एक नई शुरुआत, बस अब हमेशा मम्मी पापा के साथ रहूँगा ..कल से पापा और मम्मी दोनों मेरे साथ निम्बहेरा में रहेंगे ...अब थोड़ी उनकी सेवा कर पाउँगा ...
Saturday, December 29, 2012
Monday, November 5, 2012
अच्छा -बुरा
तुम बुरे होने का नाटक कर सकते, पर बुरे नहीं हो सकते ...
तुम अच्छे होने का नाटक कर सकते हो , पर अच्छे हो नहीं सकते ...
अच्छा और बुरा , तुम्हारे खुद के होने पे होता है , नाटक पर कभी नहीं ...
Saturday, October 20, 2012
बड़ी वाली बकलोली...
खाली बैठा हू और काफी दिनों से कुछ लिखा भी नहीं , अपने विचारो को शब्दों का मूर्त रूप देने का ये बढ़िया वक़्त होता है जब आप खाली बैठे हो ...तो सोचा क्यूँ न कुछ बकलोली किया जाये , ऐसे भी आजकल मैंने खुद को खुद में ढाल लिया है , न कहीं आता हू न ही कहीं जाता हू बस कमरे को ही मैंने अपनी जिंदगी बना लिया है , और ऐसे में लिखना बड़ा सुकून देता है और सब से बड़ी बात तो ये की वक़्त बड़े आराम से गुजर जाता है ...
कुछ पत्रिकाए पढ़ रहा हूँ , आहा जिंदगी , हाँ इसके पिछले अंक कृष्ण और इश्क पे थे और इस महीने ये दर्शन पर केन्द्रित है , महान दार्शनिक सुकरात पर बहुत कुछ लिखा है . अच्छा लगता है ये जानकर के हज़ार साल पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने सत्य पर खुद को स्वाहा कर दिया...कहा है न पाने से बड़ी चीज़ तो खोना होता है ...जो खोया सो पाया ....
पर साला अब खोना अब कहाँ होता है बस पाने की दौड़ बाकी है और बस इसी पाने की दौड़ में पूरी दुनिया भागी जा रही है , खोने का सिद्धांत ही निरर्थक हो गया है..बस पाना है चाहे जैसे भी हो.. पैसे , प्यार, हर सांसारिक सुख और तो और अब भगवान को भी लोग जैसे तैसे पाना चाहते है ..खोना कहाँ है ..और यहीं पर पता हू थोडा आत्मिक सुकून , भक्ति , कुछ दिन पहले जगतगुरु कृपालु जी महाराज की शिष्य के प्रवचन पे गया था ...लगा अब भी थोडा खोने का भाव बाकी है , खुद को खोने का ..निःस्वार्थ ,अपने आप को कृष्ण पे लगा देना , बिने कुछ पाने की कामना किये ..और यह बड़ा परम भाव है ..रामानुज का विशिष्टाद्वैत भगवन और भक्त को ऐसे ही देखते हैं जैसे सूर्य और सूर्य से प्रदीप्त प्रकाश रश्मियाँ .पर हम जैसे लोगो को कभी कभी तो चार्वाक का दर्शन ही जीवन दर्शन सा लगता है , यावत जीवेत , सुखं जीवेत ....पापी हो या पुण्यात्मा , सूर्य कभी भेदभाव नहीं करता , सामान भाव से प्रकाश देता है और जल भी किसी पापी को उतना ही मिटा लगता है जितना किसी पुण्यात्मा को ..मतलब कर्मा का कोई मतलब नहीं होता और प्रारब्ध सिर्फ ब्राह्मणों के दिमाग की उपज..जीवन एक ही बार मिलता है और फिर सब कुछ यही पर ख़तम ..तो फिर वर्तमान में जियो ..पुनर्जन्म जैसी कोई चीज़ ही नहीं होती और न ही पाप पुण्य जैसे कोई चीज़ ..जो अच्छा लगे खुद को वही करो , पाप पुण्य से ऊपर उठाकर , समाज और संस्कार से ऊपर उठकर .....साला ये तो भ्रस्त कर देगा ..हाँ पर यही तो चीज़ है जो इन्सान के अन्दर सदियों से बैठी दबी कुचली इच्छाओं को बाहर की तरफ लती हैं ..और फिर ओशो तो यही कहते हैं , न तो कुछ अच्छा होता है और न ही बुरा . ये सब कुछ इन्सान का खुद का गढ़ा बुना है। जो तुम्हे अचछा लगे बस वही करो .यार ये दर्शन भी पता नहीं कहाँ खिंच लता है ..अगले पच्चीस सालो तक बहुत बकलोली करनी पड़ेगी तभी दर्शन पर कुछ लिख पाउँगा ...
पर हाँ इश्किया होने के लिए इतने लम्बे इन्तेजार की जरुरत नहीं..क्योंकि यहाँ कोई भावना सदियों से दबी कुचली हुई नहीं है और न ही उसे ऐसे रहने की जरुरत पड़ी , जब भी और जहा भी इसे लगा , खुलकर बाहर आ गयी ..अब देख लो कृष्ण और राधा ...और सदियों के बाद मीरा , और मैं खुशकिस्मत के मीरा की नगरी में बैठा हूँ , जहाँ के जर्रे जर्रे में मीरा का असीम प्रेम है , कृष्ण के लिए , मीरा मंदिर का चक्कर भी कभी कभार लगा आया करता हूँ , चित्तौड़ में और एक साधिका है जो वही मीरा के सबद सुनाती है , और मैं चुपचाप कोने में बैठकर सुना करता हूँ...मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई॥...और "मीरा" के प्रभु गिरधर नागर, हरस हरस जश गायो।.....बस बस ..यही तो सुकून है , खुद का खो जाना ..और क्या ..फिर मोबाईल की घंटी बजती है और मैं वापस इसी दुनिया में आ जाता हूँ , वही बैंक और वही वीभत्स जालिम दुनिया , वही मैं और तुम ...
पर सच बताऊँ तुम्हारा होना भी बहुत मायने रखता है , और मुझे तो कभी किसी दूसरी दुनिया में जाने की जरुरत ही नहीं पड़ती , जब तुम पास होते हो ..हाँ मेरी दूसरी , तीसरी और चौथी दुनिया भी तुम्ही हो ..हर गम , दुःख अवसाद , सब कुछ तुम्हारे पास आते ही छू मंतर , ये जादू नहीं तो और क्या है ..सब कुछ अच्छा सा लगने लगता है सब कुछ अच्छा सा होने लगता है ...रंग बिरंगी ये दुनिया और भी हसीं हो जाती है .हाँ जब तुम पास होते हो ..और कभी कभी तो ऐसे सिर्फ तुम्हारे पास होने के अहसास से ही होना शुरु हो जाता है..ये भी बड़ी नेमत है खुद का इशिकिया होना और इसके लिए बड़ा अनुभव भी जरुरी नहीं ..बस अन्दर से एक आवाज आनी चाहिए इश्किया इश्किया ....कुछ दिनों पहले एक दोस्त से बाते कर रहा था , और वो अपने एक दोस्त की बाते मुझे सुनाये जा रहा था , मैंने कहा यार वो तेरे लिए इतना कुछ करता है , सब सहता है सब सुनता है फिर शायद हदों तक तुमसे मुहब्बत भी , फिर तुम क्यों नहीं सोचते उसके बारे में ...और पता है उसका उत्तर क्या था ..यार उसके लिए ये आवाज ..इश्किया इश्किया वाली अन्दर से कभी आती नहीं ...हा हा हा ..सच है यार ये आवाज तो अन्दर से आनी चाहिए ..ड्रम ढोल और नगाड़े भी बजने चाहिए , पर नहीं बजती तो इसका कुछ किया भी नहीं जा सकता ....माहौल भी तो बदलना चाहिए ...ये नीरस जगह कब एस्किमो वाला टुन्ड्रा प्रदेश में बदल जाये या फिर अफ्रीका का वाइल्ड लाइफ सफारी ...पता नहीं न ..पर ये तो होना चाहिए न ..पर भावनायो में सच्चाई होनी चाहिए , कामना नहीं ..और यही कामना तो हर जगह इन्सान को गिरा देती है , जहाँ कामना आया , वह से इश्किया गायब, भाग जाता है ये इश्किया भी......इतने सालों से तुम्हे देख रहा हूँ ....एक चीज़ जो अब तक नहीं बदली है वो है ...No Demand , No Expectation and No Complaint ..जहाँ भी रहा मैं और जो कुछ भी सही गलत किया मैंने ....तुम्हारी ये No Demand , No Expectation and No Complaint वाली चीज़ हर वक़्त मुझे हरा देती है ...कभी कोई शिकवा नहीं, कोई गिला या शिकायत नै , सब कुछ स्वीकार होता है तुम्हे ...और यही से तो रूहानी शुरुआत होती है इश्किया इश्किया वाली...कुछ रूहानी और कुछ रूमानी सी..
