Tuesday, September 18, 2012

I don't ask questions , I just accept the answers...

People use to ask me, why I don't ask questions, to God or to anyone ...and you know What I say....simply..
I don't ask questions , I just accept the answers...

Yar , Life becomes too easy, when u accept everything in the same form as it comes... whether It's happiness or sorrow, pain or comfort. I assume each and every emotions has it's own importance  in the Life...Love or hate , honesty or cheating ..everything has it's own essence..and we must accept every such human emotion..
And you you know, when problem starts...when we start to ask questions ,  why, why me, etc, etc...hay u were chosen one , destiny's child...So why to ask questions...Nature gives u some some answers...Just accept those answers..And see how life seems beautiful.....

ho ho ho..as my tagline goes...How beautiful life is....It's beautiful yar, it's colorful..only u have to know how to live ..how to enjoy each and every moment..

Saturday, September 15, 2012

ऐसा कैसे हो जाता है ....


पता नहीं मैं कभी कभी ऐसा कैसे बोल जाता हूँ , आज सुबह पवन आया था ब्रांच में , मैं तो ऐसे ही निरपेक्ष रहता हु ,  पर पता नहीं मुझे क्या हो गया था , बहुर बुरे शब्दों का इस्तेमाल कर दिया मैंने उसके लिए और उसके सामने ही , थोडा गुस्सा निकल गया, पर उसके जाने के बाद मुझे बहुत ही ख़राब लगने लगा , पता नहीं क्यों , रोने का मन होने लगा , लगा की फुट फुट कर रो पडू , मैं ऐसा किसी को कैसे बोल सकता हु, क्यूँ मैं किसी भी चीज़ के लिए किसी को भी  दोषी ठहरा  सकता हूँ , पता है पवन खुद ही टेंशन में है और मैंने ऐसा बुरा बोलकर उसे बहुत तकलीफ पहुंचा दिया ..पता नहीं मेरे अन्दर का इंसानियत थोड़े देर के लिए कहा मर जाता है , मैं खुद ही कहा करता हूँ कोई कोई भी बुरा नहीं होता , फिर मैं क्यों  बुरा सोचने लगता हूँ , क्यों किसी को hurt करना शुरू कर देता हूँ ..ऐसा लग रहा है  की मैं अभी जाऊ और पवन से अपने शब्दों के लिए माफ़ी मांगू.....

जो भी हो , अब मुझे ध्यान रखना है , जो होना होता है वो तो हो ही जाता है और जो चीज़ गुजर गई हो उसे सुधारा भी नहीं जा सकता , लेकिन भविष्य में इसका ख्याल रखा जा सकता है की मैं अपने शब्दों से किसी को आहत न करू ..बस भगवन से माफ़ी मांगता हूँ की क्यों मैंने पवन को हर्ट किया , भगवन , मुझे माफ़ करो ...

Thursday, September 13, 2012

मन की किताब से तुम, मेरा नाम ही मिटा देना.......

मन की किताब से तुम, मेरा नाम ही मिटा देना.......

बंदिनी फिल्म का ये गाना , जिसे गुलज़ार साब ने लिखा है, जब भी सुनता हूँ एक अजीब सी हलचल  सी मच जाती है ..पता नहीं किस भाव से लिखा गया गया है ये song और उसी शिद्दत से गाया भी  गया है ...
कहते है न कि, अपने आप को स्वीकार करना बहुत मुश्किल भरा काम है, अपनी अच्छाइयों से इतर अपनी बुराइयों को स्वीकार करना , शायद ये इंसानों से तो संभव नहीं है ...

मैं सब कुछ भूल कर  वर्तमान में जीने लगता हु ,खुश और मस्त ,पर  आज कुछ लोगो से मिला तो ये अहसाह हुआ , अपने बुरे होने का , और ये भी महसूस भी हुआ ....जब आप खुद को किसी और कि जगह पर रख कर देखते हैं तब ही आपको उस बन्दे की  तकलीफ , दर्द  का अहसास होता है, दुःख तो तब और होता है जब न चाहते हुए भी  आपकी वजह से कोई दुखी हो, आपकी वजह से किसी की मुस्कराहट छिन जाये ...... कुछ नहीं बस इतना ही कह सकता हूँ ....

