Saturday, August 25, 2012

कल सुना ..

कल सुना ..
हर सुबह तुम मेरा इन्तेजार करते हो 
वहीँ ...जहाँ से मैं रोज गुजरता हूँ .....
वक़्त से पहले पहुँच कर .
सिर्फ इस आस में की एक मुलाक़ात हो ..
सच ही तो है की ..जिन्दा रहने के लिए एक मुलाक़ात जरुरी होता है ...
बारिश में खड़े रहते हो..
भीग जाते हो ..
तबियत भी ख़राब ...
पर कुछ है जो तुम्हे मजबूर करती है ..
उस रस्ते पे आने को ..
कुछ रूहानी सी ..
कुछ अनकही , अनजानी सी ..
क्यों है ऐसा और कुछ शिकायत भी नहीं ...

पर उस मुलाक़ात का क्या ..
जिसका कोई मतलब ही न हो..
हाँ ये तुम्हे भी पता है और मुझे भी ..
क्यों कर तुम मेरी आस पलते हो ..क्यों कर 
समझाना चाहता हूँ तुझे ...
पर समझा नहीं पता ..
हार जाता हूँ मैं ...
उस चीज़ से जो रूहानी होती है ..
कभी तो डर भी लगता है मुझे ..
उस चीज़ से ..
जो अनकही भी है और अनजानी भी ...

कुछ रुखा सा मैं भी हूँ 
कुछ बिखरा हुआ सा भी ..
चाहता था हर पन्ना समेट लू अपनी जिंदगी का 
पर हर पन्ने के साथ कुछ और बिखर जाते हैं..
और तब एक सवाल करता हूँ ...
खुद से ...और फिर खुद ही उत्तर ढूंढ़ लेता हूँ ...
हर सवाल का उत्तर नहीं ढूंढ़ना चाहिए..
(Some questions better not to be answered )..
 
तुझे भी यही कहता फिरता हूँ ..
जिंदगी कुछ सवालो के जवाब खुद ही दे देती है ..
वक़्त आने पर...
बस वही मैं भी कर रहा हूँ ..
तुम भी करो...

क्यों कर यू खफा हो तुम .............


क्यों कर यू खफा हो तुम ...............
इतना तो बता दो क्या खता है मेरी

हर शाम तेरी ख्वाहिश..
हर सुबह तेरी पूजा
हर सपने में तुम
हर गम में तेरी छांव की चाह...

गर ये खता है तो ...
उपरवाले से ये दुआ करूँगा ..
अनगिनत जनम बख्से मुझे इंसानी रूह में ..
और हर जनम मैं ये खता करता जाऊ ...

Sunday, August 19, 2012

तेरी एक निगाह की बात है , मेरी जिंदगी का सवाल है


तेरे हुश्न पर है मेरी नज़र
मुझे सुबह शाम की क्या खबर
मेरी शाम है तेरी जुस्तजू
मेरी सुबह तेरा ख्याल है
तुझे क्या सुनाऊ मैं दिलरुबा ....

Monday, August 13, 2012

निम्बाहेड़ा और बारिश



निम्बाहेड़ा में इतनी बारिश , पुरे साल भर हो गए , ऐसी बारिश कभी नहीं देखी थी...ऑफिस जाते वक़्त  मैं पूरी तरह भीग गया था और दिन भर मैं नंगे पांव था , क्यूंकि मेरे जूते पुरे भीग गए थे ....बेवकूफ की तरह था मैं पुरे दिन भर, हा हा हा हा और मैं भी मजे ले रहा था अपने नंगे पांवों का .....और तो और ब्रांच भी पूरी तरह मटियामेट रहा ...उम् और क्या मैं भागना चाहता था ब्रांच से 5 बजे ही , पर ये कभी हो नहीं पता , 7 बज ही जाते है .....क्या करू यार ....कैसे जल्दी ब्रांच बंद करू .... मुश्किल तो ये भी है की मुझे हॉल का इंचार्ज बना दिया गया है और अब  9.45 तक पहुँचाना पड़ेगा ...और मैं कभी नहीं चाहता की 10 बजे से पहले ब्रांच पहुंचू ....टेंशन न ले यार बस एक हफ्ते ....और साला ये नींद भी बड़ी जालिम है , बारिश और नींद ...खतरनाक संयोग  है ...9.45 तक मैं जाग जाऊ यही काफी होगा

Sunday, August 12, 2012

मंजिल की तालाश ...