कहा न की आज मैं बड़ी वाली बकलोली करने वाला हू ..हा हा हा
Monday, October 8, 2012
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिस्ती ...अजमेर
पीर साब के दरबार में ये मेरी दूसरी हाजरी थी ...पिछले साल जनवरी में मैं गया था , उस वक़्त भी जय मेरे साथ था और इस बार की भी दस्तक उसी के साथ ...कोई प्लान नहीं बस जाना है तो जाना है , शम्भू भी आया था जयपुर और मैंने कहा भी की अजमेर आ जाये ..ख्वाजा के दर पर ..पर एन मौके पर उसकी तबियत ख़राब हो गयी ..और आज जब पता चल रहा है की उसकी तबियत बहुत ही ख़राब हो गयी है ..
सच कहूँ तो दरगाह के अन्दर बहुत शांति महसूस होती है , बहार के कोलाहल से अनादर का वातावरण एकदम से शांत ..मैं बैठ जाता हु चुपचाप , एकदम शांत , बाहर और अन्दर भी...बस कव्वाली की आवाज आ रही है ..पुरसुकून है ...सूफियो में बड़ी ताकत होती है ..और ये ताकत महसूस कर रहा होता हु ..सजदे में खुद ब खुद सर झुक जाता है और दुआ में हाथ खुद ब खुद उठ जाते हैं..यहाँ हिन्दू होना या मुसलमान होना कोई भी मायने नहीं रखता ...मायने रखता है तो सिर्फ खुद का खुद होना ...सूफी संतो में और भक्ति संप्रदाय के संतो में यही समानता है ..खुद को खुदा के साथ मिला देना ...और और महसूस करना बहुत बड़ी नेमत है .....
अब देखता हूँ छोटी सी दुआ की है पता नहीं कब तक कुबूल होती है और कब तक मुझे दरगाह पर जाने का तीसरा मौका मिलता है .......ख्वाजा मेरे ख्वाजा ...
सच कहूँ तो दरगाह के अन्दर बहुत शांति महसूस होती है , बहार के कोलाहल से अनादर का वातावरण एकदम से शांत ..मैं बैठ जाता हु चुपचाप , एकदम शांत , बाहर और अन्दर भी...बस कव्वाली की आवाज आ रही है ..पुरसुकून है ...सूफियो में बड़ी ताकत होती है ..और ये ताकत महसूस कर रहा होता हु ..सजदे में खुद ब खुद सर झुक जाता है और दुआ में हाथ खुद ब खुद उठ जाते हैं..यहाँ हिन्दू होना या मुसलमान होना कोई भी मायने नहीं रखता ...मायने रखता है तो सिर्फ खुद का खुद होना ...सूफी संतो में और भक्ति संप्रदाय के संतो में यही समानता है ..खुद को खुदा के साथ मिला देना ...और और महसूस करना बहुत बड़ी नेमत है .....
अब देखता हूँ छोटी सी दुआ की है पता नहीं कब तक कुबूल होती है और कब तक मुझे दरगाह पर जाने का तीसरा मौका मिलता है .......ख्वाजा मेरे ख्वाजा ...
Friday, October 5, 2012
Tuesday, September 18, 2012
I don't ask questions , I just accept the answers...
People use to ask me, why I don't ask questions, to God or to anyone ...and you know What I say....simply..
I don't ask questions , I just accept the answers...
Yar , Life becomes too easy, when u accept everything in the same form as it comes... whether It's happiness or sorrow, pain or comfort. I assume each and every emotions has it's own importance in the Life...Love or hate , honesty or cheating ..everything has it's own essence..and we must accept every such human emotion..
And you you know, when problem starts...when we start to ask questions , why, why me, etc, etc...hay u were chosen one , destiny's child...So why to ask questions...Nature gives u some some answers...Just accept those answers..And see how life seems beautiful.....
ho ho ho..as my tagline goes...How beautiful life is....It's beautiful yar, it's colorful..only u have to know how to live ..how to enjoy each and every moment..
I don't ask questions , I just accept the answers...
Yar , Life becomes too easy, when u accept everything in the same form as it comes... whether It's happiness or sorrow, pain or comfort. I assume each and every emotions has it's own importance in the Life...Love or hate , honesty or cheating ..everything has it's own essence..and we must accept every such human emotion..
And you you know, when problem starts...when we start to ask questions , why, why me, etc, etc...hay u were chosen one , destiny's child...So why to ask questions...Nature gives u some some answers...Just accept those answers..And see how life seems beautiful.....
ho ho ho..as my tagline goes...How beautiful life is....It's beautiful yar, it's colorful..only u have to know how to live ..how to enjoy each and every moment..
Saturday, September 15, 2012
ऐसा कैसे हो जाता है ....
पता नहीं मैं कभी कभी ऐसा कैसे बोल जाता हूँ , आज सुबह पवन आया था ब्रांच में , मैं तो ऐसे ही निरपेक्ष रहता हु , पर पता नहीं मुझे क्या हो गया था , बहुर बुरे शब्दों का इस्तेमाल कर दिया मैंने उसके लिए और उसके सामने ही , थोडा गुस्सा निकल गया, पर उसके जाने के बाद मुझे बहुत ही ख़राब लगने लगा , पता नहीं क्यों , रोने का मन होने लगा , लगा की फुट फुट कर रो पडू , मैं ऐसा किसी को कैसे बोल सकता हु, क्यूँ मैं किसी भी चीज़ के लिए किसी को भी दोषी ठहरा सकता हूँ , पता है पवन खुद ही टेंशन में है और मैंने ऐसा बुरा बोलकर उसे बहुत तकलीफ पहुंचा दिया ..पता नहीं मेरे अन्दर का इंसानियत थोड़े देर के लिए कहा मर जाता है , मैं खुद ही कहा करता हूँ कोई कोई भी बुरा नहीं होता , फिर मैं क्यों बुरा सोचने लगता हूँ , क्यों किसी को hurt करना शुरू कर देता हूँ ..ऐसा लग रहा है की मैं अभी जाऊ और पवन से अपने शब्दों के लिए माफ़ी मांगू.....
जो भी हो , अब मुझे ध्यान रखना है , जो होना होता है वो तो हो ही जाता है और जो चीज़ गुजर गई हो उसे सुधारा भी नहीं जा सकता , लेकिन भविष्य में इसका ख्याल रखा जा सकता है की मैं अपने शब्दों से किसी को आहत न करू ..बस भगवन से माफ़ी मांगता हूँ की क्यों मैंने पवन को हर्ट किया , भगवन , मुझे माफ़ करो ...
Thursday, September 13, 2012
मन की किताब से तुम, मेरा नाम ही मिटा देना.......
मन की किताब से तुम, मेरा नाम ही मिटा देना.......
