंग मेरा। …


वास्तव में इश्क़ तो रूहानी होता है , और अब इश्क़ को मलंग का शब्द दिया है। ।शायद ये मलंग शब्द सूफी है। सूफियो ने इसे अपना अहसास दिया है तो ये गाना बहुत प्यारा बन बैठा है। सच तो ये है इश्क़ को कोई सा भी नाम दे दो, इश्क़ तो इश्क़ ही रहेगा। आवारा इश्क़ , बंजारा इश्क़ और पता नहीं क्या क्या। सबसे बड़ी बात तो ये है कि आप इस मलंग इश्क़ को कैसे मह्सुश करते हो। और जब आप इश्क़ में होते हो तो शायद खोना , पाना बड़ी बात नहीं होती , और जब ये सोचते हो के ऐसा क्यों हो रहा है तो फिर वो इश्क़ मलंग नहीं रह पाता , सच तो ये है कि वो इश्क़ ही नहीं रह पता। बस इश्क़ में इश्क़िया। ..

Sunday, November 3, 2013

Prisoner of past

पिछला लेख लिखे करीब  महीने भर हो गए। यहाँ आये हुए महीने और 10 दिन हो गए। पता ही नहीं चलता ही के जिंदगी कैसे निकलती चली जाती है।  सब कुछ छूटता सा चला जाता है और जिंदगी अपनी मौज में आगे बढ़ती चली जाती है।  पीछे अगर कुछ छूटता है  तो  सिर्फ यादें।  कुछ बुरी यादें  फिर कुछ अच्छी यादें। हमेशा   से मेरी आदत रही है कि बुरी चीज़ों को और बुरी यादों को छोड़ कर आगे बढ़ता चला जाऊ।  पर शायद ये हो नहीं पाता , हम हमेशा prisoner of past बने रहते हैं , भुत के गुलाम और शायद हमेशा बने रहेंगे ,पुरानी चीज़ें और बुरी चीज़ें , पुरानी यादें और पुरानी बातें,कहीं न कहीं , कभी न कभी आपके वर्तमान को परेशां करती रही है और हमेशा से करती रहेंगी, हम भाग नहीं सकते और न ही भूल सकते है।

लेकिन हम ऐसे भी तो जिंदगी नहीं गुजार सकते न। सब कुछ जो गया बिता है आखिर वो हमारे वुजूद का हिस्सा होता है , आपके होने का सबब , the proof of your existence . anyway जिंदगी तो ऐसे ही यादों से बनती चली  जायेगी , कुछ नए लोग आपकी जिंदगी का हिस्सा बनते चले जायेंगे और कुछ पुराने लोग छूटते चले जायेंगे।

आज दीपावली है और सोच रहा हु कि शायद कितने सालो से दीपावली में अपने घर पर नहीं हूँ , गुस्सा आता है कि क्यों मैं ये जॉब कर रहा हूँ , घर से इतनी दूर के किसी त्यौहार में घर नहीं जा पाता , अकेला हूँ और ऐसा लग रहा है कि मुझे mummy -papa के पास घर में होना चाहिए , पर कुछ कर भी नहीं सकता न। सिवाए बोर होने के और गुस्सा होने के।  लेकिन इस से तो खुद का ही नुकसान करूँगा ना।

एक अच्छी चीज़ तो ये है कि अभी चुन्नी लाल सर आये थे और दीपावली अपने घर में मानाने का आमंत्रण दे गए , अच्छा लगा यार , इस अनजाने प्रदेश में जब कहीं से भी अपनेपन की थोड़ी सी बू आती है तो ऐसा लगता है जैसे पूरा संसार मिल गया हो। चलो कोई ना happy Dipawali  

Thursday, October 3, 2013

शुभ प्रभात सांचौर।

शुभ प्रभात सांचौर। शायद ये शब्द कहने मे मुझे १० दिन लग गए। थोडा वक़्त तो लगता है न किसी भी नए चीज़ को , नयी जगह को , नए परिवर्तन को स्वीकार करने में। और शायद ab main स्वीकार करने लगा हूँ सांचोर को, और अपनी प्यारी ब्रांच बिछावाड़ी को।  हाँ खुश होने के लिए स्वीकार करना जरुरी है , और तब ही आप अपनी जिंदगी को सही चला सकते है क्यूनी आप न तो भूतकाल में जीते है और न ही भविष्य काल  में, आपको जीना पड़ता है वर्तमान में , और आपको सिर्फ और सिर्फ अपने वर्तमान को बेहतर बनाना होता है..

25 th Sept, सुबह 10 बजे जब मैं निम्बहेरा से चला सांचौर ।  अपनी प्यारी बाइक पे मैं निकल पड़ा था अपनी मंजिल की तरफ, सांचोर , डोरिया चौराहा तक मैं शायद कांपता रहा, 15 km/ hour की स्पीड से मैं निकल रहा था , पर डोरिया से निकलते ही दिमाग में एक ही चीज़ वापस आई कि बस अब तो आगे की तरफ ही चलते जाना है। फिर उदयपुर , तेज बारिश में भींगता हुआ, फिर गोगुन्दा , स्वरूपगंज और अबू रोड , अबू रोड में चाय पी , और फिर आगे बढ़ चला सांचोर की तरफ , चम्बल की हरी भरी घाटी , फिर अरावली के पर्वत को छोड़ता हुआ मैं थार के , मारवाड़ के रेगिस्तानी इलाके में जा रहा था ! कहाँ हरे भरे खेत और कहाँ सिर्फ कीकर की झाड़ियाँ, शाम के 6.30 बजे मैं संचोरे पहुँच चूका था , और उसी होटल के कमरे से ye सब लिख रहा हूँ जहाँ मैं रुका। पुरे 8 घंटे का सफ़र बाइक पे मैंने पहली बार तय की, शायद mera पैर और पीठ भी पूरा दुखने लग गया था।

