आज दिवाली की रात है और जग जगमग है और जब बहरी परिवेश जगमग होता है तो अंदर का अँधेरा खुलकर बाहर आ ही जाता है। इंसान का माज़ी कभी उसका पीछा नहीं छोड़ती और इंसान को भी अपने माज़ी से मोहब्बत करना आना ही चाहिए। और अगर इस अँधेरे में कोई देवता सा हो तो....
कम से कम मेरे लिए तो वो देवता ही था। जिंदगी के उस श्याह अँधेरे को अगर मै भूल भी जाऊ उस देवता को कभी नहीं भुला पाउँगा। भूखे को भोजन देना सबसे बड़ा पुण्य कार्य कहा गया है ,भगवन की सबसे बड़ी भक्ति कही गयी है। और उस वक़्त सबसे बड़ी भक्ति ही कर रहा था वो। बड़ी दीदी भी याद आती है ,बस नतमस्तक हो जाने को मन करता है। क्या क्या लिखू उस वक़्त जो गुजरा था ,कहते हैं सब बुरी बातों को भूल कर उनमे छुपी अच्छी यादो को संजो कर रखना चाहिए। और उस वक़्त की केवल एक ही अच्छी याद है...राजू।
आज इतने साल हो गए ,न कभी उसकी खबर मिली और ना ही उसे मिल पाया। शायद पता नहीं कहाँ हो। पता नहीं जीवन के किस दौर में हो। इस बार घर जाऊंगा तो कोशिश करूँगा कुछ खबर मिले उसकी। भगवान से प्रार्थना करता हूँ उसका जीवन भी उतना ही बड़ा हो जितना बड़ा उसका दिल था। दिल में हमेशा से दुआ उठती है कभी मिलु तो कहूं राजू जीवन के उन दिनों का जो अहसान है कभी मौका देना ,कुछ हल्का कर पाऊं। जनता हूँ जन्मो जन्मो तक तुम्हारा वो अहसान नहीं चूका पाउँगा भाई। तुम कुछ भी न थे ,कुछ भी नहीं ,पर तुमने जो मेरे लिए किया वो तुम्हारे बड़प्पन को और बड़ा कर देता है।तब शायद नवी या दशवी में था मैं ,14 या 15 साल का,और अब जिंदगी का उतना ही हिस्सा और गुजर चूका है,रहा सहा वो भी गुजर जायेगा ,बस इसके गुजर जाने से पहले भगवान से दुआ करूँगा कि तुमसे एक बार तो मिला दे ,कम से कम धन्यवाद तो बोल पाऊं।
कम से कम मेरे लिए तो वो देवता ही था। जिंदगी के उस श्याह अँधेरे को अगर मै भूल भी जाऊ उस देवता को कभी नहीं भुला पाउँगा। भूखे को भोजन देना सबसे बड़ा पुण्य कार्य कहा गया है ,भगवन की सबसे बड़ी भक्ति कही गयी है। और उस वक़्त सबसे बड़ी भक्ति ही कर रहा था वो। बड़ी दीदी भी याद आती है ,बस नतमस्तक हो जाने को मन करता है। क्या क्या लिखू उस वक़्त जो गुजरा था ,कहते हैं सब बुरी बातों को भूल कर उनमे छुपी अच्छी यादो को संजो कर रखना चाहिए। और उस वक़्त की केवल एक ही अच्छी याद है...राजू।
आज इतने साल हो गए ,न कभी उसकी खबर मिली और ना ही उसे मिल पाया। शायद पता नहीं कहाँ हो। पता नहीं जीवन के किस दौर में हो। इस बार घर जाऊंगा तो कोशिश करूँगा कुछ खबर मिले उसकी। भगवान से प्रार्थना करता हूँ उसका जीवन भी उतना ही बड़ा हो जितना बड़ा उसका दिल था। दिल में हमेशा से दुआ उठती है कभी मिलु तो कहूं राजू जीवन के उन दिनों का जो अहसान है कभी मौका देना ,कुछ हल्का कर पाऊं। जनता हूँ जन्मो जन्मो तक तुम्हारा वो अहसान नहीं चूका पाउँगा भाई। तुम कुछ भी न थे ,कुछ भी नहीं ,पर तुमने जो मेरे लिए किया वो तुम्हारे बड़प्पन को और बड़ा कर देता है।तब शायद नवी या दशवी में था मैं ,14 या 15 साल का,और अब जिंदगी का उतना ही हिस्सा और गुजर चूका है,रहा सहा वो भी गुजर जायेगा ,बस इसके गुजर जाने से पहले भगवान से दुआ करूँगा कि तुमसे एक बार तो मिला दे ,कम से कम धन्यवाद तो बोल पाऊं।