Saturday, November 19, 2011
कुछ बातें कुछ यादें
हाँ कुछ तो जरुर छुटता हुआ लगता है , कुछ पुरानी बहुत ही सुहानी यादें ताज़ा हो जाती हैं , सुन रहा हूँ गाना , लग जा गले से फिर हसीं रात हो न हो, फिर मुलाकात हो न हो, सचमुच हम मुलाकात को तरस से जाते हैं, सचमुच यादों से ही जिंदगी बनती है , कुछ खट्टी कुछ मीठी, और हम ऐसे ही जिंदगी के पन्नो को भरते चले जाते हैं , कुछ अफ़सोस भी होता है, किसी के छुटने को, डर भी होता है किसी के खोने का, लगता है सब शुन्य है और कुछ भी नहीं, जो ख जाते हैं उनसे तो हम कभी मिल भी नहीं पते और जिनसे मिलना चाहते हैं प्रकृति मिलने भी नहीं देती...
Friday, October 21, 2011
शहर में हूँ मैं तेरे , आके जरा मिल तो ले
बहुत प्यारे शब्दों का इस्तेमाल किया है , सुनता हूँ इन गानों को तो कुछ अपनेपन की अनुभूति होती है, पर न तो यहाँ अपनापन है और न ही अपना शहर , लगत है कितना पीछे छुट गया है अपना शहर और अपने लोग, सच कहूँ तो जीने का मकसद भी छूटता नज़र आता है , एक छोटी सी जिंदगी मैं अपने लोगों से ईतना दूर होकर जीना भी मुश्किल लगता है , आत्मीयता की एक बूंद के लिय भी यहाँ जिंदगी तरस सी जाती है , और हम इसी बूंद की तलाश में कई और मायने भी ढूनन्धने लग जाते हैं, और मैं भी इसका अपवाद नहीं हो सकता , और मैं भी इसी को तलाश करने लगता हूँ, पर अब लगता है की थोड़ी सी प्रतिबद्धत तो आ ही गयी है २, ३ साल पहले जो भटकाव होता था अब नहीं होता, हाँ सच है वो भटकाव अ नहीं होता, नहीं खुबसूरत चेहेरों पे भी नहीं...
खैर छोड़ो कुछ अपने शहर की बातें तो करूँ, आपना शहर अब अपना नहीं रहा , नाही अब ये शहर मुझे अपना मनाता है , बस एक अजनबी सा बर्ताव करता है, कहता है तुम्हे कल सुबह ही तो जाना है और मैं अकड़
कर रह जाता हूँ , काश मैं तुम्हे हक से अब भी आपना ही शहर कह पता , रांची भी शायद कुछ अपनी जैसी ही थी ,पर यहाँ राजस्थान मैं भटकते भटकते अपने अस्तित्व की पहचान भी खो चूका हूँ,
और क्या क्या लिखूं , कुछ तो लिखना ही हैं , हमेश सी ही गुरुवार अच्छा नहीं हो रहा हैं, कल तत्काल का टिकेट भी नहीं हुआ, और ४ टिकेट, देखता हूँ की एक भी कन्फर्म होता हैं या नहीं, नहीं हो तो बहुत मुस्किल होगी जाने में, वो यात्रा भी याद आ जय हैं जो , इसी समय में , और इसी ट्रेन में हुई थी, हा हा हा बड़ा मजेदार वाक्य हुआ था , लगता ही नहीं की १ साल पुरे गुजर गए, यार ऐसे देखते ही देखते पूरी जिंदगी गुजर जाएगी..
Saturday, October 15, 2011
लैपटॉप
आखिर मैंने लैपटॉप ले ही लिया...२००९ से प्लान बना रहा था कभी ये इसु तो कभी वो इसु, चलता ही जा रहा था और अंत में मुझे लैपटॉप नसीब हो ही गया, बैंक की दुआ से..औत आज इन्टरनेट का कनेक्शन भी ले लिया, देखता हूँ अब मैं इसका कितना सार्थक उपयोग कर पता हूँ.......कब से एक बहाना धुंध रहा थे की मेरे पास लैपटॉप नहीं है अब वो बहाना भी ख़तम...
एकचअ है शायद अब कुछ रचनातमक कर paun
एकचअ है शायद अब कुछ रचनातमक कर paun
Sunday, October 2, 2011
Nimbahera
Nimbahera......