एक अजीब सा डर , मन को परेशां किये जा रहा था की पता नहीं जगह कैसा होगा , ब्रांच कैसी होगी, लोग कैसे होंगे। साँचोर मुख्य ब्रांच में भी मैं उसी दिन हो आया, लगा की जगह ठीक ठाक  है तो सब कुछ सही ही होगा। अगली सुबह मैं अपनी ब्रांच के लिए चला , जहाँ शायद मेरे किस्मत के अगले 2 ya ३ साल लिखे जाने है ,26 की सुबह जब मैं बिछावाड़ी के लिए चला तो मैंने कुछ भी खाया नहीं था , एक कसबे की उम्मीद कर के मैं जा रहा था की वही कुछ खा लूँगा।  पर जैसे जैसे मैं आगे बढ़ता गया मेरा दिल बैठता चला गया , एक छोटा सा देहाती, अर्ध रेगिस्तानी क़स्बा , और जब ब्रांच पहुंचा , मेरा दिल रोने को हो आया , लगा की कहाँ आ गया मैं , कहाँ मुझे फंसा दिया गया , फिर पीने  को पानी भी नहीं , मेरा मन ,मेरा दिल, और मेरी इच्छा सब कुछ बैठता सा गया , दिन भर गला रुंधा सा रहा, ३, ४, लोगो से बात भी की , और sabne यही कहा की नए नए हो २,४ दिनों में सेट हो जाओगे फिर सब कुछ अच्छा लगने लगेगा , मौज करो तुम तो वहां पे , पर शायद मेरी उस दिन की मनः स्थिति को कोई समझ नहीं पा रहा था , लेकिन  आज जब मैं यहाँ ९ दिन गुजर चूका हु , मुझे lagta है की सब सही थे यार, मेरा मन यहाँ लगना शुरू हो गया , लोग यहाँ अच्छे है , स्टाफ सपोर्टिव है और फालतू की मगजमारी नहीं है यार , आप आराम से ब्रांच यहाँ 5.30 तक बंद कर सकते हैं , बाकि का वक़्त तो आपका है।  फिर मैंने यहाँ देखा की एजेंट्स का बोलबाला है , लेकिन ये सब भी बंद हो सकता है।  एक सबसे अच्छे और बड़ी बात जो मुझे महसूस हुई ये की शायद मैं यहाँ जी सबसे निचला तबका है , सबसे गरीब और निरक्षर उनकी सेवा कर पाउँगा।

बस अब इतने दिन यहाँ गुजरने के बाद बहुत हल्का और फ्री महसूस कर रहा हूँ , २६थ की और आज के मनः स्थिति में अमूल चुल परिवर्तन हुआ है , और शायद एकदम ही परिवर्तित हो गया है।  ब्रांच में लोकेश, प्रेम के साथ वैसा ही रिश्ता बन गया है जैसा शायद कृष्णा और प्रमोद के साथ था , और शायद इसी वजह से यहाँ अच्छा महसूस करना शुरू कर चूका हूँ , 20 किमी बाइक चला कर आने और जाने में थोड़ी परेशानी जरुर होती है , लेकिन ये थोड़े दिनों में एडजस्ट हो जायेगा।  बस यही लिख कर सांचोर मैं तुम्हे नमस्कार करता हूँ की अगले कुछ दिन , जब तक मैं यहाँ हूँ , अच्छे गुजरे , खुशगवार गुजरे , बस और क्या , इतनी छोटी सी कामना तो मैं कर ही सकता हूँ न यार .      

Tuesday, September 24, 2013

`अलविदा निम्बाहेड़ा। ...

पता नहीं क्या कहूँ , या समझ में ही नहीं आ रहा के कैसे तुझे थैंक्स कहूँ। अपनी जिंदगी के २ सबसे कीमती और सबसे महत्वपूर्ण साल मैंने यहाँ गुजरे ,मेरे 25th और 26th years  …मुझे याद आता  है वो 1st अगस्त 2011 का दिन जब मैंने निम्बहेरा ज्वाइन किया था, तब तो शायद  मैं बहुत डरा हुआ था , सिर्फ ये सोचकर के के पता नहीं यहाँ कैसे दिन गुजरूँगा।  छोटी जगह , और पता नहीं यहाँ कुछ सुविधा हो भी या न हो। फिर फिर यहाँ आते ही मैं रजनीश सर से मिला और दो दिन में ही ऐसा लगा की शायद बहुत अच्छी जगह में हु  और धीरे धीरे यहाँ एडजस्ट होता चला गया।  आर के जैन सर और फिर सोनी सर , भगवान का आशीर्वाद रहा की मुझे इतने अच्छे सर मिले जिन्होंने जिन्दगी का और बैंकिंग में रास्ता दिखाया।
शुरुआत में तो मैं बहुत परेशां सा रहा , कुछ समझ  में ही  नहीं आता था कि क्या करना है और कहाँ जाना है।  सुरुआत के पुरे महीने तो मुझे मकान ही नहीं मिला था , लेकिन धीरे धीरे सब कुछ व्यवस्थित होने लगा ! जिंदगी के बहुत सारे चीज़ मिले तो शायद जिंदगी का पहला था, मेरा पहला bike मेरा पहला टीवी , मेरा पहला फ्रिज और पता नहीं क्या क्या पहला। इतनी तो इबादत जरुर करूँगा तुम्हारी के तूने बहुत कुछ बक्शा मुझे बहुत कुछ।
जब ब्रांच से परेशां होने लगा तो फिर मुझे agri वाली सीट मिल गयी, जहाँ मैंने दिल खोल कर काम  किया और sirf यही नहीं पुरे ब्रांच का कम किया , mast होकर  काम  करना और पूरी बेफिक्री से लेकिन पूरी ईमानदारी से , मैंने यही पे सीखा, kitna भी टेंशन क्यूँ न हो  मस्त रहना है. और फिर जिन्दादिली भी।

२१ नवम्बर को मैं कृष्णा से और प्रमोद से मिला। और तब से जिंदगी में अच्छे बदलाव आने भी शुरू हो गए क्यूँ शायद हमउमर वालो का साथ सबसे शानदार होता है, फिर मिला मैं पवन गोयल से। साथ ही साथ कितने लोग आते रहे जिंदगी में।  ब्रिजेन्द्र , ब्रिज वीर, हम खाते पीते और खूब मस्ती करते रहे क़ुच लोगो के बारे में जरुर लिखूंगा।

कृष्णा, मस्त एकदम भगवन कृष्णा की तरह , मदमस्त अल्हड , लेकिन बहोत साफ दिल, और नेक , सच कहता हु भगवन ने ऐसा दिल सिर्फ कुछ लोगो को ही वरदान दिया है. कम में थोडा ढीला जरुर है लेकिन कभी किसी का भी बुरा नहीं सोचता।  हमेशा अच्छा करने का सोचता है और यही तो बड़प्पन है,  इतना जिम्मेदार बंदा  इस उम्र में बहोत कम लोग होते हैं ,अपने सारे  छोटे भाई बहनों को साथ में रखकर पढाना  लिखना बहुत बड़ी बात होती है, uski  पूरी सैलरी ख़तम  हो जाती  है लेकिन वो कभी कुछ भी शिकायत  नहीं करता जिंदगी से, बिना बोले त्याग , शायद ये uske liye बहोत बड़ा ward होगा और शायद मेरे लिए भी , लेकिनह शायद ये सच है की ये उसका बहोत बड़ा virture है। मैंने बहुत कुछ सीखा भी है उस से और ये दुआ करता hun की जहाँ भी रहे अच्छे से रहे अच्छा कम करे और बहुत आगे  जाये।  मुझे लगता है वो जिंदगी से बहुत कुछ deserve करता है। बहुत साडी अच्छी दुआ मेरे तरफ से उसके लिए।