बंदिनी फिल्म का ये गाना , जिसे गुलज़ार साब ने लिखा है, जब भी सुनता हूँ एक अजीब सी हलचल सी मच जाती है ..पता नहीं किस भाव से लिखा गया गया है ये song और उसी शिद्दत से गाया भी गया है ...
कहते है न कि, अपने आप को स्वीकार करना बहुत मुश्किल भरा काम है, अपनी अच्छाइयों से इतर अपनी बुराइयों को स्वीकार करना , शायद ये इंसानों से तो संभव नहीं है ...
मैं सब कुछ भूल कर वर्तमान में जीने लगता हु ,खुश और मस्त ,पर आज कुछ लोगो से मिला तो ये अहसाह हुआ , अपने बुरे होने का , और ये भी महसूस भी हुआ ....जब आप खुद को किसी और कि जगह पर रख कर देखते हैं तब ही आपको उस बन्दे की तकलीफ , दर्द का अहसास होता है, दुःख तो तब और होता है जब न चाहते हुए भी आपकी वजह से कोई दुखी हो, आपकी वजह से किसी की मुस्कराहट छिन जाये ...... कुछ नहीं बस इतना ही कह सकता हूँ ....
मन कि किताब से तुम , मेरा नाम ही मिटा देना
गुण तो न था कोई भी , अवगुण मेरे भुला देना ..
अवगुण मेरे भुला देना .....................................
Tuesday, September 11, 2012
कभी कभी ...
कभी कभी तुम ऐसा जरुर सोचते होगे की मैं इतना निष्ठुर कैसे हो जाता हूँ , no phone calls , no messages , no contact , seems vanished ....ये सारी चीजें बहुत तकलीफ पहुंचाती है , पर पता है वक़्त सारे जख्मो को भर देता है बस दिल खुला होना चाहिए ....पता है , मैंने जिंदगी में बहुत खिल्दंडा पंथी किया है, बहुत सारे लोगो को दुःख पहुँचाया है ...yes I did hurt a lot of people , and know what , I got punished hard by nature ...and it really made me ralise that I was a sh**t ...played with emotions ...played with sentiments...
And now I feel , it's time to understand myself, to be serious. I know I had collected lot of tear , which is making my life a misery...Now I don't want to hurt anyone , by my words or by my deeds...Life is too short..We have to live it to it's fullest...
पता है वक़्त के साथ सब कुछ घुलता मिलता जाता है , दुःख, विषाद, हंसी ,ख़ुशी , ..जब हम बहुत तनाव में होते हैं तो ऐसा लगता है , कि अब सब कुछ ख़तम, अब कुछ रहा नहीं इस जिंदगी में , और जब कुछ वक़्त गुजर जाता है तो हम खुद पे हँसते हैं, हाँ कितना बेवकूफ था मैं , इतने छोटी सी चीज से हार मान गया था ...या फिर ऐसा लगता है कि किसी के बिना जिंदगी चलती ही नहीं . पर जब थोडा वक़्त और गुजर जाता है तो हम ये महसूस करते हैं कि , मेरी जिंदगी तो उसी कि वजह से तकलीफदेह थी ....और तभी ये अहसास होता है अपने बेवकूफ होने का ...
और सच तो ये है कि अब मैं किसी को बेवकूफ बनाना नहीं चाहता , क्यूंकि कभी कभी लगता है आप किसी को बेवकूफ नहीं बना रहे होते हैं बल्कि जिंदगी खुद आपको ही बेवकूफ बना रही होती है...और मैंने ऐसा जाना है कि हर वक़्त जिंदगी ने मुझे बेवकूफ बनाया है. जब मैं पूरी दुनिया का मजाक बना रहा होता हूँ तो प्रकृति मुझ पर हंस रही होती है ...अट्टहास करके ...
बस अब और नहीं , अब और आंसू नहीं बटोरने मुझे ....थोडा तकलीफदेह तो जरुर है but , थोड़े वक़्त गुजर जाने पर तेरे मन का मैल भी धुल जायेगा , अपने लिए जितना घृणा मैंने बटोर लिए है वो भी कम हो जायेगा ..बस ये जरुर याद रखना के वक़्त सबसे बड़ा मरहम है ...धीरे धीरे सब कुछ घुल मिल जायेगा , इस जिंदगी के अनवरत प्रवाह में , सच है यहाँ कुछ भी रुकता नहीं, कुछ भी ठहरता नहीं..सब कुछ चलायमान है ...प्रेम और घृणा भी ...इंसान तो खैर है ही ...बस मन में किसी के लिए भी , किसी के लिए भी , जिसने कुछ अच्छा चाहा हो तुम्हारे लिए या जिसने तुम्हारी जिंदगी के कुछ पन्ने अँधेरे से श्याह कर दिए हो ...कोई भी विद्वेष मत रखना ...क्यूंकि कोई भी बुरा नहीं होता ..कोई भी बुरा नहीं होता ..
Thursday, September 6, 2012
दो नगमे .....
पिछले तीन चार दिनों से ये गाना सुन रहा हूँ ,
पर पता ही नहीं के क्या है ..सुनता ही जा रहा हूँ ..
सच है यार ,हम खुशियाँ ढूंढ़ ही नहीं पाते
बस दोषारोपण करते फिरते है , जमाना ख़राब है ,
बन्दे बन्दे में दाग है ....
मुझे कबीर का एक दोहा याद आ जाता है
बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिल्या कोई...
जो मन खोज्या आपनो , मुझसे बुरा न कोई ...
ये बहुत बढ़िया song , I want to share
"ये जमाना ख़राब है , मिया ये कैसा मजाक है ..
बन्दे बन्दे में दाग है , मिया कैसा मजाक है,
मैं नसीहत क्या दू , सब तो है सयाने यहाँ
फिर भी साफ साफ कह दू
सब कुछ है ला ला ला ...
तुझ में रहने रब आया तो बेघर क्यूँ कहलाये ,
मुरखपन में क्यूँ पगले तू आज को आग लगाये ,
सारी पढाई किस पीपल के पेड़ पे टांग आया,
बाँट बटोरे के हारा तब जाना क्या पाया,
क्यूँ बेफजूली में man, man चला हार के ,
नीरस ही रह जायेह न , तू ख़ुशी तलाशता फिरता कहा ....."
And one more song , of course from Coke studi season -2...
It like bhakti, bhakti , where a devotee dovote himself to divine without any question..
It feels like am in trance..
like am doinig yoga and left my body ..
forgot my all problems , all issue ..like am in another world ,
where, I find hapiness everywhere, love , affection ...
far, far away form this world of hatrate, frustration and dark..
completely merged with God...
It works like advaitva sindhanta of hinduism...
"अहम् ब्रह्मास्मि "..
I am the "One"...
So enjoy this divine fusion..
मदारी, मदारी मदारी मेरा तू,
मैं जम्बुरा रे , जम्बुरा रे जम्बुरा ..
तेरी रुखी सूखी , सूखी रुखी खाके देखा ..
हर एक निवाला अमृत लागे ..
तेरे रहमोकरम से, रहमोकरम से ,
हर फूटी किस्मत उठ के भागे
जितना भर दे खिलौना में चाभी ,
उतनी है उसकी रफ़्तार.
तू चलता है जीवन का मेला ..
तू ही सुने हम सब की गुहार ...
Sunday, September 2, 2012
कुछ फैसले ..
पिछले 5 दिनों से बहुत परेशान हूँ , और शर्मिंदा भी ...उलझा हुआ सा , फंसा हुआ सा महसूस करता हूँ कभी कभी , और इसी परेशानी में एक फैसला कर लिया ...कुछ दूसरा उपाय भी तो नहीं है ..और ये फैसला शर्मिंदा होने से तो बेहतर है ....भगवान ने चाहा तो फिर इसका विकल्प मुझे मिल जायेगा ...कभी तो उपरवाले को बहुत अहसानमंद हो जाता हूँ की मुझे संदीप और अमित जैसे दोस्त मिले ....
