Tuesday, December 27, 2011

नकाराकात्मक उर्जा का प्रवाह

पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है की , आजकल तिन चार दिनों से मेरे अन्दर से negative energy  flow हो  raha है ..मैंने एकदम से खुश नहीं हो प् रहा हूँ . पता नहीं क्यों ..हमेशा लोगों के बारे में सोचता हूँ की अच्छा सोचूंगा लेकिन ऐसा नहीं हो प् रहा है , aakhir ऐसा क्यों हो रहा है...
kaha gaya है न की जब आप अच्छे होते हो तो सब आप को अच्छे लगते  हैं और  जब आप ही अच्छे नहीं होते तो कोई भी अच  नहीं लगता ....matlab ऐसा है की मैं बहुत बुरा हो रहा हूँ...
मुझे किसी के बारे में बुरा सोचने का कोई haq नहीं है ...न ही बुरा सोचने का ..सब लोग अच्छे हैं..हर दिन मैं ऐसा सोच कर ही जाता हूँ लेकिन क्यों मैं खुद को ठीक नहीं rakh प् रहा हूँ ..aj तो मेरे माथा भी दुखने लगा...यार समझ में नहीं आता की ऐसा कैसे हो रहा है...
मैं केन्द्रित हो कर कम नहीं कर प् रहा हूँ...

आज भी मैंने किसी को ऐसा बोल दिया जो मुझे नहीं कहना चाहिए ...बाद में मुझे बहुत अफ़सोस हुआ ...बाद मैं मुझे खुद पर बहुत खीज भी हुआ की मैंने ऐसा क्यों कह दिया...अफ़सोस तो ये है की शब्द वापस नहीं लिए जा सकते...भगवन मुझे इन बुरी चीजों से बचाओ...

भगवन please  मुझे समर्थ बनाओ ताकि कोई भी स्थिथि हो मैं हँसता रहा मुस्कराता रहूँ और कम करता रहूँ..कोई ऐसा गुण सूत्र दो की मैं किसी के बारे मैं न तो बुरा सोचूं और न ही किसे को बुरा कहूँ और न तो किसी की बुरे सुनु...सच है यहाँ सभी लोग अच्छे हैं...और please मुझे भी अच्छा बनाओ....
मुझे  इतनी ताकत दो की अपनी सकारात्मक उर्जा को किसी भी नकारात्मक उर्जा से प्रभावित नहीं होते दूँ..अपने प्रभाव को धूमिल न होने दूँ...खुश रहूँ....मस्त रहूँ...किसी को हर्ट न करूँ...

Friday, December 23, 2011

प्रतिबद्धता

हाँ अब प्रतिबद्ध हूँ ...भटकाव थोडा कम होता है ...प्रतिबद्धता बहुत बड़ी चीज़ hoti है चाहे वो जैसे भी ही...
किसी के लिए हो या किसी लक्ष्य के लिए ...अच्छा होता है ...किसी चीज़ से जुड़  जाना aur  phir प्रतिबद्ध हो जाना .......

Thursday, December 22, 2011

सजनी मान जाओ ना , दिल आज रूठा है !

Sajni Man jao na!!