प्रमोद , अच्छा यार बुरा ज्यादा मायने  कभी नहीं रखता, वो बिना किसी पार्टी में शरीक होते हुए भी हमारे लिए सबकुछ करता रहा , मैं उसकी सबसे बड़ी बात मानता हूँ ,कभी भी किसी बात का बुरा नहीं मानता , बस सब कुछ करता जाता है , एक कमजोरी देखि मैंने की वो बहोत मेहनत करता है फिर भी किसी चीज़ को अंजाम तक पहुंचाते पहुंचाते अटक जाता है , और शायद ये उसकी सबसे कमजोर कड़ी  है, अब भी मैं यही कहता हूँ प्रमोद किसी भी कम को हाथ में ले तो उसे अंजाम तक पहुंचा। प्रमोद के लिए यही दुआ है की बहोत जल्दी ही बहोत जल्दी आगे की तरफ जाये।

 फिर दिसम्बर 2011 का दिन , फिर जनवरी 2012, मुझे याद भी आता  है अपना 25th B'day on 7th January 2012 . पता है कभी कभी आपकी जिंदगी में अच्छे लोग आते है तो कुछ बुरे लोग भी , पर सच तो ये है की कोई बुरा नहीं होता। .everyone is bounded with their situations ..sometimes u get frustrated for everything..and then u started to ask question....n what I did , I never asked any questions to GOD or anyone...and that was the only best part from me..."Aceept whatever comes in your life, in the same form as it comes"......
ha ha ha ...I remember Swami Sukhbodhanand ...Suffer, and when u suffer, suffer joyfully.....any way ek bad caption yad aa gaya mujhe..  "जिंदगी को कुछ तरह आसान कर लिया हमने , कुछ से माफ़ी मांग ली और कुछ को माफ़ कर दिया।  " और सच में एक बन्दे से मैं माफ़ी मांगता हूँ , लेकिन शायद माफ़ी के काबिल भी नहीं होऊंगा ,मेरी वजह से जो दुःख उसे पहुंचा और जो तकलीफ पहुंची उसका शायद एक कतरा भी मैं अपनी माफ़ी वाले शब्द से वापस नहीं ले पाउँगा। बस इतना ही कहूँगा , "मन की किताब से तुम , मेरा नाम ही मिटा देना , गुण तो न था कोई भी , अवगुण मेरे भुला देना "

ठीक उसी वक़्त निम्बहेरा ने मुझे एक अच्छी सौगात दी।  दीदी की शादी पक्की हो गयी और बड़े अच्छे से हो गयी , बुरा तो ये भी रहा की एन वक़्त पर दादाजी नहीं रहे। . बाबा मैं अभी भी आपको बहुत याद कर रहा हूँ।   दीदी की शादी के बाद का आया हुआ मैं घर गया ही नहीं , पुरे साल भर ऐसा ही चलता रहा , निम्बहेरा ने एक और सौगात दी भैया की शादी भी हुई , और तब मैं घर गया पुरे साल भर बाद।
फिर गुप्ता सर मिले , सब कुछ मस्त सा चलने लगा , हमने  खूब सारी पार्टियाँ की और खूब कम भी किया। गुप्ता सर का स्नेह और आशीर्वाद बना रहा मुझपर ,और श्रीवास्तव सर , जिनके बारे में कुछ भी लिखूंगा तो कम पड़ेगा।  इनके स्नेह और आशीर्वाद से २ साल कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। अभी ३ दिन हो गए मुझे निम्बहेरा छोड़े हुए , लेकिन अब भी वह की खुशबु बरक़रार है , और मुझे लगता ही की ताउम्र ये बरकरार रहेगी , मैं अपने साथ हुई har अच्छी चीज़ को याद  रखना चाहूँगा और जो कुछ भी यहाँ बुरा हुआ मेरे साथ वो तो मैं कबका भूल चूका हूँ।

मालीवाल जी , हमेशा लड़ जाता था मैं और वापस thodi देर में उन्हें हंसाकर आता था ,रण सिंह जी को याद करना चाहूँगा , जय भोले , विनोद सोनी , मस्त बंदा  है , पंडत जी , जिन्होंने मुझे सिंगल से डबल होने का आशीर्वाद कभी नहीं दिया , हा हा हा , फिर सुरेश जी , बहुत बढ़िया वक़्त गुजरा सुरेशजी के साथ ,और वो अब भी याद  करते हैं , हेमंत , जिस से मैंने बेफिक्री सीखी , अरे सर टेंशन क्यों लेते हो , सबकुछ होता रहेगा , बैंक का काम तो होता रहेगा। एक बंदी आई, शीतल, सच तो ये है की मैंने उसे कुछ भी नहीं सिखाया, but मैंने उससे सीखा , बहुत कुछ , जिंदगी के बारे में , जिम्मेदारियों के बारे में और भी बहोत कुछ। फिर भराडिया सर , और शर्मा सर , शुक्रगुजार हूँ की इतने अच्छे लोग मिले मुझे। जाकिर भाई भी बहोत याद आयेंगे मुझे , ब्रांच के बहार बहुत वक़्त  गुजारा है।  हर चीज़ में साथ दिया ! कैलाश जी भी , पुराने दिनों के चालान , हा हा हा और फिर unka दिया हुआ सब आईडिया ,
ले लो न जी साब।  खुद सब को कुछ न कुछ बक्श्ता है।  और गार्ड्स में विनोद जी , भोला , कभी कभी मैं iritate ho जाया करता थे लेकिन end  में उनका बहुत अच्छा होने सब chizo पे bhari pad जाया करता है। last में हुई एक buri चीज़ ने मुझे बहोत परेशां किया और मुझे khud को gira हुआ सा mahsush हुआ, पर thode दिन में लगा की उस bande में bachpana है , और शायद अच्छे बुरे की और इस duniya की समझ नहीं है , हमेशा कहा करता था की उसे protect करने की jarurat है duniya की buraion से और mujh पर ही ilzam , khair जो भी हुआ मेरे लिए एक सबक ही था ,मैंने अब भी यही कहता हूँ बचपना है और उसने जो कुछ भी कहा किया उसके लिए मेरे मन में द्वेष नहीं है , मैं अब भी उसे सलाह दूंगा की अच्छे बुरे की पहचान करना सीखे।