बस यही मानता हूँ, कि जो भी होता है अच्छा होता है ...और ये भी मानता हूँ कि जब दिन बुरे होते हैं तो आपके साथ सब कुछ बुरा ही होता ही ..पर हार कभी नहीं मानता मैं ..आशावादी हूँ , जब अच्छे दिन आयेंगे तो सब कुछ अच्छा होगा , व्यक्तिगत, व्यावसायिक और आध्यात्मिक स्तर पर ......बस इन्तेजार कर रहा हूँ की कब मेरे साथ कुछ अच्छा होना शुरू होता है ......
Saturday, August 25, 2012
कल सुना ..
कल सुना ..
हर सुबह तुम मेरा इन्तेजार करते हो
वहीँ ...जहाँ से मैं रोज गुजरता हूँ .....
वक़्त से पहले पहुँच कर .
सिर्फ इस आस में की एक मुलाक़ात हो ..
सच ही तो है की ..जिन्दा रहने के लिए एक मुलाक़ात जरुरी होता है ...
बारिश में खड़े रहते हो..
भीग जाते हो ..
तबियत भी ख़राब ...
पर कुछ है जो तुम्हे मजबूर करती है ..
उस रस्ते पे आने को ..
कुछ रूहानी सी ..
कुछ अनकही , अनजानी सी ..
क्यों है ऐसा और कुछ शिकायत भी नहीं ...
पर उस मुलाक़ात का क्या ..
जिसका कोई मतलब ही न हो..
हाँ ये तुम्हे भी पता है और मुझे भी ..
क्यों कर तुम मेरी आस पलते हो ..क्यों कर
समझाना चाहता हूँ तुझे ...
पर समझा नहीं पता ..
हार जाता हूँ मैं ...
उस चीज़ से जो रूहानी होती है ..
कभी तो डर भी लगता है मुझे ..
उस चीज़ से ..
जो अनकही भी है और अनजानी भी ...
कुछ रुखा सा मैं भी हूँ
कुछ बिखरा हुआ सा भी ..
चाहता था हर पन्ना समेट लू अपनी जिंदगी का
पर हर पन्ने के साथ कुछ और बिखर जाते हैं..
और तब एक सवाल करता हूँ ...
खुद से ...और फिर खुद ही उत्तर ढूंढ़ लेता हूँ ...
हर सवाल का उत्तर नहीं ढूंढ़ना चाहिए..
(Some questions better not to be answered )..
तुझे भी यही कहता फिरता हूँ ..
जिंदगी कुछ सवालो के जवाब खुद ही दे देती है ..
वक़्त आने पर...
बस वही मैं भी कर रहा हूँ ..
तुम भी करो...
क्यों कर यू खफा हो तुम .............
क्यों कर यू खफा हो तुम ...............
इतना तो बता दो क्या खता है मेरी
हर शाम तेरी ख्वाहिश..
हर सुबह तेरी पूजा
हर सपने में तुम
हर गम में तेरी छांव की चाह...
गर ये खता है तो ...
उपरवाले से ये दुआ करूँगा ..
अनगिनत जनम बख्से मुझे इंसानी रूह में ..
और हर जनम मैं ये खता करता जाऊ ...
Sunday, August 19, 2012
तेरी एक निगाह की बात है , मेरी जिंदगी का सवाल है
तेरे हुश्न पर है मेरी नज़र
मुझे सुबह शाम की क्या खबर
मेरी शाम है तेरी जुस्तजू
मेरी सुबह तेरा ख्याल है
तुझे क्या सुनाऊ मैं दिलरुबा ....
Monday, August 13, 2012
निम्बाहेड़ा और बारिश
निम्बाहेड़ा में इतनी बारिश , पुरे साल भर हो गए , ऐसी बारिश कभी नहीं देखी थी...ऑफिस जाते वक़्त मैं पूरी तरह भीग गया था और दिन भर मैं नंगे पांव था , क्यूंकि मेरे जूते पुरे भीग गए थे ....बेवकूफ की तरह था मैं पुरे दिन भर, हा हा हा हा और मैं भी मजे ले रहा था अपने नंगे पांवों का .....और तो और ब्रांच भी पूरी तरह मटियामेट रहा ...उम् और क्या मैं भागना चाहता था ब्रांच से 5 बजे ही , पर ये कभी हो नहीं पता , 7 बज ही जाते है .....क्या करू यार ....कैसे जल्दी ब्रांच बंद करू .... मुश्किल तो ये भी है की मुझे हॉल का इंचार्ज बना दिया गया है और अब 9.45 तक पहुँचाना पड़ेगा ...और मैं कभी नहीं चाहता की 10 बजे से पहले ब्रांच पहुंचू ....टेंशन न ले यार बस एक हफ्ते ....और साला ये नींद भी बड़ी जालिम है , बारिश और नींद ...खतरनाक संयोग है ...9.45 तक मैं जाग जाऊ यही काफी होगा
Sunday, August 12, 2012
मंजिल की तालाश ...
पता नहीं कब तक मैं मंजिल की तलाश में इस तरह भटकूँगा , कभी तो ऐसा लगे की रास्ता ही खुबसूरत है ,तो कभी एक खलिश सी , सिर्फ इसलिए कि कहीं तो है जहाँ मुझे पहुंचना है , बहुत जल्दी .कभी कभी बहुत खुश्क सा महसूस होता है , कहा करता था न कि राजस्थान की तपती रेत में बारिश की एक बूंद ढूंढ़ रहा हूँ ,पता नहीं ये तलाश भी कब तक पूरी होगी ....
ख्वाब को हकीकत में बदलना है , पता नहीं कब तक संभव होगा , क्यूँ कर मैं इतना अकिंचन होता जा रहा हूँ. कभी तो एकदम असहाय सा मासुस करता हूँ तो कभी थोडा तुष्ट. और ये तुस्टी तभी आती है जब मेरा माज़ी कुरेदकर चला जाता है , हाँ वही माज़ी जब जिंदगी का हर दिन एक दू:स्वपन था , हर एक दिन तब स्याह था और रातें कालिख भरी. अब तो थोडा उजाला जरुर है और इसी उजाले की बदौलत तो मैं थोड़ी मुस्कराहट खरीद पाया हूँ .और तब याद आते हो तुम भी , हाँ तुम , काली स्याह रातों में तुम मेरे साथ थे ,मेरे साझीदार , बिना किसी उम्मीद के , बिना किसी स्वार्थ के, आशा की एक किरण बनकर , और अब हर चांदनी रात में तुम्हारी ख्वाहिश करता हूँ ....
और तब याद आते है मेरे हर सपने , एक अनाथाश्रम , एक वृधाश्रम और एक छोड़ा सा पागलखाना , जहाँ वैसे पागल जिनका कोई न हो , उनकी सेवा की जा सके....हाँ यही तो सपना है मेरा और शायद मेरी मंजिल भी ....एक तुम्हारे अलावा .....
और हाँ एक नगमा जरुर शेयर करना चाहूँगा जिसे मैं कल शाम से ही सुनता जा रहा हूँ , उमराव जान का ये गीत जितना खुबसूरत है उतनी ही खूबसूरती से Coke Studio से कर्ष काले और मोनाली ठाकुर ने गाया है ....Thumps up for Coke Studio...
और हाँ एक नगमा जरुर शेयर करना चाहूँगा जिसे मैं कल शाम से ही सुनता जा रहा हूँ , उमराव जान का ये गीत जितना खुबसूरत है उतनी ही खूबसूरती से Coke Studio से कर्ष काले और मोनाली ठाकुर ने गाया है ....Thumps up for Coke Studio...
