Thursday, May 2, 2013

बेबश

क्यों कभी कभी खुद को बहुत बेबश सा महशुश करता हूँ, तो फिर सोचने लग जाता हूँ की क्यों मैं इतना कमज़ोर हु ...क्यों है इतनी बेबशी और क्यों हु इतना दबा कुचला सा मजबूर मैं ...क्यों हु ..

Friday, April 26, 2013

Love can reverse anything :)

was watching IPL match , but during AD time just changed the channel,  and came through a movie, named woman on top, firstly I din't like the title, but due to Penelope cruz or whatever may be the reason , I kept watching, and see what i found, found myself swimming in the sea of emotion..sometimes up or sometimes down..No one can separate two beautiful, loving pieces apart, Not even God.and what was the message..true love can reverse anything or everything...even a curse too :)...agree :)

Wednesday, April 10, 2013

हाँ हाँ मैं crazy हूँ .....

किसी को smile देना , किसी को खुश कर जाना ..अगर crazy है ..तो हाँ मैं crazy हूँ .. हाँ हाँ मैं crazy हूँ .....

कितना बढ़िया ad है ...मैं भी कभी कभी अपने इस पकाऊ नौकरी के बीच किसी किसी को खुश कर जाने का वक़्त निकल ही लेता हूँ..कुछ नाम जैसे विमला गोठवाल जी , जो सेवानिवृत शिक्षिका है ...और आज PVV  krishnan जी जो साउथ से है ..थोडा सा उन्हें हंसा दिया ....पर पता नहीं कितने लोग मुझसे नाराज़ होकर जाते होंगे ..पर उसका क्या ...आपको तो बस अच्छी चीजें ही याद रहनी चाहिए ......................

चलो इसी तरह अगर बेवजह खुशियाँ लुटाऊ तो , इन्ही छोटी छोटी खुशियों से ही अपनी जिंदगी खुबसूरत बनती चली जाएगी ....
Lovely...



Monday, April 8, 2013

बेतरतीब सी जिंदगी .

इस बेतरतीब सी जिंदगी में कब कौन सी चीज़  कहाँ खड़ी हो  जाये कुछ पता ही नहीं चलता , कुछ अप्र्तयशित जैसा ..और यही चीज़ जिंदगी को और बेतरतीब कर जाती  है . जो भी हो इसे झेलना  तो पड़ता ही है ..और         तब थोड़ी energy मैं  तुमसे ले लेता हूँ . रुखी सी जिंदगी में जिन्दा होने का अहसास जाग पड़ता है। थोड़ी सी खुश्की मिट जाती है ...थोडा सा तरोताजा हो लेता हूँ मैं हर उस चीज़ से झगड़ पड़ने  को, जो शायद मुझे पीछे खींचती है ..मुझसे मेरे होने का मतलब  पूछती है ......और उतनी ही शिद्दत सी उस सवाल का  देता हूँ ..तेरे  होने का मतलब ही तो मेरा होना है ..और फिर जिंदगी के सारे टेंशन ख़तम ..सब कुछ झेल लूँगा मैं अकेले ही ..सब कुछ ..हाँ फर्क तो सिर्फ यही पड़ेगा कि थोडा और खुष्क हो जाऊ मैं थोडा सा और रुखा ....लेकिन मेरी ये सदाबहार मुस्कराहट तो है ही मेरे  .... 

Tuesday, April 2, 2013

वही सूनापन वही अन्धकार ...