और अंत में एक एक बहुत प्यारी वजह,कुछ नहीं लिखूंगा ।  और कुछ भी इसलिए नहीं लिखूंगा की , मुझे बहुत कुछ अभी लिखना है और शायद जिंदगी भर।कुछ न कुछ तो लिखता रहूँगा न यार जिंदगी भर, अच्छा या बुरा। अच्छी चीज़े तो मैं हमेशा संजोता हूँ , और बुरी सबकुछ भूल जाता हु।  ।

अलविदा निम्बाहेरा , फिर मिलेंगे  और जरुर मिलेंगे , इसी वादे के साथ,

बीच राह  में दिलबर, बिछड़ जाये कहीं हम अगर ,और सूनी सी लगे तुझे जीवन के ये डगर।
हम लौट आयेंगे , तुम यु ही बुलाते रहना ,
कभी अलविदा न कहना, कभी अलविदा न कहना।




Sunday, September 22, 2013

वह अब भी मिलती है. .

वह अब भी मिलती है. .
सुबह बनकर , शाम बनकर
और अक्सर नज़्मे बनकर
और हम कितनी देर
एक दूजे को देखते रहे हैं
और मिलकर अपनी अपनी नज्मे
जिंदगी को सुनाते  है।
     इमरोज़। 

Monday, September 9, 2013

झुकी झुकी सी नज़र बेकरार है के नहीं।

जगजीत सिंह जी का गाया ये song जब जब सुनता हूँ,  अजीब सी सिहरन होती है दिलो दिमाग मे. हर वक़्त ये पूछ पड़ता हूँ, दबा दबा सा सही इनमे प्यार है के नहीं। ।  तू अपने दिल की जवां धडकनों को गिन के बता  , मेरी तरह बेकरार है की नहीं। ।  और इस गाने का एक अंतरा जो बहुत ही दिल के करीब है , जब भी कमजोर हो रहा होता हूँ तो गुनगुना लेता हु। .. 
          तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को.. 
          तुझे भी अपने पे ही ऐतबार है के नहीं....

          

Saturday, August 24, 2013

Suffering .

Sometime u suffer for unknown reason and sum time u suffer for being good...It well said that the price of being good is paid by you and being bad is paid by others....so what just suffer...and when u suffer...suffer joyfully.

Friday, August 2, 2013

फिर वही अँधेरा।।

फिर वही बेबशी। फिर वही वाहियात पन। क़्यु मैं समेट नहीं पाता हु लम्हों को। …फ़िर वही अँधेरा। 

Sunday, June 23, 2013

क्यों मैं इतना खुश सा रहता हूँ..