मन कि किताब से तुम , मेरा नाम ही मिटा देना 
गुण तो न था कोई भी , अवगुण मेरे भुला देना ..
अवगुण मेरे भुला देना .....................................

Tuesday, September 11, 2012

कभी कभी ...


कभी कभी तुम ऐसा जरुर सोचते होगे की मैं इतना निष्ठुर कैसे हो जाता हूँ , no phone calls , no messages , no  contact , seems vanished   ....ये सारी चीजें बहुत तकलीफ पहुंचाती है , पर पता है वक़्त सारे जख्मो को भर देता है बस दिल खुला होना चाहिए ....पता है , मैंने जिंदगी में बहुत खिल्दंडा पंथी  किया है, बहुत  सारे लोगो को दुःख पहुँचाया है ...yes I did hurt a lot of people , and  know what , I got punished hard by nature ...and  it really made me ralise that I was a sh**t ...played with emotions ...played with sentiments...

And now I feel , it's time to understand myself,   to be serious. I know I had collected lot of tear , which is making my life a misery...Now I don't want to hurt anyone , by my words or by my deeds...Life is too short..We have to live it to it's fullest...

पता है वक़्त के साथ सब कुछ घुलता मिलता जाता है , दुःख, विषाद, हंसी ,ख़ुशी , ..जब हम बहुत तनाव में होते हैं तो ऐसा लगता है , कि अब सब कुछ ख़तम, अब कुछ रहा नहीं इस जिंदगी में , और जब कुछ वक़्त गुजर जाता है तो हम खुद पे हँसते हैं, हाँ कितना बेवकूफ  था मैं , इतने छोटी सी चीज  से हार मान गया था ...या फिर ऐसा लगता है कि किसी के बिना जिंदगी चलती ही नहीं . पर जब थोडा वक़्त और गुजर जाता है तो हम ये महसूस करते हैं कि , मेरी जिंदगी तो उसी कि वजह से तकलीफदेह थी ....और तभी ये अहसास होता है अपने बेवकूफ होने का ...

और सच तो ये है कि अब मैं किसी को बेवकूफ बनाना नहीं चाहता , क्यूंकि कभी कभी लगता है आप किसी को बेवकूफ नहीं बना रहे होते हैं बल्कि जिंदगी खुद आपको ही बेवकूफ बना रही होती है...और मैंने ऐसा जाना है कि हर वक़्त जिंदगी ने मुझे बेवकूफ बनाया है. जब मैं  पूरी दुनिया का मजाक बना रहा होता हूँ तो प्रकृति मुझ पर हंस रही होती है ...अट्टहास करके ...

बस अब और नहीं , अब और आंसू नहीं बटोरने मुझे ....थोडा तकलीफदेह तो जरुर है  but  , थोड़े वक़्त गुजर जाने पर तेरे मन का मैल भी धुल जायेगा , अपने लिए जितना घृणा मैंने बटोर लिए है वो भी कम हो जायेगा ..बस ये जरुर याद रखना के वक़्त सबसे बड़ा मरहम है ...धीरे धीरे सब कुछ घुल मिल जायेगा , इस जिंदगी के अनवरत प्रवाह में , सच है यहाँ कुछ भी रुकता नहीं, कुछ भी ठहरता नहीं..सब कुछ चलायमान है ...प्रेम और घृणा भी ...इंसान तो खैर है ही ...बस मन में किसी के लिए भी , किसी के लिए भी , जिसने कुछ अच्छा चाहा हो तुम्हारे लिए या जिसने तुम्हारी  जिंदगी के कुछ पन्ने अँधेरे से श्याह कर दिए हो  ...कोई भी विद्वेष मत रखना ...क्यूंकि कोई भी बुरा नहीं होता ..कोई भी बुरा नहीं होता ..

