Monday, October 16, 2017

प्रारब्ध....

                      सब प्रारब्ध का ही फल है। बहुत मेहनत करता हूँ कि अपने आप को खुश रखूं , पर ये हो नहीं पाता। कुछ न कुछ तो बना ही रहता है। चलो सब प्रारब्ध ही है अपना तो बस यही कर्त्तव्य है कि कर्म करते रहो ,अच्छा और बुरा होना तो भगवान के हाथो में होता है। और जब भी कुछ बुरा हो बस यही सोचना है कि चलो पिछले जनम का कोई पाप कटा। भाग्यवादी होना भी अच्छा होता है। 

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