कभी कभी तुम  ऐसा सवाल पूछ लेते हो कि मैं एकदम से सोच में पड जाता हूँ . और तुम्हारा ये सवाल कि " मैं क्यों हमेशा खुश रहता हूँ या खुश लगता हु", ने सचमुच मुझे सोचने को मजबूर कर दिया कि  वास्तव में ऐसा है क्या और अगर ऐसा है तो क्यों है? क्या मैं सचमुच हमेशा खुश रहता हूँ , खुश रहने की कोशिश करता हूँ या फिर बस यूँ ही ...जो भी हो कभी कभी नोटिस करता हूँ मुझे लोग ब्रांच में भी कह जाते हैं कि , हमेशा ही मुझे लोग मुस्कुराता हुआ पाते है , कुछ दिन पहले की बात है , बैंक में नए नए ज्वाइन किये एक बन्दे ने मुझसे कहा की बैंक में सिर्फ मुझे सी हँसता , मुस्कुराता और खुश पाया है , बाकी सब लोगो को हमेशा सीरियस पाया है ..
                       चलो जो भी हो ,अब तो मुझे तुम्हारे प्रश्न का  भी तो ढूँढना है कि क्यों मैं इतना मस्त रहता  हूँ, सबसे पहली बात तो ये है कि "I accept everything as it comes in life ", जो जैसा है उसको उसी रूप में स्वीकार करता हूँ/ या फिर उसी रूप में स्वीकार करने की कोशिश करता हूँ .क्यूंकि मुझे ऐसा लगता है जैसे ही मैंने किसी चीज़ को अपने हिसाब से ढालने की कोशिश की , उसका स्वरुप ही बिगड़ जाता है ...उसे उसके खुद के रूप में ही रहने देता  हूँ और उसके हिसाब से ही खुद को ढालने की जुगत में लग जाता है , तुम्हे पता है तुम हमेशा कहा करते हो की मैं वही  कहता हू जो सामनेवाला सुनना चाहता है , बस यही जुगत है , खुश रहने का जुगाड़ .....
                     दूसरी चीज़ जो मुझे लगता है की मुझे खुश रखने में सहायक होता है वो एक वाक्य में समाहित है .."Never expect anything from anyone, because expectations hurt ".. मुझे  याद आता है ३ साल पहले का एक वाकया , मेरे किसी दोस्त ने मुझसे कहा था की उसके roomies उसका care नहीं करते , इसलिए वो दुखी है, मैंने उससे सिर्फ यही कहा था कि तुम, ये expect करते हो कि  वो तुम्हारा care  करे, और जब वो तुम्हारा care नहीं करते तो तुम्हे हर्ट होता है . ऐसा करो कि ये expectation ही छोड़ दो ...और उसके बाद से मेरे उस दोस्त ने इस चीज़ की शिकायत शायद ही कभी की हो ..हाँ ये सच है , और जिंदगी का सबसे बड़ा फंडा ...
                     तीसरी चीज़ , हमेशा से हम ये कहते फिरते  हैं कि , ये बंदा बुरा है या ये बंदी बुरी है क्यूंकि हो सकता है कि उसने तुम्हें harm किया हो .पर ये सच नहीं की वो हर किसी के लिए बुरा हो, मैं तो ये सोचता हु की जब कोई खुद को harm  नहीं कर सकता तो किसी दुसरे को क्या harm  करेगा ..So I always use to think everyone is good .".. वो भी अच्छा है जिसने मेरी भलाई की और वो भी जिसने नुकसान पहुँचाया ...और जब मैं इस वाक्य को दुहराता हूँ, अन्दर से एक शक्ति मिलती है उस बन्दे के लिए भी अच्छा सोचने और अच्छा करने को जिसने जाने , अनजाने में मेरा अहित किया . और मैं समझाता हूँ दुनिया में इस से बड़ी भावना कोई हो ही नहीं सकती ..तो खुश रहने का ये था तीसरा  फंडा ...
                    इन फंडो को छोड़कर कुछ और कहूँगा , मेरी जिंदगी भी अब तक ऐसी गुजरी है की , खुश रहना तो बनता है यार , याद  आता है 2006 फ़रवरी , जब सब तरफ अँधेरा था,तब मुझे एक रोशनी की किरण भी याद आती है जिसने मुझे भरोशा दिया था खुद पे भरोशा रखने का , नहीं तो मैं पता नहीं कहाँ टूटकर बिखरा हुआ होता ।   ..मुझे 2007  याद आता है , जब मैं पागल सा हुआ करता था , ये सोच सोच कर की graduation के बाद क्या करूँगा , कहाँ जाऊंगा . साधनविहीन विपन्न ..ख़ुदा ने नेमत बक्शी , सारे दरवाजे खुद ही खोल दिए .. मैं चेहरों की मुस्कान खरीदना चाहता था , जो कितने सालों पहले जाने कहाँ खो गयी थी ..और उपरवाले ने मेरी हर  मुराद बक्शी ...मैं उड़ना चाहता था , उसने मुझे पंख बक्शे ....और मैं हँसना चाहता था उसने मुझे मुस्कराहट बक्शी ..और अब मैं उसकी इबादत इसी मुस्कराहट से करता हूँ ..
                  एक और  वजह से मेरे खुश रहने का , निश्चिंतता ,  हाँ ये भी बड़ी चीज़ है ,मैं हमेशा निश्चिंत होता हूँ कि हाँ यहाँ कोई तो है जो मेरे पास होगा ..even in the darkest hour of my life, to hold my hand and assure me , के  "मैं हूँ ना "..पता है उसे मेरी सारी बुराइयाँ पता होती है पर वो हमेशा मेरी बुराइयों में मेरी अच्छाई ढूंढ़ लाता है ...है न कमाल  की बात ...और मुझे भी ऐसा लगता है की कोई तो है जहाँ मैं अपनेसारे  दुःख गम विषाद समेट  सकता हूँ ..हर वो लम्हा समेट  सकता हु जहाँ मैं बहुत खुश होकर अपनी हंसी प्रस्फुटित की थी या फिर हर उस लम्हे को बाँट सकता हूँ जब मैंने अपनी आंसुओं से फिजाओं को रुलाया होगा .. तन्हा सा अकेला सा ..और इसी अकेलेपन का साक्षी वो , हर टूटते बिखरते सपनो का साक्षी ..वो भी तो बड़ी वजह है ...मेरे खुश रहने का ...
                    और रह गयी बात खुशिया ढूंढ़ने की तो हर छोटी चीज़ में कोशिश करता हूँ, खुशियाँ ढूंढ़ लु. ब्रांच में आने वाली वो रिटायर्ड टीचर या फिर वो साउथ इंडिया के वो अंकल ..इनको थोड़ी देर हंसाकर  भी खुश हो लेता हूँ ..या फिर वो पेंशनर अंकल जिनके पेंशन में  1 रूपया का फर्क है ..कल ही गया था बड़ी सादरी ब्रांच , बैंक  के कम से ,वहां भी एक गांववाला काफी देर से बैठा था , और जब मैंने उसे समझाया तो दुआएं दी मुझे उसने, खुश होने का एक और वजह , इस अजनबी देश में गर्मी में तपती रेत  और उसपर बारिश की पहली बूंद, तब मैंने ऐसा ही कुछ मह्सुश किया ..कुछ तो नेमत बक्शी है उपरवाले ने ...वही घंटाघर चोराहे से गुजरने लगा तो पाया की , कहाँ था मैं चंदवा में , और कहाँ आ गया मैं राजस्थान में, और आया ही नहीं इसे मह्सुश भी कर रहा हूँ ...ये नेमत नहीं तो क्या है ...मैंने इबादत न करूँ तो क्या करूँ ..मैं खुश ना रहूँ तो क्या करूँ ...
                              और भी कई वजहें  हो सकती है मेरे खुश रहने के , पर मुझे लगता है तुम्हे तुम्हारा उत्तर मिल गया होगा . ना  मिला हो तो फिर पूछना ...मेरे मूड में आकर लिखने को 2 कप चाय और 2 ,3 घंटे का वक़्त चाहिए ....कम से कम मेरे ब्लॉग में एक पोस्ट तो बढेगा ..हा हा हा ...
                              

Tuesday, June 18, 2013

बारिश की पहली बूंद

पता नहीं कितनी बारिशें आकर गुजर गई , पर हर वो बारिश जिसमे हम  और तुम साथ साथ भीगे थे , जिंदगी  की अनमोल अभिव्यक्ति सी बन  गई  . जब भी ये बारिश , मुझे छुकर गुजरती  है , मुझे वो लम्हा याद आ जाता है , मुझे वो तुम्हारा छोटा सा फूलो की छापों वाला छाता भी याद आता है , थोड़े हरे रंग का, हमारे और तुम्हारे साथ भींगने का साक्षी ..मुझे बारिश से बचाने को तुम और तुम्हे बचाने को मैं , और इसी बचाने की जद्दोजहद  में हम दोनों भींग जाते थे ..मुझे याद है मैं हमेशा तुम्हारी बायीं तरफ होता था और तुम हमेशा मेरी दायीं तरफ। और जब हम अलग होते थे , एक दुसरे को छुकर मह्सुश करते थे कि  "तुम " बहुत भींग  गए हो. शायद तुम्हे याद नहीं होगा जब हम तुम तुम्हारे उसी  छाते के नीचे होकर जा रहे रहे थे , अचानक जोरदार  बारिश हो गयी और हमारा एक कदम भी बढ़ाना मुश्किल सा हो गया था ,तब हम कुछ देर रुके थे एक छप्पर के निचे और अचानक से बिजली बहुत जोरों से कडकी थी , और तुम सिमट गए थे मुझमे , जैसे मुझमे और तुझमे कोई फर्क ही न हो और तब मुझे ऐसा लगा था की सारी कायनात ही सिमट गया हो मुझमे ...पता नहीं क्यों मैं उस वक़्त के अहसासात को शब्दों में ढाल ही नहीं पाता ..प्रकृति का सबसे हसीन लम्हा था वो मेरे लिये, वो बारिश की पहली बूंद , वो बिजली का कडकना , और वो तेरा मुझमे सिमट जाना ......