सजनी मान जाओ ना , दिल आज रूठा है  ! हाँ कभी कभी बहुत अच्छे गाने मिल जाते हैं , इस गाने को मैंने बहुत पहले भी सुना था पर , पता नहीं आज कौन सी कसक है की २ घंटे से इसे सुन रहा  हूँ और  बहुत कुछ बुनने की कोशिश कर रहा हूँ, सच मैं JAL Band  को बुत धन्यवाद् देता हूँ , बहुत ही खुबसूरत विडियो और बहुत ही अच्छे बोल.....
सोचता हूँ , कितनी खुबसूरत चीज़ उपरवाले ने बने  जिसे लोग मोहब्बत  कहते हैं, पर बहुतों के लिए तो सजा ही होता है, ५ फीट और ६ इंच के हाड़ मांस से बने बुत को तो ये एक नेमत से काम तो नहीं है , पर सच है यार सच्ची मोहब्बत अब कहाँ मिलती है , एक सीरियल आ रहा है  "कुछ तो लोग कहेंगे" इसमें भी कुछ ऐसा ही है , "लोलिता " इस उपन्यास मैं भी कुछ ऐसा ही था...कुछ तो है ये जरुर , दिल मेरा कितना मजबूर , जान के भी तू जाने ना सैयां सैया ,नैनो की भाषा समझे ना  ...हाँ पर समझने और समझाने वाला भी तो होना चाहिए....वक़्त दो वक़्त कहीं ना कहीं कोई ना कोई तो समझाने वाला तो होना चहिये , हाँ भाई नहीं तो जीने का मतलब ही क्या रह जायेगा....
खली वक़्त का सही सदुपयोग हो रहा है मैं यहाँ तनहा हूँ तो अकेलेपन मैं बहुत बेकार की चीजें माथा ख़राब करती है ...वक़्त तो बहुत ही ख़राब होता है , पर क्या करूँ , ये अकेलापन भी बहुत बुरी चीज़ है और तब जब कोई रास्ता ही नहीं दिखाई दे रहा है, मंजिल तो दूर की बात है...और जब भी मैं मंजिल की बात करता हूँ , घबरा जाता हूँ, घबरा ..क्या सोचा था और क्या हो रहा है ...यार यही तो नियति है ....सब कुछ नियत है ...Fixed  है ....२०-२० मैच की  तरह ...सब कुछ अगर fixed  है तो ये  जीने की इतनी जद्दोजहद क्यों है क्यों है अस्तित्व  की लड़ाई .....हाँ  सच है अस्तित्व की ही तो लड़ाई है ..अपने वजूद को बचाए रखने की...पता नहीं कब तक संभल कर रख पाऊंगा  अपने वजूद ko...बस संघर्ष है वजूद का अस्तित्व का ...एक पहचान पाने की ललक है ....तो बहुत ही तीव्र है बहुत ही तीव्र ..जिसमे से एक अपूर्व रोशनी निकलती रहती है और आँखों मैं सपनो को उजाले देती रहती है ..हम जिसे अपने खवाबों से पालते हैं..और पालना भी चाहिए...

Sunday, December 18, 2011

जिंदगी का क्या

क्या करूँ भाई कुछ समझ मैं नहीं आता , कहाँ जाऊं क्या करूँ कैसे करूँ, एक अजीब सी बैचैनी से मैं परेसान हुआ जाता हूँ ,यार क्या मतलब है इस लाइफ का कहाँ ढूँढू इसका मतलब, या नहीं ढूँढू, करूँ तो मैं क्या करूँ, यार कुछ तो करना होगा ,मतलब तो निकलना ही पड़ेगा भाई नहीं तो बेमतलब हो जाएगी पूरी जिंदगी, कहाँ है मंजिल, कहाँ है रास्ता , कुछ तो पता चले , अरे हाँ कुछ तो पता चले , निम्बहेरा की जिंदगी , कैसी है जिंदगी कैसा है सफ़र , क्या पैसा कमाना और पेट पलना यही जिंदगी होती है
क्या ऐसा ही सब कुछ चलता रहेगा या कुछ बदलाव भी होंगे , जब मैं अकेला होता हूँ तो बहुत सरे प्रश्नों का जवाब ढूंढता हूँ या बस टाइम पास करता हूँ कुछ पता ही नहीं चल पता, पता नहीं कब पता चलेगा! पता नहीं कब तक मैं वो सारी चीजें करूँगा जो बचपन से मेरे सपने रहे हैं, अभी तो ऐसा लगता है की कुछ भी नहीं हो पायेगा , कुछ भी नहीं, ..अब भगवन ही मुझे रास्ता दिखा सकते हैं ...तो यार दिखाओ न ...नहीं तो मैं ऐसा ही V चैनल ही देखता रह जाऊंगा ! यार मुझे कुछ और भी देखना है और कुछ करना भी है ......पर पता नहीं का तक!