Saturday, August 11, 2012
What goes around, comes back around..
Passing by a meaningful songs....so sharing ...It's true yar...
All you get's a busy tone
I heard you found out
That he's doing to you
What you did to me
Ain't that the way it goes
My heart bleeded girl
So it goes without saying that you left me feeling hurt
Just a classic case
A scenario
Tale as old as time
Girl you got what you deserved
And now you want somebody
To cure the lonely nights
You wish you had somebody
That could come and make it right
But girl I ain't somebody with a lot of sympathy
You'll see
What goes around comes back around..
All you get's a busy tone
I heard you found out
That he's doing to you
What you did to me
Ain't that the way it goes
My heart bleeded girl
So it goes without saying that you left me feeling hurt
Just a classic case
A scenario
Tale as old as time
Girl you got what you deserved
And now you want somebody
To cure the lonely nights
You wish you had somebody
That could come and make it right
But girl I ain't somebody with a lot of sympathy
You'll see
What goes around comes back around..
Thursday, August 9, 2012
एक अच्छा इन्सान
समझता हूँ की एक अच्छा इन्सान बनने के लिए थोडा और गलने की जरुरत है . क्यों मैं उन सब लोगों का दिल दुखाता रहता हूँ जिन्होंने हमेशा मेरी अच्छे की कामना की है , सिर्फ अच्छे की और मैं अपने कर्मों से और शब्दों से हमेशा उन्हें तकलीफ ही पहुंचाता हूँ...सिर्फ अपने आपको बड़ा दिखने के लिए और शायद सिर्फ मजाक के लिए ही सब का मजाक उडाता रहता हूँ ......तब तो शायद मुझे कुछ भी पता नहीं चलता पर जब पता चलता है कि मेरी वजह से उनको तकलीफ पहुंची है तब अपने हृदय रहित होने का पता चलता है ...
और तो और क्यों मैं किसी के आंसुओं का भागी बनता हूँ ...और शायद यही आंसू मुझे भाग्यहीन बनाते है ..तब मैं शायद अकेले में पश्चाताप करता हूँ...और कर भी क्या कर सकता हूँ , थोडा और जलना है मुझे , थोडा और गलना है मुझे , थोडा अच्छा होने के लिए ...और मुझे शायद भावनाओ कि भी क़द्र होनी चाहिए ...किसी के emotions से मैं कैसे खेल जाता हूँ ......
क्यूँ कर मैंने ऐसा हूँ यार ..क्यों कर , और पता नहीं कब तक अपने आप को बदल पाउँगा.....
Wednesday, August 8, 2012
Two beautiful songs..
was just listening these two songs..on VH1, and what ,I did notice the lyrics....lovely...so m sharing...
hundred days have made me older
Since the last time that I saw your pretty face
A thousand lies have made me colder
And I don't think I can look at this the same
But all the miles that separate
Disappear now when I'm dreaming of your face
I'm here without you baby
But you're still on my lonely mind
I think about you baby
And I dream about you all the time..
And the second one:-
My life is brilliant.
My life is brilliant.
My love is pure.
I saw an angel.
Of that I'm sure.
She smiled at me on the subway.
She was with another man.
But I won't lose no sleep on that,
'Cause I've got a plan.
You're beautiful. You're beautiful.
You're beautiful, it's true.
I saw your face in a crowded place,
And I don't know what to do,
'Cause I'll never be with you....
By James Blunt
Thursday, August 2, 2012
फिर तेरे खयाल ने रुला दिया
फिर तेरे खयाल ने रुला दिया .....
फिर तेरे नाम ने बेताब किया .....
बेरहम चाहत ने बढ़कर वही गिला किया .....
Amazing voice and amazing lyrics..From where this MTV guys get great Stuff..
Listening this song , thought I was listening Bhimsen Josi...
Thanks to Nitin sawhney for this great song........
Tuesday, July 31, 2012
एक बहुत बुरा दिन
हा , एक बहुत बुरा दिन ......कैसे ऐसा हो जाता है ...क्यों कर मैं कभी कभी इतना निष्ठुर हो जाता हूँ ,रुला दिया उसे जिसके हर आंसू में मेरी पूरी जिंदगी बसती है ....और अब शायद उसे एक और वजह दे दिया , मुझसे नफरत करने का .....हाँ मुझे पता है के तुम मुझसे नफरत कभी कर ही नहीं सकते पर , हाँ ....u'll say ...I hate u...पर सच कहूँ मैं तुम्हे रुलाना नहीं चाहता , कुछ समझाना चाहता था .. जिंदगी के लिये ....चलो कोई न , इतना झेलता हूँ , थोडा और सही..
शाम को वही ,When I was talking to some one , said something too messy and then I realized, what the blunder I had done.......n when I realized ...i started to cry...How can I talk to some one like that...oh f**c man...I had done..and no other way to repent ...Still m thinking , how i talked
(and realized m that rude) ...God please forgive me ....अब तू ही मुझे माफ़ कर है।...मैं ऐसा कैसे बोल सकता हूँ ...कैसे , कैसे ?माफ़ कर दो मुझे ....
और तो और पैर में घाव हो गया है , बहुत दुःख रहा है , और इतनी swelling हो गयी है की मैं क्या कहूँ, रहा नहीं जा रहा है ....कल दो capsules भी लिए थे , पर कोई असर नहीं हुआ ...पता नहीं दर्द से मैं सो पाउ या नहीं .......कल Doctor के पास जाऊंगा , नहीं तो मैं शायद चल भी न पाउ .....
छोड़ो एक बुरा दिन गया , अब FIR देखूंगा SAB चैनल पे और खूब हँसना चाहूँगा ....and a beautiful song wanna share...coz m listening this lovely song since morning...
शाम को वही ,When I was talking to some one , said something too messy and then I realized, what the blunder I had done.......n when I realized ...i started to cry...How can I talk to some one like that...oh f**c man...I had done..and no other way to repent ...Still m thinking , how i talked
(and realized m that rude) ...God please forgive me ....अब तू ही मुझे माफ़ कर है।...मैं ऐसा कैसे बोल सकता हूँ ...कैसे , कैसे ?माफ़ कर दो मुझे ....
और तो और पैर में घाव हो गया है , बहुत दुःख रहा है , और इतनी swelling हो गयी है की मैं क्या कहूँ, रहा नहीं जा रहा है ....कल दो capsules भी लिए थे , पर कोई असर नहीं हुआ ...पता नहीं दर्द से मैं सो पाउ या नहीं .......कल Doctor के पास जाऊंगा , नहीं तो मैं शायद चल भी न पाउ .....
छोड़ो एक बुरा दिन गया , अब FIR देखूंगा SAB चैनल पे और खूब हँसना चाहूँगा ....and a beautiful song wanna share...coz m listening this lovely song since morning...
Saturday, July 28, 2012
I feel wonderful , life is so beautiful!!!!
A beautiful ad video by vodafone ...Loved the lyrics....and it goes with the sink of mah blog's name..........oohhhhhhhhhhhhhoooooooo I feel wonderful,life is so beautiful........So I used to say everyone is good and lovely....why it becomes that we start to say that this person is not good....ammmmh bad...cos we expect some kind of particular behavior from them, and when they don't behave in the same manner , what we had expected...we start to feel pain.......and this pain tells us that the person is not good.....but In fact everyone is good here...having some great kinda qualities...but this is our exception that makes that person good or bad......................and why we get hurt, coz of our expectation...so may tag goes.. Never expect anything from anyone , coz expectation hurt..and hurt hard....