Yahan jab se main aaya hun..aisa lagata hai ki kuch bhi mere sath accha nahi ho raha hai...
kal parson ka hi problem..aur yahan rahane ka problem...2-3 days se khane ka problem.....then i feel being spritual..yar sac hai aisa hi hota hai life main , aur hum kuch bhi nahi kar sakte , bus mukdarshak hi bane rahte hain.....
It's life..and we must enjoy each nad every Moment of life....
Yahan jab se main aaya hun..aisa lagata hai ki kuch bhi mere sath accha nahi ho raha hai...
kal parson ka hi problem..aur yahan rahane ka problem...2-3 days se khane ka problem.....then i feel being spritual..yar sac hai aisa hi hota hai life main , aur hum kuch bhi nahi kar sakte , bus mukdarshak hi bane rahte hain.....
It's life..and we must enjoy each nad every Moment of life....
Thursday, July 21, 2011
Friday, June 17, 2011
अंतिम ट्रेनिंग बीकानेर में
हाँ यहाँ अब अंतिम ट्रेनिंग है...अब पता नहीं कब इन सारे दोस्तों से मिलना हो ! जिंदगी का एक अच्छा मौका मैंने गँवा दिया सिर्फ और सिर्फ अपनी बेवकूफी से , अगर थोडा सा भी गंभीर होता तो मैं आज मुस्कुरा रहा होता...चलो ओर भगवन की मर्जी से होता है...और सबसे बड़ी बात तो ये की मैं अपने अन्दर आये परिवर्तन को महसूस कर रहा हूँ...बाकि सारे ट्रेनिंग में मैंने अपने आपको सबसे अलग थलग रखा और हमेशा अपने कोम्फोर्ट ज़ोन में रहा...लेकिन इस बार मैं बहुत सारे लोगो से बात की और नए दोस्त बनाये और इस बार खुद पे केन्द्रित न रह कर मैं लोगों पे केन्द्रित रहा...
हैदराबाद में हुए बेहविऔर साइंस के क्लास में कुछ जो भी सिखा था अब उसकी परिपालना कर रहा हूँ और अब आचा भी फील कर रहा हूँ...जिंदगी को देखने का नजरिया बदल रहा है और यही सबसे सुखद परिवर्तन है...और मैं इसका आनंद उठा रहा हूँ....इस बार ऐसे लोगो से भी घुला और मिला जिनसे मैं दूर रहने की कोशिश करता था...सच है की दुनिया में ओर लोग अच्छे होते हैं ,,,अगर आप अच्छे हो तो....जिंदगी जीने का नया नजरिया मुबारक....
हैदराबाद में हुए बेहविऔर साइंस के क्लास में कुछ जो भी सिखा था अब उसकी परिपालना कर रहा हूँ और अब आचा भी फील कर रहा हूँ...जिंदगी को देखने का नजरिया बदल रहा है और यही सबसे सुखद परिवर्तन है...और मैं इसका आनंद उठा रहा हूँ....इस बार ऐसे लोगो से भी घुला और मिला जिनसे मैं दूर रहने की कोशिश करता था...सच है की दुनिया में ओर लोग अच्छे होते हैं ,,,अगर आप अच्छे हो तो....जिंदगी जीने का नया नजरिया मुबारक....
Saturday, May 28, 2011
अच्छा महसूस नहीं हो रहा
यार पता नहीं ऐसा क्यों होता है की जिंदगी के सफ़र में हम नए लोगों से मिलते हैं और एक अनकहा सम्बन्ध जोड़ लेते हैं...यहाँ २७ लोगों से मिला और मिला क्या एक पूरी फमिलीय ही बना ली , सिर्फ २८ दिनों में ....ऐसा क्यों होता हैं....क्यों भावनाएं , रिश्ते समबन्ध और जज्बात परेसान करते हैं ...... क्यों हम जिंदगी के सफ़र में इसे ऐसे ले लेता हैं , मैं समझता हूँ की ऐसी फीलिंग , बहुत बार आती है और हम वापस अपने नोर्मल लाइफ में चले जाते हैं....बुत कुछ दिनों का जो transition period hota hain, bahut dukh dai hota है, ये अहसास क्यों होता है हम समझ ही नहीं पते हैं ...
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कभी कभी मैं सोचता हूँ कि मैं कहाँ आ गया , और कहाँ जा रहा हूँ , न तो कोई मंजिल है और न ही कोई रास्ता, बस जीना है तो जिए जारहाहूँ, क्या यही हो...
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I don't know..what's going to happen with me in 2014.It was the very first day, was in Goa with best pals , wondering on beach..but...
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Good Story and a lot of history.... M loving it ..It seems Hindi is also comlicated foe me..Complicated words by author ....But m learni...