Sunday, December 11, 2011

फिर वही अकेलापन

माँ कल चली गई वापस घर को और फिर मैं अकेला और तनहा हो गया , जिसके पास तो कुछ करने को है और ही कुछ बाँटने को , और अकेला हो जाट हूँ तभी सोच पता हूँ की जिदगी क्या हो गयी है , दिन भर आज सोया रहा , सिर्फ सोया ! बहुत परेसान सा हो जाता हूँ, क्या ऐसे ही गुजर जाता है लम्हा लम्हा ,टीवी इन्टरनेट बस यही दो साथी है , पता नहीं क्या होगा मेरे सपनो का जो बचपन की आखों ने देखे थे , पागलों के लिए एक अस्पताल और एक ओल्ड एज होम , यहाँ अब कुछ पढने की भी इच्छा नहीं होती , एक stagnation के दौर से मैं गुजर रहा हूँ , और शायद यहो दौर जिंदगी को भागों में बंटती हैं , और महसूस हो रहा है मैं दोराहा हो रहा हूँ , सच मैं दोराहा , लगत है अब कुछ नहीं हो पायेगा , कुछ भी नहीं , तो अपनो के लिए और ही दूसरों के लिए, सच है हाथ की लकीरें भी कभी कम आती हैं

Wednesday, December 7, 2011

पता नहीं ऐसा कैसे हो गया

जिंदगी में गलती तो हो ही जाती है , यार कितना भी अच्छा सोचो कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ तो हो ही जाता है, जब वो वक़्त गुजर रहा होता है तब कुछ भी पता नहीं चलता, पर जब गुजर जाता है तो पता चलता है की क्या सही था और क्या गलत था, चलो कोई न , इस बार तो बच गया, बंगलोरे का सफ़र भी ठीक थक था, सम्मिउल्ला से मिला , हिमांशु से मिला , बंगलोरे में संदीप से मिला, ओर अच्छा ही गुजर गया पर जब भी में कहीं से वापस आता हूँ हमेशा अपन को एक उधेड़बुन में पाता हूँ,, में यहाँ क्यों, क्या मेरी जिंदगी की यही दशा हैं, मेरी मंजिल कहीं और है बस यूँ ही जिंदगी जीते जी गुजर देनी है, यार न या तो होना चाहिए, में यहाँ अपना वक़्त नहीं गुजरना चाहता और जैसा लगता ही नहीं है ,पाता नहीं कब तक अपना चल पाता
की क्या है तो क्या होना चाहिए और क्या हो रहा है, पर यार ज्जिंदगी ऐसी ही चलती है तो गुजर जाती है , गुजर जाएगी!

Monday, November 28, 2011

रेगिस्तान की रेत

कभी कभी मैं सोचता हूँ कि मैं कहाँ आ गया , और कहाँ जा रहा हूँ , न तो कोई मंजिल है और न ही कोई रास्ता, बस जीना है तो जिए जारहाहूँ, क्या यही होताहै जिंदगी का मतलब , सोचता हूँ नहीं ऐसा तो कभी नहीं,फिर मैं क्यों हूँ , क्यों हूँ मैं यहाँ , और क्या कर रहा हूँ, बैंक कि जिंदगी एकदम से नीरस होता जा रहा है, रेगिस्तान में पड़ी रेत कि तरह अपनी जिंदगी भी खुरदुरी होती जा रही है, पता नहीं मैं कहाँ पहुचुन्गा, शायद कहीं भी नहीं......पढाई भी अब नहीं कर पता और व्यावासिक जिंदगी मैं कहीं भी सुकून नहीं है , थोड़ी बहुत रुखाई मेरे व्यवहार में भी झलकना शुरू हो गया है, मैं खुद बदलता जा रहा हूँ शनैः शनैः , जो कि मुझे भी पता नहीं चल प् रहा है , हर किसी से झगड़ पड़ता हूँ , मन में थोड़ी सी भी शांति नहीं है , लगता है मैं धीरे धीरे घमंडी भी होता जा रहाहूँ, ऐसा परिवर्तन मुझे लगता है मेरे कार्यक्षेत्र की वजह से हो रहा है , हर सेकंड एक ऐसा बंद आता है जिसे अपनी परेशानी होती है और हर किसी के साथ मैं एक सा नहीं हो सकता , निम्बहेरा में ऐसा ये भी लगता है की यहाँ जायदा झगडे वाले लोग ही रहते हैं , अब मैं घर में भी ऐसे ही बात करने लगा हूँ जैसे मैं बहुत खिझा हुआ हूँ , हाँ बहुत खिझा हुआ , जबकि मुझे ऐसा नहीं होना चाहिए , मैं स्वार्थी भी होता जा रहा हूँ , पल पल जबकि पहले मैं ऐसा नहीं हुआ करता था, इस बदलाव को मैं रोकना चाहता हूँ , प्रभु प्लस मेरी मदद करो , मैंने हमेशा से ही विनती की है , की मैं कहीं पे भी रहूँ , मेरे पांव हमेशा जमीं पे ही होने चाहिए , और कभी भी घमंड मुझे छु न पाए , पर मुझे लगता है की मेरी विनती में कहीं चुक हो रही है , कुछ छुट ता सा लगता है ......