जब भी ये बारिश की पहली बूंद पड़ती है मेरे जिस्म पे, हमेशा तुम्हारी यादो से तारो ताज़ा हो जाता हूँ , उन लम्हों से जो अव्यक्त है , अनकही है , फिर भी है जानी  पहचानी सी ..हमेशा से मैं डरता रहा हूँ ,  डरता रहा हूँ तुम्हारे बारे में कुछ भी लिखने सुनने को , पर जब भी ये बारिश की बुँदे मुझ पर गिरती हैं . मैं  शायद उछ्रिन्ख्ल हो जाता हूँ और खुद को नहीं रोक पाता . शब्द  खुद ब खुद मूर्त रूप लेने लग जाते हैं .....हर बारिश के साथ तुम्हारी यादें जुडी हुई हैं ..और पता नही इतने साल  गुजर जाने के बाद भी यही मनाता हूँ की मेरी हर बारिश गुजरे, सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे साथ ..

"वाह रे खयाली पुलाव , साला कभी कभी बकलोली हम भी कर ही लेते हैं ..हा हा हा .." 

Saturday, June 15, 2013

अजीब सी दुनिया .

काफी दिनों से कुछ लिखा नहीं और अब ऐसा कुछ लिखने का मन भी नहीं होता। ऐसा लगता है जैसे विचारों का प्रवाह ख़तम  सा हो गया हो ..खैर जो भी हो ..पर आज जो कुछ भी हुआ , ऐसा लगता है लिख लेना चाहिए , ताकि मुझे भी हमेशा याद रहे कि मैं एक ऐसे  इंस्टिट्यूट में काम करता हु जहाँ   बहुत गन्दी राजनीती चलती है . 

आज जितनी निराशा मुझे हुई वो शायद मैं बयां नहीं कर पाउँगा .ऐसा कोई भी  कैसे  कर सकता है या सोच  भी सकता है कि  अगर दो  लोगो को ब्रांच से विदा करना है तो  एक को पार्टी और  शुभकामना सहित  और एक को बस यु ही  बे आबरू . पता नहीं लोगो की इंसानियत  कहा ख़तम हो जाती है .मैं तो सिर्फ ये सोचता हु की अगर ऐसा आपके  साथ हो तो आपको कैसा मह्सुश होगा , तब शायद आप अपने आप को shattered मह्सुश करेंगे . मुझे तो ताज्जुब तब हुआ  पता चला की ये सब शर्मा सर की जानकारी में हुआ . और जब मैं  उनके पास गया सिर्फ ये पूछने की ऐसा कैसे हो रहा है और क्यों हो रहा है तो उनका जो उत्तर  था उसे शायद shameless कहने में मुझे तो कोई shame नहीं होगा . एक झटके में उनकी सारी image ही change हो चुकी थी . वो image जो पिछले 1 साल से मैंने अपने ज़ेहन में बैठा रखी थी . इतने साल बैंकिंग  में गुजरने के बाद और पता नहीं कितने  लोगो से आप मिले  होंगे ..क्या सही है और क्या  गलत है में रत्ती भर का भी फर्क नज़र नहीं आता और ना ही आपने थोड़े से भी सोचने की भी जरुरत नहीं समझी की उस बन्दे के ऊपर क्या गुजर रही होगी ...जब इन्सान का  गला भरी हो तब ही कुछ समझ में आता है .....मैं तो भगवान से बस यही दुआ करूँगा की कही कभी  भी ऐसा आपके  साथ न हो ..

जो भी हुआ , मुझे आत्मपरीक्षण पर ले आया है की मैं जहाँ बैठा हुआ हु और जहाँ नौकरी  कर रहा हु , अन्दर में बहुत ही गन्दी राजनीती है . जो आपको कभी भी बे आबरू और रुसवा कर सकती है और फिर ये भी सोचता हु ऐसे जगह में और ऐसे लोगो के बीच में काम करने का क्या फायदा , पर शायद अपने पास कोई दूसरा उपाय भी तो नहीं है ...जो भी हो हर चीज़ से , चाहे  वो अच्छी हो या बुरी , कुछ न कुछ सिखने को मिलता है ...और आज वाली घटना से , जिसने मेरे मन में अशांति भर  दिया है , कुछ न कुछ तो जरुर ही  सिखा होऊंगा ... 

Thursday, May 2, 2013

बेबश

क्यों कभी कभी खुद को बहुत बेबश सा महशुश करता हूँ, तो फिर सोचने लग जाता हूँ की क्यों मैं इतना कमज़ोर हु ...क्यों है इतनी बेबशी और क्यों हु इतना दबा कुचला सा मजबूर मैं ...क्यों हु ..

Friday, April 26, 2013

Love can reverse anything :)

was watching IPL match , but during AD time just changed the channel,  and came through a movie, named woman on top, firstly I din't like the title, but due to Penelope cruz or whatever may be the reason , I kept watching, and see what i found, found myself swimming in the sea of emotion..sometimes up or sometimes down..No one can separate two beautiful, loving pieces apart, Not even God.and what was the message..true love can reverse anything or everything...even a curse too :)...agree :)

Wednesday, April 10, 2013

हाँ हाँ मैं crazy हूँ .....

किसी को smile देना , किसी को खुश कर जाना ..अगर crazy है ..तो हाँ मैं crazy हूँ .. हाँ हाँ मैं crazy हूँ .....

कितना बढ़िया ad है ...मैं भी कभी कभी अपने इस पकाऊ नौकरी के बीच किसी किसी को खुश कर जाने का वक़्त निकल ही लेता हूँ..कुछ नाम जैसे विमला गोठवाल जी , जो सेवानिवृत शिक्षिका है ...और आज PVV  krishnan जी जो साउथ से है ..थोडा सा उन्हें हंसा दिया ....पर पता नहीं कितने लोग मुझसे नाराज़ होकर जाते होंगे ..पर उसका क्या ...आपको तो बस अच्छी चीजें ही याद रहनी चाहिए ......................

चलो इसी तरह अगर बेवजह खुशियाँ लुटाऊ तो , इन्ही छोटी छोटी खुशियों से ही अपनी जिंदगी खुबसूरत बनती चली जाएगी ....
Lovely...



Monday, April 8, 2013

बेतरतीब सी जिंदगी .

इस बेतरतीब सी जिंदगी में कब कौन सी चीज़  कहाँ खड़ी हो  जाये कुछ पता ही नहीं चलता , कुछ अप्र्तयशित जैसा ..और यही चीज़ जिंदगी को और बेतरतीब कर जाती  है . जो भी हो इसे झेलना  तो पड़ता ही है ..और         तब थोड़ी energy मैं  तुमसे ले लेता हूँ . रुखी सी जिंदगी में जिन्दा होने का अहसास जाग पड़ता है। थोड़ी सी खुश्की मिट जाती है ...थोडा सा तरोताजा हो लेता हूँ मैं हर उस चीज़ से झगड़ पड़ने  को, जो शायद मुझे पीछे खींचती है ..मुझसे मेरे होने का मतलब  पूछती है ......और उतनी ही शिद्दत सी उस सवाल का  देता हूँ ..तेरे  होने का मतलब ही तो मेरा होना है ..और फिर जिंदगी के सारे टेंशन ख़तम ..सब कुछ झेल लूँगा मैं अकेले ही ..सब कुछ ..हाँ फर्क तो सिर्फ यही पड़ेगा कि थोडा और खुष्क हो जाऊ मैं थोडा सा और रुखा ....लेकिन मेरी ये सदाबहार मुस्कराहट तो है ही मेरे  .... 

