Saturday, November 26, 2016

कुछ यूँ ही...

ये कहानी हमारी ही थी ,पर लफ्जो को मुस्कुराना तो तुमने ही सिखाया था, कुछ पन्ने स्याह थे उसके ,पर हर पन्ने पर नाम तुम्हारा था

निष्पृह