Saturday, November 19, 2011

कुछ बातें कुछ यादें

हाँ कुछ तो जरुर छुटता हुआ लगता है , कुछ पुरानी बहुत ही सुहानी यादें ताज़ा हो जाती हैं , सुन रहा हूँ गाना , लग जा गले से फिर हसीं रात हो न हो, फिर मुलाकात हो न हो, सचमुच हम मुलाकात को तरस से जाते हैं, सचमुच यादों से ही जिंदगी बनती है , कुछ खट्टी कुछ मीठी, और हम ऐसे ही जिंदगी के पन्नो को भरते चले जाते हैं , कुछ अफ़सोस भी होता है, किसी के छुटने को, डर भी होता है किसी के खोने का, लगता है सब शुन्य है और कुछ भी नहीं, जो ख जाते हैं उनसे तो हम कभी मिल भी नहीं पते और जिनसे मिलना चाहते हैं प्रकृति मिलने भी नहीं देती...

Friday, October 21, 2011

शहर में हूँ मैं तेरे , आके जरा मिल तो ले

बहुत प्यारे शब्दों का इस्तेमाल किया है , सुनता हूँ इन गानों को तो कुछ अपनेपन की अनुभूति होती है, पर तो यहाँ अपनापन है और ही अपना शहर , लगत है कितना पीछे छुट गया है अपना शहर और अपने लोग, सच कहूँ तो जीने का मकसद भी छूटता नज़र आता है , एक छोटी सी जिंदगी मैं अपने लोगों से ईतना दूर होकर जीना भी मुश्किल लगता है , आत्मीयता की एक बूंद के लिय भी यहाँ जिंदगी तरस सी जाती है , और हम इसी बूंद की तलाश में कई और मायने भी ढूनन्धने लग जाते हैं, और मैं भी इसका अपवाद नहीं हो सकता , और मैं भी इसी को तलाश करने लगता हूँ, पर अब लगता है की थोड़ी सी प्रतिबद्धत तो ही गयी है , साल पहले जो भटकाव होता था अब नहीं होता, हाँ सच है वो भटकाव नहीं होता, नहीं खुबसूरत चेहेरों पे भी नहीं...
खैर छोड़ो कुछ अपने शहर की बातें तो करूँ, आपना शहर अब अपना नहीं रहा , नाही अब ये शहर मुझे अपना मनाता है , बस एक अजनबी सा बर्ताव करता है, कहता है तुम्हे कल सुबह ही तो जाना है और मैं अकड़
कर रह जाता हूँ , काश मैं तुम्हे हक से अब भी आपना ही शहर कह पता , रांची भी शायद कुछ अपनी जैसी ही थी ,पर यहाँ राजस्थान मैं भटकते भटकते अपने अस्तित्व की पहचान भी खो चूका हूँ,
और क्या क्या लिखूं , कुछ तो लिखना ही हैं , हमेश सी ही गुरुवार अच्छा नहीं हो रहा हैं, कल तत्काल का टिकेट भी नहीं हुआ, और टिकेट, देखता हूँ की एक भी कन्फर्म होता हैं या नहीं, नहीं हो तो बहुत मुस्किल होगी जाने में, वो यात्रा भी याद जय हैं जो , इसी समय में , और इसी ट्रेन में हुई थी, हा हा हा बड़ा मजेदार वाक्य हुआ था , लगता ही नहीं की साल पुरे गुजर गए, यार ऐसे देखते ही देखते पूरी जिंदगी गुजर जाएगी..