Thursday, September 6, 2012

दो नगमे .....


पिछले तीन चार दिनों से  ये  गाना  सुन रहा हूँ ,
पर पता ही नहीं  के क्या है ..सुनता ही जा रहा हूँ ..
सच है यार ,हम  खुशियाँ ढूंढ़ ही नहीं पाते 
बस  दोषारोपण करते फिरते है , जमाना ख़राब है ,
बन्दे बन्दे में दाग है ....
मुझे कबीर का एक  दोहा याद आ  जाता है 
बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिल्या कोई...
जो मन खोज्या आपनो , मुझसे बुरा न कोई ...

ये बहुत बढ़िया song , I  want  to  share  


"ये जमाना ख़राब है , मिया ये कैसा मजाक है ..
बन्दे बन्दे में दाग  है , मिया कैसा मजाक है, 
मैं नसीहत क्या दू , सब तो है सयाने यहाँ

फिर भी साफ साफ कह दू
सब कुछ है  ला ला ला ...

तुझ में रहने रब आया तो बेघर क्यूँ  कहलाये ,
मुरखपन में क्यूँ पगले तू आज को आग लगाये ,
सारी पढाई किस पीपल  के पेड़ पे टांग आया,
बाँट बटोरे के  हारा तब जाना क्या पाया,
क्यूँ बेफजूली में  man, man   चला  हार  के ,
नीरस  ही  रह  जायेह  न , तू  ख़ुशी  तलाशता  फिरता  कहा ....."

And one more song , of course from Coke studi season -2...
It like bhakti, bhakti , where a devotee dovote himself to divine without any question..
It feels like am in trance..
like am doinig yoga and left my body ..
forgot my all problems , all issue ..like am in another world , 
where, I find hapiness everywhere, love , affection ...
far, far  away form this world of hatrate, frustration and dark..
completely merged with God...
It works like advaitva sindhanta of hinduism...
"अहम् ब्रह्मास्मि "..
I am the "One"...

So enjoy this divine fusion..

मदारी, मदारी मदारी मेरा तू, 
मैं जम्बुरा रे , जम्बुरा रे जम्बुरा ..
तेरी रुखी सूखी , सूखी रुखी खाके देखा ..
हर एक निवाला अमृत लागे ..
तेरे रहमोकरम से, रहमोकरम से ,
हर फूटी किस्मत उठ के भागे 
जितना भर दे खिलौना में चाभी , 
उतनी है उसकी रफ़्तार.
तू चलता है जीवन का मेला ..
तू ही सुने हम सब की गुहार ...


Sunday, September 2, 2012

कुछ फैसले ..


पिछले 5 दिनों से बहुत परेशान हूँ , और शर्मिंदा भी ...उलझा हुआ सा , फंसा हुआ सा महसूस करता हूँ कभी कभी , और इसी परेशानी में एक फैसला कर लिया ...कुछ दूसरा उपाय भी तो नहीं है ..और ये फैसला शर्मिंदा होने से तो बेहतर है ....भगवान ने चाहा तो फिर इसका विकल्प मुझे मिल जायेगा ...कभी तो उपरवाले को बहुत अहसानमंद हो जाता हूँ की मुझे संदीप और अमित जैसे दोस्त मिले ....
बस यही मानता हूँ, कि  जो भी होता है अच्छा होता है ...और ये भी मानता हूँ कि  जब दिन बुरे होते हैं तो आपके साथ सब  कुछ बुरा ही होता ही  ..पर हार  कभी नहीं मानता मैं ..आशावादी हूँ , जब अच्छे दिन आयेंगे तो सब  कुछ अच्छा होगा , व्यक्तिगत, व्यावसायिक और आध्यात्मिक स्तर पर ......बस इन्तेजार कर रहा हूँ की कब मेरे साथ कुछ अच्छा होना शुरू होता है ......

निष्पृह