And m sharing that b'ful ad video ..thanks to vodafone for such a lovely video
Friday, July 27, 2012
विरोधाभास
क्यों इतना विरोधाभास है मुझमे ..समझ में ही नहीं आता मुझे ...आज अचानक से इच्छा हुई की कृपालु जी महाराज की शिष्या जगदीश्वरी देवी के प्रवचन में जाऊ , और चला गया ..क्यूँ अच्छाई और बुराई के बीच झूलता रहता हूँ ....विरोधाभासी ........कभी दारू मुर्गा पागलपंथी खिल्दंडा तो कभी शांत सौम्य भक्ति कथा श्रवक ...कभी batman सिरीज़ की movies देखता हूँ तो कभी मदर इंडिया या दो बीघा जमीन ........के एल सहगल और सुरैया तो कभी Coke Studio का fusion , भरे भरे और बावरी .....ब्रांच में भी ऐसा ही महसूस करता हूँ ...कभी तो किसी से ऐसे बात करता हूँ और उसकी समस्या ऐसे सुलझाता हूँ,जैसे मैं सबसे बढ़िया इन्सान हूँ , तो कभी किसी को ऐसे डांट कर भगा देता हु कि वो मुझे गलियां देता फिरे ....
खुद को समझना भी मुश्किल हो जाता है तब ..मैं ऐसा क्यूँ हूँ ...कुछ तो है जो मैं ढूंढ़ रहा हूँ ..कुछ ऐसे प्रश्नों का उत्तर जो मैं करता था कि हमे सारे प्रश्नों के उत्तर नहीं ढूंढ़ना चाहिए ....पर आज मैं ढूंढ़ रहा हूँ .....हाँ ....मैं ही क्यूँ ? मैं ही क्यों ?...और तब ऐसा लगता है .....इसका उत्तर सिर्फ अध्यात्म दे सकता है ....Why we suffer ? शायद इसका कुछ भी जवाब मिले तो थोडा शांत हो जाऊ .....शांत धीर और गंभीर ......
खुद को समझना भी मुश्किल हो जाता है तब ..मैं ऐसा क्यूँ हूँ ...कुछ तो है जो मैं ढूंढ़ रहा हूँ ..कुछ ऐसे प्रश्नों का उत्तर जो मैं करता था कि हमे सारे प्रश्नों के उत्तर नहीं ढूंढ़ना चाहिए ....पर आज मैं ढूंढ़ रहा हूँ .....हाँ ....मैं ही क्यूँ ? मैं ही क्यों ?...और तब ऐसा लगता है .....इसका उत्तर सिर्फ अध्यात्म दे सकता है ....Why we suffer ? शायद इसका कुछ भी जवाब मिले तो थोडा शांत हो जाऊ .....शांत धीर और गंभीर ......
Wednesday, July 25, 2012
Tuesday, July 24, 2012
प्रभु से
छोटी छोटी खुशियाँ बुनता हु मैं , छोटी छोटी , और तुम झटके में सब कुछ छीन लेते हो।लग रहा है कि मेरे सारे पूर्वजन्मों के पापों का हिसाब इसी जनम में ले लोगे तुम .पता है जिंदगी में मैंने सबकुछ स्वीकार किया है , अत्मशात किया है , बिना किसी शिकायत के ..और शायद अपने लिए कुछ माँगा भी नहीं , और मांगूंगा भी नहीं ...पर जिनके लिए बचपन से कामना की थी , जिनकी हर ख़ुशी की कामना की थी ,उनके लिए जरुर मांगता हूँ, और अगर मैं जिंदगी में कुछ भी अच्छा काम कर रहा हूँ तो मेरी प्रार्थना जरुर सुनी जानी चाहिए ...
आज जो कुछ भी सुना , लगा खंडित हो गया हूँ मैं , एकदम से बेबस , निरीह ..अपने अस्तित्व का मतलब ही मिटता सा लगा ,लगा सब कुछ खोखला सा है , एकदम खोखला .........लगा , लड़ पडू मैं अपने सृजनकर्ता से , और मांगू अपने हर कर्म का हिसाब, हर त्याग का हिसाब ....जो आज तक चुपचाप करता आया हूँ !
लगता है जीना ही कष्टमय है , हर गुजरता दिन , बस एक दुखद स्वपन .......कभी कभी सोचता हूँ कितना विरोधाभास है , मेरे ब्लॉग का नाम है ....."कितनी खुबसूरत है है ये जिंदगी .."....और शायद जिंदगी कितनी बदसूरत हो चली है मेरी जिंदगी ....पहले दादाजी का जाना, और फिर दीदी की शादी , और अब ये सब कुछ ....
नि:शब्द हूँ , निर्निमेष !जिंदगी !
And then I just come back to some kind of optimism, yes, this is a phase of suffering....suffering in each aspect of life ...So what?this will also pass......And when u suffer , suffer joyfully, suffer with smile....Yes Lord Buddha is smiling small Boy!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
आज जो कुछ भी सुना , लगा खंडित हो गया हूँ मैं , एकदम से बेबस , निरीह ..अपने अस्तित्व का मतलब ही मिटता सा लगा ,लगा सब कुछ खोखला सा है , एकदम खोखला .........लगा , लड़ पडू मैं अपने सृजनकर्ता से , और मांगू अपने हर कर्म का हिसाब, हर त्याग का हिसाब ....जो आज तक चुपचाप करता आया हूँ !
लगता है जीना ही कष्टमय है , हर गुजरता दिन , बस एक दुखद स्वपन .......कभी कभी सोचता हूँ कितना विरोधाभास है , मेरे ब्लॉग का नाम है ....."कितनी खुबसूरत है है ये जिंदगी .."....और शायद जिंदगी कितनी बदसूरत हो चली है मेरी जिंदगी ....पहले दादाजी का जाना, और फिर दीदी की शादी , और अब ये सब कुछ ....
नि:शब्द हूँ , निर्निमेष !जिंदगी !
And then I just come back to some kind of optimism, yes, this is a phase of suffering....suffering in each aspect of life ...So what?this will also pass......And when u suffer , suffer joyfully, suffer with smile....Yes Lord Buddha is smiling small Boy!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
Saturday, July 21, 2012
hmmmmmmmmmmmm.....
what?Just wanted to write a b'ful sentence....hmm u said.....चाहे जितने भी गिले शिकवे हो , हम जब भी मिलते है , एक दुसरे को खुले दिल से स्वीकार करते है ...
Yes , yes yes....and thanks u made me remember that it's Neetu's b'day today..How could i forget this date ...freak...i forgot ...anyway called her and did wish my sweet sis........
And for last 2 days m going to Badi sadri, for kinda bank's works....n what, I love long drives, specially when m alone ....and It's b'ful lush greenery over there....drove at 26 km/h ....seems too slow.....but enjoyed every bit of that....stopped my bike , stood over there, closed my eyes and spread my hands , as I was on Titanic ....awusum......passerby might thought ..kinda mad ...and I smiled .."yes, I am"......
Reading "Of course I love you.." by Durjoy datta....and m loving it...साथ में गुलजार की "रावी पार " भी पढ़ रहा हूँ . अनुपम , अद्वितीय ,एक शायर की कहानिया ...और अचानक से मुझे धर्मवीर भारती का उपन्यास "गुनाहों का देवता " याद आ गया....याद आ गया , अपना इलाहाबाद और साथ में चंदर और सुधा भी ....कालजयी !!!
Yes , yes yes....and thanks u made me remember that it's Neetu's b'day today..How could i forget this date ...freak...i forgot ...anyway called her and did wish my sweet sis........
And for last 2 days m going to Badi sadri, for kinda bank's works....n what, I love long drives, specially when m alone ....and It's b'ful lush greenery over there....drove at 26 km/h ....seems too slow.....but enjoyed every bit of that....stopped my bike , stood over there, closed my eyes and spread my hands , as I was on Titanic ....awusum......passerby might thought ..kinda mad ...and I smiled .."yes, I am"......
