Monday, April 8, 2013

बेतरतीब सी जिंदगी .

इस बेतरतीब सी जिंदगी में कब कौन सी चीज़  कहाँ खड़ी हो  जाये कुछ पता ही नहीं चलता , कुछ अप्र्तयशित जैसा ..और यही चीज़ जिंदगी को और बेतरतीब कर जाती  है . जो भी हो इसे झेलना  तो पड़ता ही है ..और         तब थोड़ी energy मैं  तुमसे ले लेता हूँ . रुखी सी जिंदगी में जिन्दा होने का अहसास जाग पड़ता है। थोड़ी सी खुश्की मिट जाती है ...थोडा सा तरोताजा हो लेता हूँ मैं हर उस चीज़ से झगड़ पड़ने  को, जो शायद मुझे पीछे खींचती है ..मुझसे मेरे होने का मतलब  पूछती है ......और उतनी ही शिद्दत सी उस सवाल का  देता हूँ ..तेरे  होने का मतलब ही तो मेरा होना है ..और फिर जिंदगी के सारे टेंशन ख़तम ..सब कुछ झेल लूँगा मैं अकेले ही ..सब कुछ ..हाँ फर्क तो सिर्फ यही पड़ेगा कि थोडा और खुष्क हो जाऊ मैं थोडा सा और रुखा ....लेकिन मेरी ये सदाबहार मुस्कराहट तो है ही मेरे  .... 

Tuesday, April 2, 2013

वही सूनापन वही अन्धकार ...


कल से ही एकदम सूना सूना सा महसूस कर रहा हु ..एकदम अकेला सा तनहा सा ..वापस निराशा के गर्त में डूबा हुआ . गहन अन्धकार में विलीन ...सोचा था वह पहुँच जाऊ जहाँ थोडा सकूँ मिलता है ..पर वह भी बेरुखी ..और शायद इसी का भागी हूँ मैं ..
    कभी कभी तो सोच सोच कर परेशां हो जाता हूँ मैं , क्यों ये जिदगी हमारे अनुसार नहीं चलती . थोडा भी , और वही होता रहता है जो हम नहीं चाहते कि हो...अचानक से जुल्फान कि शादी ..सोचता हु तो लगता है कि पागल हो जाऊंगा ..पागल , विक्षिप्त ..कुछ भी नहीं है मेरे पास , सिर्फ निराशा के ..विचलित सा  होता हुआ लगता है ..खुद का अस्तित्व , डगमगाता सा ....ये लड़ाई है दिए की और तूफान की.......फिर लगता है की मैंने सोचना ही छोड़ दिया है ..और सच है मेरे बचने का एकमात्र उपाय...न सोचोगे और न ही टेंशन होगा ...जैसा उपरवाला चाहता है वैसा ही होता है ..
        पर वक़्त का क्या , वो तो बस निकालता चला जाता है , न तो कुछ नया और न की कुछ रचनात्मक ..और ऐसा पशुवत जिंदगी का मोल भी क्या ..कभी तो सिर्फ तुम्हारे होने के के अहसास से ही ऐसा लगता है है की सब कुछ पूरा है पूरा, करीने से सजा हुआ , और फिर तुम्हारे उसी बेरुखी से ऐसा लगता है सब कुछ चलवा , बस एक प्रतिबिम्ब , और कुछ भी नहीं ....
    मेरे हर वक़्त मजबूत होने की कुछ तो वजह होनी चाहिए न और कभी कभी एकदम बेबस सा कमजोर होने की कुछ परिणिति ...सच तो ये भी है की मुझे कोई चीज़ जो शायद तुम्हारी है , बिखरने नहीं देती ...और कभी तो लगता है कि कब का मैं टूटकर बिखर चूका हूँ कई टुकडो में ..और हर टुकड़ा जैसे मेरी फितरत पे हँसता है ..और जब ये टुकड़ा मुझपर हँसता है तो माज़ी में चला जाता हु ...हाँ वही माज़ी ...जहा मेरा सब कुछ बिखर पड़ा है ...कुछ जार जार हो चुके सपने और कुछ दम तोडती महत्वाकंछाये...
   पता नहीं कब तक ऐसा चलता रहेगा सब कुछ ..जहाँ मैं अपनी खुद की एक मासूम मुस्कराहट के लिए तडपता रहूँगा ..और इन खोखली हंसी का आवरण जो अपने अस्तित्व के ऊपर ओढ़ रखा है निकाल फेकुंगा...अब तो हर वक़्त बस नकारात्मक विचारो का आना जाना लगा रहता है ..निराशा की लहरे बस यहाँ वहां  डोलती रहती है ..जिंदगी जैसे ठहराव पे आ पड़ी हो , ठीक किसी पुराने तालाब के गंदले पानी की तरह ....और ठीक मैं इन्तेजार कर रहा हूँ मानसून के उस फुहार का जो सब कुछ नया कर जाये ...इस गंदले पानी को स्वच्छ कर  जाये , एक नया जीवन एक नया उमंग भर जाये ....और शायद उसी बदलाव का इन्तेजार है मुझे ..जहाँ कुछ रचनात्मक हो , जहा आशावाद हो और आगे बढ़ने का और कुछ नया करने का उमंग ......
      पर अभी तो गहन अन्धकार है , मायूसी है , आने वाले चार पांच महीनो का हिसाब किताब ...पता नहीं मैं कैसे अपनी सब जिम्मेदारिया निभा पाउँगा...बस तुम्हारा ही सहारा है ....

