Thursday, January 29, 2015

Nervous breakdown.....

ho jata hai kabhi kabhi mera bhi nervous breakdown.......beer pita hun , fir to aur jayda.....bahot rone ka man karta hai..akela hota hun ....aisa lagta hai jaise apane hone ka koi matalab nahi hai ...kuch bhi nahi ....bus waqt hi to katna ...pata nahi main kyu itani mehnat karta hun ..kya purpose...sab kuch faltu.........

aakhir main bhi ek insan hun....

Thursday, January 1, 2015

अलविदा 2014 , नववर्ष 2015 शुभ हो सबके लिए।

तो अब 2014 ख़तम और नया साल शुरू।
साल दर साल तो ख़तम होते ही चले जाते है। मुझे याद आता है गोवा से वापस आते हुए सिर्फ मैंने यही दुआ की थी कि ,2014 be good yar . और आज जब खुद को तौलता हूँ तो यही पाता हूँ, 2014 तो सही मैं अच्छा अच्छा गुजर गया और अब 2015 से यही wish करता हूँ।  2015 please be best yar

याद करता हूँ 2014 की शुरुआत बहुत खूबसूरत गोवा की हसीं वादियों में हुई थी। और साला पता नहीं कैसे पूरा साल गुजर गया। खास कर बीच अक्टूबर से तो वक़्त ऐसे गुजर जाया ,कुछ पता ही नहीं चला। सबसे बड़ी बात तो ये कि मेरा confidence boast -up हो गया मेरे भाई। जिसकी मुझे बहोत जरुरत थी।

ये साल खूब घूमना फिरना भी हुआ ,गोवा , हैदराबाद , अहमदाबाद ,जोधपुर ,जयपुर ,बीकानेर ,दिल्ली ,पटना ,राजगीर ,नालंदा और सबसे अंत में हरिद्वार। … 2015 एक chota foreign trip करा दो भाई।

बस एक resolution है अपनी जिंदगी के लिए 2015 में , देखता हूँ पूरा कर पाता हूँ या नहीं।
जय साईं भगवान।

। तब तक एक खूबसूरत गाना सुन लूँ।


This love is a blaze
I saw flames from the side of the stage
And the fire brigade comes in a couple of days
Until then we got nothing to say and nothing to know
But something to drink and maybe something to smoke


Thursday, December 25, 2014

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया ……

बेगम अख्तर को सुनिए ,
सच कहता हूँ , जब आप एकदम अकेले होंगे , तो आपको ये एक पूरी  दुनिया बख्सता है

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया ……
जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया

यु तो  हर शाम उम्मीदों  गुजर जाती थी
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया



Sunday, December 21, 2014

सपने .....

किसी ने सही कहा है ,सपने वो नहीं होते जो आप सोकर देखते हो।
सपने तो वो होते है जो आपको सोने नहीं देते। ..

एक नयी शुरुआत करनी है अब
फिरसे अपने सपने के लिए 

Tuesday, October 7, 2014

एक बहुत बुरा सपना।

आज रात करीब 1.30 मेरी नींद खुल गयी , क्यूंकि मैं एक बहुत बुरा सपना देख रहा था। मैं अचानक से काफी डर गया और काफी देर तक मैं उसी सपने के बारे में सोचने लगा। एक खूबसूरत लड़की,मेरी मंझली बहन , बैंक का कोई अधिकारी और वो 2 लोग जो बाद में दैत्य बन गए थे। फिर जब नींद नहीं आ रही थी तो मैं टीवी खोलकर कुंगफू पांडा देखने लग गया और फिर वापस करीब 3 बजे के आस पास मुझे नींद आई

सुबह जब मैं जागा तो मेरा सर दुखने लगा था ,शायद मैं ये सोच कर भी डरा की पता नहीं इस सपने का क्या मतलब है ,पता नहीं क्या सूचित कर रहा है ये सपना। या   पता नहीं कोई रूह पास से होकर गुजर गया हो। अभी interpretation of dreams पढ़ रहा था। ये धोखे की सम्भावना व्यक्त कर रहा है ,मुझे सावधान रहना है। 

Saturday, October 4, 2014

Oh, won't you stay with me? Cause you're all I need

Oh Beautiful song....

Oh, won't you stay with me?
Cause you're all I need

http://www.youtube.com/watch?v=pB-5XG-DbAA

Thursday, September 25, 2014

oh yes 26th Sept....one year gone...