Tuesday, April 2, 2013

वही सूनापन वही अन्धकार ...


कल से ही एकदम सूना सूना सा महसूस कर रहा हु ..एकदम अकेला सा तनहा सा ..वापस निराशा के गर्त में डूबा हुआ . गहन अन्धकार में विलीन ...सोचा था वह पहुँच जाऊ जहाँ थोडा सकूँ मिलता है ..पर वह भी बेरुखी ..और शायद इसी का भागी हूँ मैं ..
    कभी कभी तो सोच सोच कर परेशां हो जाता हूँ मैं , क्यों ये जिदगी हमारे अनुसार नहीं चलती . थोडा भी , और वही होता रहता है जो हम नहीं चाहते कि हो...अचानक से जुल्फान कि शादी ..सोचता हु तो लगता है कि पागल हो जाऊंगा ..पागल , विक्षिप्त ..कुछ भी नहीं है मेरे पास , सिर्फ निराशा के ..विचलित सा  होता हुआ लगता है ..खुद का अस्तित्व , डगमगाता सा ....ये लड़ाई है दिए की और तूफान की.......फिर लगता है की मैंने सोचना ही छोड़ दिया है ..और सच है मेरे बचने का एकमात्र उपाय...न सोचोगे और न ही टेंशन होगा ...जैसा उपरवाला चाहता है वैसा ही होता है ..
        पर वक़्त का क्या , वो तो बस निकालता चला जाता है , न तो कुछ नया और न की कुछ रचनात्मक ..और ऐसा पशुवत जिंदगी का मोल भी क्या ..कभी तो सिर्फ तुम्हारे होने के के अहसास से ही ऐसा लगता है है की सब कुछ पूरा है पूरा, करीने से सजा हुआ , और फिर तुम्हारे उसी बेरुखी से ऐसा लगता है सब कुछ चलवा , बस एक प्रतिबिम्ब , और कुछ भी नहीं ....
    मेरे हर वक़्त मजबूत होने की कुछ तो वजह होनी चाहिए न और कभी कभी एकदम बेबस सा कमजोर होने की कुछ परिणिति ...सच तो ये भी है की मुझे कोई चीज़ जो शायद तुम्हारी है , बिखरने नहीं देती ...और कभी तो लगता है कि कब का मैं टूटकर बिखर चूका हूँ कई टुकडो में ..और हर टुकड़ा जैसे मेरी फितरत पे हँसता है ..और जब ये टुकड़ा मुझपर हँसता है तो माज़ी में चला जाता हु ...हाँ वही माज़ी ...जहा मेरा सब कुछ बिखर पड़ा है ...कुछ जार जार हो चुके सपने और कुछ दम तोडती महत्वाकंछाये...
   पता नहीं कब तक ऐसा चलता रहेगा सब कुछ ..जहाँ मैं अपनी खुद की एक मासूम मुस्कराहट के लिए तडपता रहूँगा ..और इन खोखली हंसी का आवरण जो अपने अस्तित्व के ऊपर ओढ़ रखा है निकाल फेकुंगा...अब तो हर वक़्त बस नकारात्मक विचारो का आना जाना लगा रहता है ..निराशा की लहरे बस यहाँ वहां  डोलती रहती है ..जिंदगी जैसे ठहराव पे आ पड़ी हो , ठीक किसी पुराने तालाब के गंदले पानी की तरह ....और ठीक मैं इन्तेजार कर रहा हूँ मानसून के उस फुहार का जो सब कुछ नया कर जाये ...इस गंदले पानी को स्वच्छ कर  जाये , एक नया जीवन एक नया उमंग भर जाये ....और शायद उसी बदलाव का इन्तेजार है मुझे ..जहाँ कुछ रचनात्मक हो , जहा आशावाद हो और आगे बढ़ने का और कुछ नया करने का उमंग ......
      पर अभी तो गहन अन्धकार है , मायूसी है , आने वाले चार पांच महीनो का हिसाब किताब ...पता नहीं मैं कैसे अपनी सब जिम्मेदारिया निभा पाउँगा...बस तुम्हारा ही सहारा है ....

Sunday, March 24, 2013

नाटक


तेरे रोज़ रोज़ के नाटक से मैं तंग आ चुका हु, हर १० दिन में एक ही नाटक और ऐसा कई दिनों से कर रहे हो तुम , अगर कोई दिक्कत है तो मुझे बताओ ... तुम्हारी चुप्पी तो मुझे और जायदा परेशां करती है ...और सबसे बड़ी बात तो ये भी है के इन दिनों मैं खुद ही बहुत परेशां सा रहने लगा हूँ ..और फिर तुम्हारा ये नाटक ...कभी कभी इतनी खीज उठती है की की बस बहुत हो गया ....तुम्हे लगता है की इस तरह किसी प्रॉब्लम का हल मिल जाये तो बहुत बढ़िया ..
  मुझे तो ऐसा ही लगता है कि ऐसे ही नाटक करने से तुम्हारे सरे प्रॉब्लम दूर होते है...और अगर ऐसा है तो बहुत ही बढ़िया है ..

Monday, March 18, 2013

first official fight..

First official fight with mom and dad ..on marriage..so what i kept them guessing and confused...see if u can't convince  them , confuse them...it's a well known funda ...and see how m I enjoying their confusion :)

Saturday, February 23, 2013

छोटी छोटी खुशियाँ

छोटी छोटी खुशियाँ मैं चुनता रहता हूँ खुद के लिए ..और जब से mom and dad साथ में हैं , सब कुछ व्यवस्थित सा लगता है ! और जब भी किसी भी चीज़ के लिए चाहे वो छोटी हो या बड़ी , जब इनके  चेहरे पे मुस्कान देखता हूँ तो सुकून की एक परत छा जाती है ...I have seen them suffering since my childhood ,suffering for us, not us rather for 'me', and when i see  a bit of smile on their faces seems life is beautiful and wonderful. I won't be a great person neither a super rich guy but a simile on my dad's face make me more than that... and then only I got to know ..there is something in life ..something precious , something too beautiful...   Today when i was giving the keys of my bike to dad , so that he could learn to drive . the expression on my dad's face was amazing ...my heart filled with pleasure...Yeah I know that he knows driving and having passion for that ...but conditions were never in sink ..and when he drives Pulsar ...I love the expression on my father's face......Love u dad .... 