Saturday, October 15, 2011

लैपटॉप

आखिर मैंने लैपटॉप ले ही लिया...२००९ से प्लान बना रहा था कभी ये इसु तो कभी वो इसु, चलता ही जा रहा था और अंत में मुझे लैपटॉप नसीब हो ही गया, बैंक की दुआ से..औत आज इन्टरनेट का कनेक्शन भी ले लिया, देखता हूँ अब मैं इसका कितना सार्थक उपयोग कर पता हूँ.......कब से एक बहाना धुंध रहा थे की मेरे पास लैपटॉप नहीं है अब वो बहाना भी ख़तम...
एकचअ है शायद अब कुछ रचनातमक कर paun

Sunday, October 2, 2011

Nimbahera

Nimbahera......
Yahan jab se main aaya hun..aisa lagata hai ki kuch bhi mere sath accha nahi ho raha hai...
kal parson ka hi problem..aur yahan rahane ka problem...2-3 days se khane ka problem.....then i feel being spritual..yar sac hai aisa hi hota hai life main , aur hum kuch bhi nahi kar sakte , bus mukdarshak hi bane rahte hain.....

It's life..and we must enjoy each nad every Moment of life....

Friday, June 17, 2011

अंतिम ट्रेनिंग बीकानेर में

हाँ यहाँ अब अंतिम ट्रेनिंग है...अब पता नहीं कब इन सारे दोस्तों से मिलना हो ! जिंदगी का एक अच्छा मौका मैंने गँवा दिया सिर्फ और सिर्फ अपनी बेवकूफी से , अगर थोडा सा भी गंभीर होता तो मैं आज मुस्कुरा रहा होता...चलो ओर भगवन की मर्जी से होता है...और सबसे बड़ी बात तो ये की मैं अपने अन्दर आये परिवर्तन को महसूस कर रहा हूँ...बाकि सारे ट्रेनिंग में मैंने अपने आपको सबसे अलग थलग रखा और हमेशा अपने कोम्फोर्ट ज़ोन में रहा...लेकिन इस बार मैं बहुत सारे लोगो से बात की और नए दोस्त बनाये और इस बार खुद पे केन्द्रित न रह कर मैं लोगों पे केन्द्रित रहा...
हैदराबाद में हुए बेहविऔर साइंस के क्लास में कुछ जो भी सिखा था अब उसकी परिपालना कर रहा हूँ और अब आचा भी फील कर रहा हूँ...जिंदगी को देखने का नजरिया बदल रहा है और यही सबसे सुखद परिवर्तन है...और मैं इसका आनंद उठा रहा हूँ....इस बार ऐसे लोगो से भी घुला और मिला जिनसे मैं दूर रहने की कोशिश करता था...सच है की दुनिया में ओर लोग अच्छे होते हैं ,,,अगर आप अच्छे हो तो....जिंदगी जीने का नया नजरिया मुबारक....