Yup...This is the day when I joined bichawadi branch ,year ago.......A day before left Nimbahera to join this place..I was just counting..oh One month gone, three months gone and now A year...सच कहा गया है भाई , वक़्त कहाँ किसी के लिए रुकता है। … चूक जाते है तो बस हम।  सबकुछ गुजरता चला जाता है और हमे कुछ पता ही नहीं चलता।  जिंदगी ऐसी ही चलती है।

याद तो रह जाते है कुछ नमूने।  कभी जन्मदिन के बहाने तो कभी किसी बिखरे हुए पन्ने में कोई टूटा गुलाब का पत्ता हमे हमे बहुत कुछ याद दिला जाता है।  सच है यार एक साल पहले ,ठीक इसी दिन जब मैं निम्बाहेड़ा छोड़ आया था तो कभी ये ना सोचा था कि मैं इस कदर सांचोर से प्यार करने लगूंगा। पर प्यार तो मुझे हर उस जगह से हो ही जाता है जहाँ मुझे रहना होता है , पहले बारां फिर दिल्ली ,फिर भीलवाड़ा , निम्बाहेड़ा और अब सांचोर। 

हमेशा कहा करता हूँ , जहाँ जितना वक़्त अच्छा गुजर जाये, गुजार  लो , फिर पता नहीं क्या हो। अब यहाँ अच्छा वक़्त जितना गुजर जाये उतना बढ़िया।

ओह, प्यार से मुहब्बत शब्द भी याद हो आया।  वाहियात शब्द है। पर जो भी हो आजकल तो ऐसा लगता है जैसे मोहब्बत का एक जमाना गुजर गया।  हाँ जी गुजरते गुजरते तो सब कुछ ही गुजर,बिखर जाता है।  न तो जिंदगी में कोई कशिश है और न ही कोई खलिश। वक़्त के साथ अब तो ऐसा लगता है हम भी दराज़ हो रहे है।
कभी कभी जब मैं field में जाता हूँ तो रेगिस्तान के किसी धोरे पे अचानक ठिठक कर खड़ा हो जाता हूँ। निर्विकार ,निर्मोही।  यहाँ का एकाकी,अकेलापन , सूनापन अपना सा लगता है।  कभी कोई आवाज़ आती है दूर से ,किसी के गीतों की।  लोकगीतों की।  तो मैं समझ नहीं पाता , पूछता हूँ तो पता चलता है रेगिस्तानी निर्जीव जीवन में इन्ही लोकगीतों ने रंग भरा है। जिंदगी के विरानेपन को , तन्हाई को शब्दों में रंगा है।   हुह , ये रेगिस्तान , ये तन्हाई और ये रंग।  इस वीरानी जिंदगी में रंग वक़्त के साथ मज़ाक सा लगता है।

इन्ही रंगो को जब तौलता हूँ तो अचानक लगने लगता है वास्तव में जिंदगी खूबसूरत है। दूर दूर रेगिस्तान के टीले ,अपने आप को बचाये रखने की जद में जिंदगी और इसी जद्दोजहद में गीतों का रंग. जीवन का रंग। विरह की ना खत्म होने वाले पल और उन्ही पलो की वीरानी। माशा अल्लाह , अब तो ये रंग और ये गीत मेरे वजूद का हिस्सा है.। वो कहा करता था न मैं …………" तेरे बिना क्या वजूद मेरा "
और भी कहीं सुना था इन रेगिस्तानों में पहले कहीं नखलिस्तान हुआ करता था। सबके अपने रंग थे। बहारें थी। … ठीक अपनी तरह। …। हा हा हा।
हाँ जी मुकद्दर का भी अपना खेल होता है। अब ना तो किसी के फ़ोन आने का टेंशन होता है और ना ही किसी को फ़ोन करने का।  डर भी लगने लग जाता है किसी अशुभ की या किसी अपशगुन की। 27 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ था। अजीब तरह का टेंशन मुक्त रहने लग लगा हूँ और अकेला मस्त। पर शायद असुरक्षित भी। हाँ मैं हर वक़्त अपने आपको असुरक्षित मह्सुश करने लग गया हूँ …………………………………………बिन तेरे वास्तव में असुरक्षित हूँ मैं , मैं क्या मेरा पूरा वजूद भी । पर आदत तो डालनी पड़ती है। कहते है न किसी को इतना भी दूर मत करो की वो हमेशा के लिए दूर हो जाये …………………………………………आमीन।  












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