Reading "Of course I love you.." by Durjoy datta....and m loving it...साथ में गुलजार की "रावी पार " भी पढ़ रहा हूँ . अनुपम , अद्वितीय ,एक शायर की कहानिया ...और अचानक से मुझे धर्मवीर भारती का उपन्यास "गुनाहों का देवता " याद आ गया....याद आ गया , अपना इलाहाबाद और साथ में चंदर और सुधा भी ....कालजयी !!!
Friday, July 20, 2012
पता नहीं
एक बहुत ही खुबसूरत कविता पढ़ी ...गजाननं माधव मुक्तिबोध जी की ...
लिख रहा हूँ ............
पता नहीं ,कब ,कौन ,कहाँ , किस ओर मिले ,
किस साँझ मिले , किस सुबह मिले !!
यह राह जिंदगी की ,
जिससे जिस जगह मिले, है ठीक वही ,
बस वही अहाते मेहंदी के ,
जिनके भीतर है कोई घर ,
बाहर प्रसन्न पीली कनेर ,
बरगद ऊँचा ,जमीं गीली ,
मन जिन्हें देखकर कल्पना करेगा जाने क्या !!
तब बैठ एक गंभीर वृक्ष के तले
टटोला मन , जिससे जिस छोर मिले ,
कर अपने अपने तप्त अनुभवों की तुलना
घुलना मिलना ....
अपनी धकधक में दर्दीले फैले -फैलेपन की मिठास ,
या निह्स्वत्मक विकास का युग
जिसकी मानव गति को सुनकर
तुम दौडोगे प्रत्येक व्यक्ति के
चरण तले जनपथ बनकर !!
वे आस्थाये तुमको दरिद्र करवाएंगी
की दैन्य ही भोगोगे पर ,तुम अनन्य होगे ..
प्रसन्न होगे ...
आत्मीय एक छवी तुम्हे नित्य भटकाएगी
जिस जगह , जहाँ जो छोर मिले ले जाएगी ..
पता नहीं ..कब , कौन ,कहाँ , किस ओर मिले।.......
Tuesday, July 17, 2012
ब्रज वीर : विदाई
आज अंतिम दिन है ब्रज वीर का हमारे साथ , सोचा तो की बहुत कुछ लिखूंगा उसके बारे में , पर कुछ मन ही नहीं हो रहा है लिखने का , मैं खुद ही बहुत बुझा बुझा सा महसूस कर रहा हूँ ,ना तो अब हंसने का मन होता है न ही रोने का ... ख़ैर जो भी हो जब एक अच्छा इन्सान जिंदगी से छूटता है तो तकलीफ तो होती है ...बस भगवान से यही दुआ करता हु कि जहाँ भी रहे , हमेशा खुश रहे , हँसता रहे , मुस्कुराता रहे ....और जो भी सपने उसने देखे है सब पुरे हो ...एक खास बात यहाँ नोट कर लूँगा की इस बन्दे में त्याग की भावना है , और यही तो एक चीज़ है जो इन्सान को महान और अच्छा बनाता है ....त्याग ......May God bless him...
And I got seven books from Flipkart.....Best way to keep myself busy..
1.Of course I love u....till I find some one better by Durjoy Datta
2.You were my crush ...till u said u love me by Durjoy
3.Madhushala by Hariwansh roy bacchan
4.madhubala by Hariwansh roy bacchan
5.Rawi par by Gulzar(This book was in my mine since class 10th)
6.Ek gadhe ki aatmakatha by Krishna Chandar
7.Mudrarakshasa by Vishkhadatta(trans:-rangey Raghav)...sannskrit ki mahan kriti..
इन किताबो को पढ़ कर ही अब मेरा दिन गुजरेगा .....
and for Braj Veer...U r a great guy, i'll miss u.....
And I got seven books from Flipkart.....Best way to keep myself busy..
1.Of course I love u....till I find some one better by Durjoy Datta
2.You were my crush ...till u said u love me by Durjoy
3.Madhushala by Hariwansh roy bacchan
4.madhubala by Hariwansh roy bacchan
5.Rawi par by Gulzar(This book was in my mine since class 10th)
6.Ek gadhe ki aatmakatha by Krishna Chandar
7.Mudrarakshasa by Vishkhadatta(trans:-rangey Raghav)...sannskrit ki mahan kriti..
इन किताबो को पढ़ कर ही अब मेरा दिन गुजरेगा .....
and for Braj Veer...U r a great guy, i'll miss u.....
Monday, July 2, 2012
दादाजी का जाना और दीदी की शादी
ऐसा तो मैंने कभी सोचा ही न था , दीदी की शादी के ठीक २ दिन पहले दादाजी का देहांत ....
मेरी जिंदगी का शायद सबसे बड़ा सदमा ,एक तरफ तो हम उसे अपने घर से विदा करा रहे थे , जिसने मुझे बड़े लड़ प्यार से रखा , और दूसरी तरफ उन्हें जो मुझे बड़े स्नेह से रखते थे ...दादाजी का आत्मीय स्नेह और दीदी की ममता , एक ही बार में दोनों मेरी जिंदगी से गायब...
पर क्या करू, यही जिंदगी है , क्यों इतना दुःख होता है .....मन तो करता है की जार jaar होकर रो पडूँ, पर रो भी नहीं पता ......क्यूँ इतना शुष्क हो गया हूँ मैं ....
Tuesday, May 29, 2012
ब्रज वीर
हाँ जी, ब्रज वीर के बारे में सोच रहा था के कुछ लिखू ....पहले दिन जब ये ब्रांच में आया तो मैं भिड गया था ....मुझे इसका व्यवहार एकदम से पसंद नहीं आया ....सोचा कितना खडूस है ये ये....और आज जब ये लिख रहा हूँ तो लगता है , मैं गलत था ...ये खडूस नहीं है ये ऐसा ही है ......
धीरे धीरे इसे जानने की कोशिश कर रहा हूँ ! मुझे लोगो को पढ़ना बहुत पसंद है और खास कर ऐसे लोगो को जिनमे कुछ खास होता है ...इस बन्दे को देख कर मुझे ऐसा महसुसू होता है , खुदा ने इसे कुछ बहुत ही खास बक्शा है ..कुछ बहुत ही खास ..शयद इसकी तन्हाई या फिर इसका अकेलापन..या फिर इसके अकेले होने की चाहत....
बरबस ही वो लड़की याद आ जाती है , अलका अग्रवाल , वही चुलबुली सी लड़की ...जिसका चुलबुलापन पता नहीं 5th के बाद कहाँ गायब हो गयी थी ...निर्निमेष आँखे ...एक खाने को दौड़ता अकेलापन ...याद करता हूँ , 5th के बाद उसने कोई नया दोस्त भी नहीं बनाया ....खूब जानने की कोशिश की...आखिर क्यों ऐसा हुआ ...क्यूँ एक चुलबुली सी , प्यारी से मुस्कान एक खुबसूरत चेहरे से गायब हो गयी ...........
जो भी हो शायद अब मैं उसकी वजह जान भी नहीं पाउँगा ...और वही निर्निमेष आँखे अब मैं ब्रज वीर में पाता हूँ ..पता नहीं क्यों एक सूनापन ...एक अजीब सा सूनापन उसकी आँखों में दिखाई देता है ...और मुझे ऐसा सूनापन और ऐसी एकाकी एकदम पसंद नहीं .....तो मैं हमेशा ही उसे हंसाने की कोशिश करता हूँ .....शवाब, शराब और कवाब ..पर नहीं यार...हंस देता है वो ...लेकिन ये हंसी भी खोखली जान पड़ती है ..ऊपर से हंस देता है....पता नहीं इस बन्दे ने कब अन्दर से खुल के हंसी आई हो ...