Friday, February 8, 2013

मेरी गलती ...


मेरी गलती ...

आज दोपहर से मैं बहुत बुरा महसूस कर रहा हूँ , आज मेरी वजह से किसी को डांट सुननी पड़ गई ..गलती मेरी ही थी, और शायद ये मेरा ego था , खोखला ego , खोखला अहम् ..क्यों इतना बुरा बन जाता हु मैं, कभी कभी , आज कलिका गैस वाले के यहाँ gaya हुआ था , सिलिंडर लेन के लिए , और गलती मेरी ही थी की मेरे पास मेरा connection  number bhi nahi था, और मैं चाहता था की वो मुझे मेरे request ka status बताए..पर काउंटर पर बैठे बन्दे ne कहा की वो मेरे से kis basis पर बात karega , bus yahi मेरा अहम् aade aa gaya ..और चूँकि मैं waha के karta dharta दिनेश ji को janata था to sidha chala gaya और unke पास shikayat  कर di..और shikayat भी क्या थोडा बढ़ा चढ़ा कर ,  दिनेश ji bahar aaye और use dantana shuru कर diya . .

tab मुझे मेरी गलती ka ahsah हुआ , मैं khud भी kitane logo से सही से बात कर पता हूँ ,maine khud को us बन्दे की jaah pe rakh कर dekha to मुझे apane gire hone ka ahsah हुआ , क्यों मैं इतना बुरा बन जाता हूँ की , मेरी वजह से किसी ka अपमान हो जाये ..फिर din bhar मैं branch me upset sa रहा , पता nahi क्यों din bhar khud pe ही khundak si aati rahi , ukhada ukhda sa रहा , kuch भी to us बन्दे ne mujh से galat nahi कहा था ...फिर क्यों की maine uski shikayat ...mafi mangata हूँ us बन्दे से, dost मुझे maf कर dena ..और mafi mangata हूँ bhagwan से भी , prabhu mujeh aisi galtiyo से bachao..prabhu maf कर do मुझे , और aisa kahi na हो की मेरी वजह से किसी को apmanit hona pade ....

Wednesday, February 6, 2013

2 अच्छी बात ..

पिछले हफ्ते भर से मैं गर्दन के दर्द से परेशां रहा और कुछ भी खुश होने जैसा नहीं  था , फिर अचानक से फितूर आया के कुछ  किया जाये ..बस  कार चलाना सीखने लगा हूँ , हाँ कल से ही , और अच्छा लगता है ड्राइविंग सीट पर बैठ के , और दूसरी बात तो ये के सुबह का पूरा समय बेकार में जा रहा था , तो थोडा work out की भी सूझी , और समझाता हूँ के दिन भर   बैठे बैठे काम करता हूँ तो अपने आप को फिट रखने के लिए जरुरी भी था , तो GYM भी join कर लिया , हाँ कल से ही ....और इन दोनों के लिए मैं जाकिर भाई को धन्यवाद् देना चाहूँगा ..कभी कभी तो समझ में ही नहीं आता की भगवन ने कुछ लोगो को ही इतनी इनायत क्यों दी है ..

Tuesday, January 15, 2013

नैराश्य....

कभी कभी तो  हारे हुए  खिलाडी की तरह महसुस करने लगता हूँ ..शायद मैं हार मानने वालो में नहीं हूँ , फिर भी कभी कभी तो ऐसा लगता है जैसे कुछ  बचा ही नहीं ..इतनी बेबसी क्यों है मेरी जिंदगी में ..हमेशा  से यही चाहा कि मैं खुद भी खुश रहू और उन्हें भी मुस्कुराता देखू जो मुझसे जुड़े हैं ..पर ये कभी भी हो नहीं पाता , न तो मैं खुश रह पता हूँ और न ही कोई ख़ुशी बाँट पाता हूँ ..शायद मेरी फितरत ही ऐसी है ..पिछले 5 सालों से मैं बड़े जद्दोजहद की साथ अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़  रहा हूँ , प्रकृति से . और हर दिन जब बिस्तर पे सोने को जाता हूँ ,एक कतरा अपने अस्तित्व को खो चुका होता हूँ ..तिल तिल कर ....कहते है न की प्रारब्ध का फल तो भोगना ही है ....पता नहीं मेरे प्रारब्ध में कितना कुछ छुपा हुआ है ...
फिर भी हर हार के बाद पता नहीं क्यों ऐसा लगता है की थोडा मजबूत और हुआ हूँ , प्रकृति के हर थपेड़े को हंसकर आत्मसात करने के लिए। क्यूंकि मुझे लगता है हर लम्हा जो गुजर जाता है , अच्छा या बुरा , मेरे अस्तित्व का हिस्सा बन जाता है ..मेरे होने का सबब ..और फिर मैं कह जाता हूँ , थोड़ी और मुसीबतें/परेशानियाँ दो मुझे ताकि हर वक़्त परख सकू मैं अपने आप को ...पता है आपकी  सारी अच्छाईँ तभी निकल कर आती है जब आप बुरे वक़्त में हो। बस इतनी ही विनती है की प्रभु थोड़ी शक्ति और दो मुझे ताकि सब कुछ झेल जाऊ मैं ..सब कुछ ..कहीं पढ़ा था मैंने की .. हमे इस चीज़ की प्रार्थना नहीं करनी चाहिए की , हमारी मुसीबतें कम कर दो , हमे विनती तो  ये करनी चाहिए की हमे थोडा और शक्ति दे दो की बड़ी मुसीबते भी झेल जाऊ।बस यही कामना है .. 
                   नैराश्य से ओत -प्रोत ..

Saturday, January 5, 2013

कुछ बातें तुम्हारी..



कुछ दिनों पहले की बात है
तुमने कहा ..मैं तो बेवकूफ हूँ , पागल हूँ, मैं अगर तेरा दामन छोड़ दू तो क्या तुम भी मेरा दामन छोड़ दोगे......और मैंने सोचने लगा..कुछ दिनों पहले हुए चीजों से मैं शर्मिंदा होने लगता हूँ ......नहीं रे पागल , तू तो मेरा वजूद है , मेरे जीने की वजह ...अधुरा हु मैं तेरे बिना ....तेरे बिना तो खुद का होना भी खुद का न होना है ... और सोचता हूँ इस प्रश्न को कोई औचित्य ही नहीं है .इस प्रश्न का उत्तर तो तुम्हारे पास होना ही चाहिए..

निष्पृह