Sunday, March 24, 2013

नाटक


तेरे रोज़ रोज़ के नाटक से मैं तंग आ चुका हु, हर १० दिन में एक ही नाटक और ऐसा कई दिनों से कर रहे हो तुम , अगर कोई दिक्कत है तो मुझे बताओ ... तुम्हारी चुप्पी तो मुझे और जायदा परेशां करती है ...और सबसे बड़ी बात तो ये भी है के इन दिनों मैं खुद ही बहुत परेशां सा रहने लगा हूँ ..और फिर तुम्हारा ये नाटक ...कभी कभी इतनी खीज उठती है की की बस बहुत हो गया ....तुम्हे लगता है की इस तरह किसी प्रॉब्लम का हल मिल जाये तो बहुत बढ़िया ..
  मुझे तो ऐसा ही लगता है कि ऐसे ही नाटक करने से तुम्हारे सरे प्रॉब्लम दूर होते है...और अगर ऐसा है तो बहुत ही बढ़िया है ..

Monday, March 18, 2013

first official fight..

First official fight with mom and dad ..on marriage..so what i kept them guessing and confused...see if u can't convince  them , confuse them...it's a well known funda ...and see how m I enjoying their confusion :)

Saturday, February 23, 2013

छोटी छोटी खुशियाँ

छोटी छोटी खुशियाँ मैं चुनता रहता हूँ खुद के लिए ..और जब से mom and dad साथ में हैं , सब कुछ व्यवस्थित सा लगता है ! और जब भी किसी भी चीज़ के लिए चाहे वो छोटी हो या बड़ी , जब इनके  चेहरे पे मुस्कान देखता हूँ तो सुकून की एक परत छा जाती है ...I have seen them suffering since my childhood ,suffering for us, not us rather for 'me', and when i see  a bit of smile on their faces seems life is beautiful and wonderful. I won't be a great person neither a super rich guy but a simile on my dad's face make me more than that... and then only I got to know ..there is something in life ..something precious , something too beautiful...   Today when i was giving the keys of my bike to dad , so that he could learn to drive . the expression on my dad's face was amazing ...my heart filled with pleasure...Yeah I know that he knows driving and having passion for that ...but conditions were never in sink ..and when he drives Pulsar ...I love the expression on my father's face......Love u dad .... 

Friday, February 8, 2013

मेरी गलती ...


मेरी गलती ...

आज दोपहर से मैं बहुत बुरा महसूस कर रहा हूँ , आज मेरी वजह से किसी को डांट सुननी पड़ गई ..गलती मेरी ही थी, और शायद ये मेरा ego था , खोखला ego , खोखला अहम् ..क्यों इतना बुरा बन जाता हु मैं, कभी कभी , आज कलिका गैस वाले के यहाँ gaya हुआ था , सिलिंडर लेन के लिए , और गलती मेरी ही थी की मेरे पास मेरा connection  number bhi nahi था, और मैं चाहता था की वो मुझे मेरे request ka status बताए..पर काउंटर पर बैठे बन्दे ne कहा की वो मेरे से kis basis पर बात karega , bus yahi मेरा अहम् aade aa gaya ..और चूँकि मैं waha के karta dharta दिनेश ji को janata था to sidha chala gaya और unke पास shikayat  कर di..और shikayat भी क्या थोडा बढ़ा चढ़ा कर ,  दिनेश ji bahar aaye और use dantana shuru कर diya . .

tab मुझे मेरी गलती ka ahsah हुआ , मैं khud भी kitane logo से सही से बात कर पता हूँ ,maine khud को us बन्दे की jaah pe rakh कर dekha to मुझे apane gire hone ka ahsah हुआ , क्यों मैं इतना बुरा बन जाता हूँ की , मेरी वजह से किसी ka अपमान हो जाये ..फिर din bhar मैं branch me upset sa रहा , पता nahi क्यों din bhar khud pe ही khundak si aati rahi , ukhada ukhda sa रहा , kuch भी to us बन्दे ne mujh से galat nahi कहा था ...फिर क्यों की maine uski shikayat ...mafi mangata हूँ us बन्दे से, dost मुझे maf कर dena ..और mafi mangata हूँ bhagwan से भी , prabhu mujeh aisi galtiyo से bachao..prabhu maf कर do मुझे , और aisa kahi na हो की मेरी वजह से किसी को apmanit hona pade ....

Wednesday, February 6, 2013

2 अच्छी बात ..

पिछले हफ्ते भर से मैं गर्दन के दर्द से परेशां रहा और कुछ भी खुश होने जैसा नहीं  था , फिर अचानक से फितूर आया के कुछ  किया जाये ..बस  कार चलाना सीखने लगा हूँ , हाँ कल से ही , और अच्छा लगता है ड्राइविंग सीट पर बैठ के , और दूसरी बात तो ये के सुबह का पूरा समय बेकार में जा रहा था , तो थोडा work out की भी सूझी , और समझाता हूँ के दिन भर   बैठे बैठे काम करता हूँ तो अपने आप को फिट रखने के लिए जरुरी भी था , तो GYM भी join कर लिया , हाँ कल से ही ....और इन दोनों के लिए मैं जाकिर भाई को धन्यवाद् देना चाहूँगा ..कभी कभी तो समझ में ही नहीं आता की भगवन ने कुछ लोगो को ही इतनी इनायत क्यों दी है ..

निष्पृह