और सबसे बुरी चीज़ तो ये है की, भाई साब हमेशा सिरिअस रहते है , जिंदगी से fun जैसी चीज़ को तो लगता है काट कर फेंक दिया है , अरे भाई थोडा चेहरे पे मुस्कराहट रखो , पता नहीं कब सामने वाले की मुस्कराहट तेरी मुस्कराहट से अपनत्व जोड़ ले ..पर ना ये चांस भी नहीं लेना ....ठीक है ..पर सामने वाले को तो चांस दो....नहीं वो भी नहीं होगा ...और हर चीज़ के पीछे Logical मतलब तार्किक हो जाना तो इनका सब से विशेष गुण है ...थोड़ी पागलपंथी भी तो जरुरी है ना ..जिंदगी के लिए....थोडा अनमना होना , थोडा खिल्दंडा होना ...
और जब जानने की कोशिश करता हूँ की , वो ऐसा क्यूँ है तो कोई उत्तर नहीं पाता ...तो खुद ही उत्तर ढूंढने लग jata हूँ ....क्यूँ है ऐसा ...बचपन का कोई दुह:स्वप्न ...पर नहीं ऐसा भी कुछ नहीं...गरीबी का दंश तो नहीं .....क्यूंकि गरीबी तो ऐसी चीज़ है सब से पहले चेहरे की मुस्कराहट ही छीन लेती है, पर ऐसा भी नहीं है ...भाई साब तो खाते पीते घर से हैं ...तो फिर ऐसा क्यूँ है ...और फिर ध्यान आता है की किसी लड़की वडकी का तो चक्कर नहीं ...और यहाँ पर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं पाता ....अरे भाई दिल के दरवाजे खुले रखो .....एक लड़की के चक्कर में तो तुम इतने विछिन्न नहीं हो सकते ......बस मुस्कुराते रहो ....पर नहीं चेहरे में हमेशा ही seriousness .......
और मुझे भी खुजली होती रहती है की , हँसता रहता हूँ , भाई तू इतना serious क्यूँ है ....Life is beautiful , colorful , देख तो सही ....हर वक़्त कैरिएर , लाइफ , कैरिएर , लाइफ , कैरिएर लाइफ ...
अब कल ले गया उसे मैं , JK मंदिर और अम्बामाता ....पर उसे तो मेरे रूम पे ही रहना पसंद था ..कितना जिद करना पड़ा कि ...चलो ...finally मैं बहुत खुश हुआ जब धन्यवाद् मेसेज मिला ...चलो थोडा काम तो आया मैं , थोड़ी ख़ुशी और जयादा तो नहीं थोडा सा असली मुस्कराहट का अहसास मुझे उसके उस मेसेज से मिला ..............
चलो ज्यादा नहीं लिखता हूँ , बस अब बंद करता हूँ ..........काफी दिन काटने बाकी है अभी ब्रज वीर के साथ ....जब अलविदा कहोगे तो बहुत कुछ लिखूंगा ....
Sunday, April 15, 2012
नाटक का पटाक्षेप
5 महीने से चल रहे नाटक पर्दा गिरा और नाटक ख़तम ....सच में हम पर्दा गिरने का ही इन्तेजार कर रहे होते हैं ....कुछ किरदार बहुत ही नाटकीय होते हैं और कुछ बहुत ही सीधे साधे..बस इसी से तो नाटक बनता है ....और हर नाटक से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है ...और हर नाटक के बाद इन्सान थोडा और मजबूत होता है ...थोडा और अनुभवी ......सच कहूँ तो इस से उसे अगले नाटक को सही से करने की शक्ति मिलती है , चाहे किरदार कोई भी हो ....
और साला एक नाटक के ख़तम होने के बाद जिंदगी रूकती कहाँ है ...बस चलती जाती है ...और हम नए नाटक के लिए तैयार हो रहे होते हैं...
बस इन्सान को खुद को तैयार रखना चहिये...हर किरदार में अपने आप को ढालने के लिए..और हर उस नाटक के लिए भी तैयार होना चहिये..जो भगवन उसके लिए चुनता है....
मैं तो अपना किरदार सही से निभाने की कोशिश कर रहा हूँ..बस यही पुछ ता हूँ की क्या आप भी इमानदार हैं..
और साला एक नाटक के ख़तम होने के बाद जिंदगी रूकती कहाँ है ...बस चलती जाती है ...और हम नए नाटक के लिए तैयार हो रहे होते हैं...
बस इन्सान को खुद को तैयार रखना चहिये...हर किरदार में अपने आप को ढालने के लिए..और हर उस नाटक के लिए भी तैयार होना चहिये..जो भगवन उसके लिए चुनता है....
मैं तो अपना किरदार सही से निभाने की कोशिश कर रहा हूँ..बस यही पुछ ता हूँ की क्या आप भी इमानदार हैं..
Saturday, March 24, 2012
बिखर जाने का मन कर रहा है
बिखर जाने का मन कर रहा है ....कभी कभी ही तो ऐसा महसूस होता है जिंदगी में ..जब पूरी दुनिया, ये शहर , ये जॉब बेमतलब के लगने लगते हैं ....और तो तब जब खुद का होना भी बेमतलब सा होता है ..एकदम बेमतलब ...तो लगता है की बिखर जाऊ मैं , बाँट जाऊ टुकडो टुकडो में और बिखर जाऊ , और ऐसा बिखरू की नामो निशान मिट जाये .....क्यूँ होता है ऐसा जब इन्सान खुद के अस्तित्व को ही मिटा देना चाहता है , सब सिर्फ भावनाएं होती है ...चलो वक़्त बहुत बड़ा मरहम होता है इस अहसास को भी मिटा देगा .......
पर सच में यार जिंदगी में हर अहसास का अपना अलग महत्त्व है ...और इस बिखर जाने का अहसास तो और भी ......कभी कभी तो सोचता हूँ की मैं बहुत भाग्यशाली हूँ की , इस दौर से गुजर रहा हु ......सच है यार कितने लोगो को ये अहसास होता होगा ....अपने अस्तित्व को मिटा देने का अहसास ....
प्रभु वक़्त बहुत बड़ी मरहम है न , सब कुछ मिटा देती है , सब कुछ भर देती है ..बस इसी वक़्त के सहारे गुजर रहा हु ...बस बिखरने मत देना मुझे , मिटने मत देना मुझे , मुझे खड़ा रहना है , सबके लिए , और सबकी मुस्कराहट के लिए , बरसात में भी , और धुप में भी मुझे ऐसे ही खड़ा रहना है , मुस्कुराते हुए, सबकी मुस्कराहट के लिए ...........बिखरने मत देना मुझे ....
पर सच में यार जिंदगी में हर अहसास का अपना अलग महत्त्व है ...और इस बिखर जाने का अहसास तो और भी ......कभी कभी तो सोचता हूँ की मैं बहुत भाग्यशाली हूँ की , इस दौर से गुजर रहा हु ......सच है यार कितने लोगो को ये अहसास होता होगा ....अपने अस्तित्व को मिटा देने का अहसास ....
प्रभु वक़्त बहुत बड़ी मरहम है न , सब कुछ मिटा देती है , सब कुछ भर देती है ..बस इसी वक़्त के सहारे गुजर रहा हु ...बस बिखरने मत देना मुझे , मिटने मत देना मुझे , मुझे खड़ा रहना है , सबके लिए , और सबकी मुस्कराहट के लिए , बरसात में भी , और धुप में भी मुझे ऐसे ही खड़ा रहना है , मुस्कुराते हुए, सबकी मुस्कराहट के लिए ...........बिखरने मत देना मुझे ....
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कभी कभी मैं सोचता हूँ कि मैं कहाँ आ गया , और कहाँ जा रहा हूँ , न तो कोई मंजिल है और न ही कोई रास्ता, बस जीना है तो जिए जारहाहूँ, क्या यही हो...
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I don't know..what's going to happen with me in 2014.It was the very first day, was in Goa with best pals , wondering on beach..but...
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Good Story and a lot of history.... M loving it ..It seems Hindi is also comlicated foe me..Complicated words by author ....But m learni...