Saturday, May 28, 2011

अच्छा महसूस नहीं हो रहा

यार पता नहीं ऐसा क्यों होता है की जिंदगी के सफ़र में हम नए लोगों से मिलते हैं और एक अनकहा सम्बन्ध जोड़ लेते हैं...यहाँ २७ लोगों से मिला और मिला क्या एक पूरी फमिलीय ही बना ली , सिर्फ २८ दिनों में ....ऐसा क्यों होता हैं....क्यों भावनाएं , रिश्ते समबन्ध और जज्बात परेसान करते हैं ...... क्यों हम जिंदगी के सफ़र में इसे ऐसे ले लेता हैं , मैं समझता हूँ की ऐसी फीलिंग , बहुत बार आती है और हम वापस अपने नोर्मल लाइफ में चले जाते हैं....बुत कुछ दिनों का जो transition period hota hain, bahut dukh dai hota है, ये अहसास क्यों होता है हम समझ ही नहीं पते हैं ...

Friday, May 27, 2011

I wept after a long time for myself!!!

पता नहीं कितने दिनों के बाद मैं खुद के लिए रोया.....ये self assessment ke classes ने
तो माथा ही ख़राब कर दिया है ! पर सच है मैं सोच रहा था और समझ रहा था , मैं पहले ऐसा नहीं हुआ करता था , I remember my school day...I used to be a good and eneregetic guy and was lyk a motivator... par dhire dhire jis tarah mera patan पतन हुआ मैं खुद ही अचंभित हो रहा हूँ....बीच में बहुत सारी परेसानिया आईं और मैं धीरे धीरे उनमे खुद को ढालता चला गया फिर कभी खुद पे ध्यान ही नहीं दिया, मैं पढ़ाकू बनता चलता गया और खुद को कमजोर करता चला गया , जीतनी नकारात्मक प्रवृतिया थी आती चली गयीं .....अब मैं ध्यान देता हूँ तो पता हूँ उन परेसनियों के दिनों में मेरी सारी सकारात्मक ऊर्जा थी ओर चली गई , मेरे मूल्य खोते चले गए और मुझे कुछ पता ही नहीं चला ....मैं स्व-केन्द्रित होता चला गया, अकेला पन का चोला पता नहीं कब मैंने ढँक लिया, भीड़ से और लोगो से एक दुरी बनता चला गया...ऐसा तो नहीं था मैं , हर वक़्त नकारात्मक सोचना , अपने आप को कम कर आंकना और हमेशा से एक दर....एक भय ....
भयाक्रांत मैं कभी अपने आप को समझ ही नहीं पाया...ठुकराए जाने का डर ,हार जाने का डर ,पता नहीं कितने डर मैंने खुद से पल लिए ...मेरे सरे निर्णय इसी डर से आक्रांत होने लगे और मैं अपनी पहचान खोने लगा...और फिर शुरू हुआ अपने आप को सामने लेन का खेल और फिर ओर कुछ नकरातमक , विस्वास की कमी होने लगी और अभी तक मैं इसी भय मैं फंसा हुआ हूँ...हमेशा से डरपोक बना रहता हूँ , की पता नहीं की कल क्या हो॥ हर वक़्त सबके बारे में नकारात्मक सोचता हूँ , नकारात्मक बोलता हूँ और isi attention grabbing ke chakkar me ....dost kam aur dushman jayada banne lage और आब महसूस करता हूँ की कहाँ गलती हुई.....
आज के क्लास में पता चला की यहाँ गलती हुई और मैं अपने बचपन में चला गया....और फुट फुट कर रोया.....कभी कभी लगता है आंसू में आप ओर कुछ भुला देते हैं ......
थैंक्स उ स्टेट बैंक टीम की उन्होंने ये महसूस कराया की तुम वो नहीं हो जो तुम सोचते हो....कुछ और ही हो ...इतिहास को पीछे छोड़ कर तुम्हे आगे बढ़ाना है और अपनी हर चीज़ पूरी करनी है....कुछ चीजों का निर्णय लिया है ...और अआब उनपे ही आगे बढ़ना हैं ...फिर से वही अपने आप को आगे लाना है और हमेशा आशावादी बनना है !!!

Wednesday, May 25, 2011

Best classes,i have ever had!

Behaviour analysis classes are the best one i have ever had...these are the behavioural science classes .......And It's in SBI...It gave me a deep introspection and gave me insight that how I behave in a particular way and how I behave.........I feel the pain and the sufferring.....I feel being alone ..... feel being desperate.....I realised my behaviour was akward and some time it was questionable...