पता नहीं कब तक मैं मंजिल की तलाश में इस तरह  भटकूँगा , कभी तो ऐसा लगे की रास्ता ही खुबसूरत है ,तो कभी एक खलिश सी , सिर्फ इसलिए कि कहीं तो है जहाँ मुझे पहुंचना है , बहुत जल्दी .कभी कभी बहुत खुश्क सा महसूस होता है , कहा करता था न कि राजस्थान की तपती रेत में बारिश की एक बूंद ढूंढ़ रहा हूँ ,पता नहीं ये तलाश भी कब तक पूरी होगी ....
ख्वाब को हकीकत में बदलना है , पता नहीं कब तक संभव होगा , क्यूँ कर मैं इतना अकिंचन होता जा रहा हूँ. कभी तो एकदम असहाय सा मासुस करता हूँ  तो कभी थोडा तुष्ट. और ये तुस्टी तभी आती है जब मेरा माज़ी कुरेदकर चला जाता है , हाँ वही माज़ी जब जिंदगी का हर दिन एक दू:स्वपन था , हर एक दिन तब स्याह  था और रातें कालिख भरी. अब तो थोडा उजाला जरुर है और इसी उजाले की बदौलत  तो मैं थोड़ी मुस्कराहट खरीद पाया हूँ .और तब याद आते हो तुम भी , हाँ तुम , काली स्याह रातों में तुम मेरे साथ थे ,मेरे साझीदार , बिना किसी उम्मीद  के , बिना किसी स्वार्थ के, आशा की एक किरण बनकर , और अब  हर चांदनी रात में तुम्हारी ख्वाहिश करता हूँ ....
और तब याद आते है मेरे हर सपने , एक अनाथाश्रम , एक वृधाश्रम और एक छोड़ा सा पागलखाना , जहाँ वैसे पागल जिनका कोई न हो , उनकी सेवा की जा सके....हाँ यही तो सपना है मेरा और शायद मेरी मंजिल भी ....एक तुम्हारे अलावा .....

 और हाँ एक नगमा जरुर शेयर करना चाहूँगा जिसे मैं कल शाम से ही सुनता जा रहा हूँ , उमराव जान का ये गीत जितना खुबसूरत है उतनी ही खूबसूरती से Coke Studio से कर्ष काले और मोनाली ठाकुर ने गाया है ....Thumps up for Coke Studio...

Saturday, August 11, 2012

What goes around, comes back around..

Passing by a meaningful songs....so sharing ...It's true yar...


All you get's a busy tone
I heard you found out
That he's doing to you
What you did to me
Ain't that the way it goes

My heart bleeded girl
So it goes without saying that you left me feeling hurt
Just a classic case
A scenario
Tale as old as time
Girl you got what you deserved

And now you want somebody
To cure the lonely nights
You wish you had somebody
That could come and make it right

But girl I ain't somebody with a lot of sympathy
You'll see


What goes around comes back around..

Thursday, August 9, 2012

एक अच्छा इन्सान

समझता हूँ की एक अच्छा इन्सान बनने के लिए थोडा और गलने की जरुरत है .  क्यों मैं उन सब लोगों का दिल दुखाता रहता हूँ जिन्होंने हमेशा मेरी अच्छे की कामना की है  , सिर्फ अच्छे की और मैं अपने  कर्मों से और  शब्दों से हमेशा उन्हें तकलीफ ही पहुंचाता हूँ...सिर्फ अपने आपको बड़ा दिखने के लिए और शायद सिर्फ मजाक के लिए ही सब का मजाक उडाता रहता हूँ ......तब तो शायद मुझे कुछ भी पता नहीं चलता पर जब पता चलता है कि मेरी वजह से उनको तकलीफ पहुंची है तब अपने हृदय रहित होने का पता चलता है ...

और तो और क्यों मैं किसी के आंसुओं का भागी बनता हूँ ...और शायद यही आंसू मुझे भाग्यहीन बनाते है ..तब मैं शायद अकेले में पश्चाताप करता हूँ...और कर भी क्या कर सकता हूँ , थोडा और जलना है मुझे , थोडा और गलना है मुझे , थोडा अच्छा होने के लिए ...और मुझे शायद भावनाओ कि भी क़द्र होनी चाहिए ...किसी के emotions से मैं कैसे खेल जाता हूँ ......  

क्यूँ कर मैंने ऐसा हूँ यार ..क्यों कर , और पता नहीं कब तक अपने आप को बदल पाउँगा.....

निष्पृह