कल से ही एकदम सूना सूना सा महसूस कर रहा हु ..एकदम अकेला सा तनहा सा ..वापस निराशा के गर्त में डूबा हुआ . गहन अन्धकार में विलीन ...सोचा था वह पहुँच जाऊ जहाँ थोडा सकूँ मिलता है ..पर वह भी बेरुखी ..और शायद इसी का भागी हूँ मैं ..
    कभी कभी तो सोच सोच कर परेशां हो जाता हूँ मैं , क्यों ये जिदगी हमारे अनुसार नहीं चलती . थोडा भी , और वही होता रहता है जो हम नहीं चाहते कि हो...अचानक से जुल्फान कि शादी ..सोचता हु तो लगता है कि पागल हो जाऊंगा ..पागल , विक्षिप्त ..कुछ भी नहीं है मेरे पास , सिर्फ निराशा के ..विचलित सा  होता हुआ लगता है ..खुद का अस्तित्व , डगमगाता सा ....ये लड़ाई है दिए की और तूफान की.......फिर लगता है की मैंने सोचना ही छोड़ दिया है ..और सच है मेरे बचने का एकमात्र उपाय...न सोचोगे और न ही टेंशन होगा ...जैसा उपरवाला चाहता है वैसा ही होता है ..
        पर वक़्त का क्या , वो तो बस निकालता चला जाता है , न तो कुछ नया और न की कुछ रचनात्मक ..और ऐसा पशुवत जिंदगी का मोल भी क्या ..कभी तो सिर्फ तुम्हारे होने के के अहसास से ही ऐसा लगता है है की सब कुछ पूरा है पूरा, करीने से सजा हुआ , और फिर तुम्हारे उसी बेरुखी से ऐसा लगता है सब कुछ चलवा , बस एक प्रतिबिम्ब , और कुछ भी नहीं ....
    मेरे हर वक़्त मजबूत होने की कुछ तो वजह होनी चाहिए न और कभी कभी एकदम बेबस सा कमजोर होने की कुछ परिणिति ...सच तो ये भी है की मुझे कोई चीज़ जो शायद तुम्हारी है , बिखरने नहीं देती ...और कभी तो लगता है कि कब का मैं टूटकर बिखर चूका हूँ कई टुकडो में ..और हर टुकड़ा जैसे मेरी फितरत पे हँसता है ..और जब ये टुकड़ा मुझपर हँसता है तो माज़ी में चला जाता हु ...हाँ वही माज़ी ...जहा मेरा सब कुछ बिखर पड़ा है ...कुछ जार जार हो चुके सपने और कुछ दम तोडती महत्वाकंछाये...
   पता नहीं कब तक ऐसा चलता रहेगा सब कुछ ..जहाँ मैं अपनी खुद की एक मासूम मुस्कराहट के लिए तडपता रहूँगा ..और इन खोखली हंसी का आवरण जो अपने अस्तित्व के ऊपर ओढ़ रखा है निकाल फेकुंगा...अब तो हर वक़्त बस नकारात्मक विचारो का आना जाना लगा रहता है ..निराशा की लहरे बस यहाँ वहां  डोलती रहती है ..जिंदगी जैसे ठहराव पे आ पड़ी हो , ठीक किसी पुराने तालाब के गंदले पानी की तरह ....और ठीक मैं इन्तेजार कर रहा हूँ मानसून के उस फुहार का जो सब कुछ नया कर जाये ...इस गंदले पानी को स्वच्छ कर  जाये , एक नया जीवन एक नया उमंग भर जाये ....और शायद उसी बदलाव का इन्तेजार है मुझे ..जहाँ कुछ रचनात्मक हो , जहा आशावाद हो और आगे बढ़ने का और कुछ नया करने का उमंग ......
      पर अभी तो गहन अन्धकार है , मायूसी है , आने वाले चार पांच महीनो का हिसाब किताब ...पता नहीं मैं कैसे अपनी सब जिम्मेदारिया निभा पाउँगा...बस तुम्हारा ही सहारा है ....

Sunday, March 24, 2013

नाटक


तेरे रोज़ रोज़ के नाटक से मैं तंग आ चुका हु, हर १० दिन में एक ही नाटक और ऐसा कई दिनों से कर रहे हो तुम , अगर कोई दिक्कत है तो मुझे बताओ ... तुम्हारी चुप्पी तो मुझे और जायदा परेशां करती है ...और सबसे बड़ी बात तो ये भी है के इन दिनों मैं खुद ही बहुत परेशां सा रहने लगा हूँ ..और फिर तुम्हारा ये नाटक ...कभी कभी इतनी खीज उठती है की की बस बहुत हो गया ....तुम्हे लगता है की इस तरह किसी प्रॉब्लम का हल मिल जाये तो बहुत बढ़िया ..
  मुझे तो ऐसा ही लगता है कि ऐसे ही नाटक करने से तुम्हारे सरे प्रॉब्लम दूर होते है...और अगर ऐसा है तो बहुत ही बढ़िया है ..

Monday, March 18, 2013

first official fight..

First official fight with mom and dad ..on marriage..so what i kept them guessing and confused...see if u can't convince  them , confuse them...it's a well known funda ...and see how m I enjoying their confusion :)

निष्पृह