I started to feel that...why people loved me and why some people used to avoid me.....and the better perspective i got is...How people think about you and why.......Literally I feel that this is going to change my life and my insight as well...I remember one to one talk when Urfi Maaaam told me .....u don't expect anything from any one but u feel that how people think of u and that's why u are supressing urself ........She said that u wanted to be recognised and to be praised but u also think about people around you ......You are always afraid of something .......
I came to know...this particular behaviour, my attitude toward accepting someone's acjeivement....being alone and also not to be in the group....
I thank all faculty here...Specially Satish Rao Sir, whom i came to know never use negative words and always try to articulate positive words insted, and think how the life will be changing aroung u....and always keep smiling and appreciating someone.....then Mohan sir, then urfi Mam and Sir I S Rao.....lyk this is amazing .....amazing behaviour analysis....and i feel the change itself....today it was Cultural Programme and I was participating actively....I don't know after how many years I was smiling whole heartly....without and hidden agenda....and m taking initiative....that's amazing....Thanks God....At least i started to have a bit....

Monday, May 9, 2011

Hydrabad

Yesterday I visited Ramoji Rao Film City and day before yesterday Golkunda Fort...Really amazed after visiting Golkund fort, histore of great dynasty of Kaktiyas and Then Bahamani's Came into my mind......KutubShahi dynasty ...that built a great city..Hydrabad...
then Yesterday visited ramoji Rao Film city....heard a lot about the film city , and got a chance to visit it.......The beauti was mesmerizing...well Planned and well managed and full entertaining.....And when u are in group , autometically u enjoy......Experience was really good and I don't mind above k1......My place here in SBI staff college is also very good and Masti kar raha hun......

Sunday, May 1, 2011

बहुत दिनों के बाद मुझे मौका मिला की मैं अपने ब्लॉग में हिंदी में कुछ पोस्ट करूँ। आज हैदराबाद में हूँ, बहुत सरे लोगों से मिला..और बहुत सरे लोगो से मिलना बाकि हैं , यहाँ का माहौल अच्छा है मेरेरूम मेट यतीन्द्र सहेल भी ठीक थान जन पड़ते हैं , उनकी पत्नी यहाँ आने वाली है सो मेरे साथ जयादा वत नहीं दे पाएंगे , अच्छा है यार कुछ तो फ्री मिलेगा जिगर हिंगू भी है, और यहाँ का आस पास का वातावरण भी अच्छा लग रहा है, बस एक कमी है तो देवेश की, पता नहीं क्यों पटना चला गया...वो रहता तो और भी अच्छा लगता, गौरव की सहदी भी सेट हो गयी है और मेरा जाना संभव नहीं जन पड़ता....

Saturday, March 26, 2011

Bad luck baby!

Bad luck baby!bad luck for first time!upgradation doesn't work every time, so next time always try to get a bearth in AC coaches only!

Tuesday, March 22, 2011

Bahut bura din!

Han yar it was a very bad day for me!kya kahun kabhi kabhi feel hota hai yahi jindagi hai,aur kabhi kabhi to ye bhi ki, jinda rahne ke liye teri kasam ek mulakat jaruri hai sanam!jaruri hai sanam!

Sunday, March 6, 2011

Main hamesh hi har jata hun

I know tere pass waqt nahi hota hai, meri kisi bhi bat ke liye tere pass waqt nahi hota
hai, aur tab main dhundha hun...kisi ko bhi , bahut hi naraz bhi hota hun tumse, but kya kahun tumahara ek sms mujhe hara deta hai, .........Main janata hun ki paresan tum bhi ho, and i am to blame for ki maine kabhi bhi kisi paresani me tumahara sath nahi diya hai .....Lekin iska matalab ye to nahi hai ki tum retaliate karo....
when u truely love someone. their mistakes never change your feelings. bcoz its d mind that gets angry ,but d heart still love them....

Sach hai yar I feel it, you can't be angry for a long time to a person whom you truely love..............................................................

निष्पृह