Thursday, December 22, 2011

सजनी मान जाओ ना , दिल आज रूठा है !

Sajni Man jao na!!


सजनी मान जाओ ना , दिल आज रूठा है  ! हाँ कभी कभी बहुत अच्छे गाने मिल जाते हैं , इस गाने को मैंने बहुत पहले भी सुना था पर , पता नहीं आज कौन सी कसक है की २ घंटे से इसे सुन रहा  हूँ और  बहुत कुछ बुनने की कोशिश कर रहा हूँ, सच मैं JAL Band  को बुत धन्यवाद् देता हूँ , बहुत ही खुबसूरत विडियो और बहुत ही अच्छे बोल.....
सोचता हूँ , कितनी खुबसूरत चीज़ उपरवाले ने बने  जिसे लोग मोहब्बत  कहते हैं, पर बहुतों के लिए तो सजा ही होता है, ५ फीट और ६ इंच के हाड़ मांस से बने बुत को तो ये एक नेमत से काम तो नहीं है , पर सच है यार सच्ची मोहब्बत अब कहाँ मिलती है , एक सीरियल आ रहा है  "कुछ तो लोग कहेंगे" इसमें भी कुछ ऐसा ही है , "लोलिता " इस उपन्यास मैं भी कुछ ऐसा ही था...कुछ तो है ये जरुर , दिल मेरा कितना मजबूर , जान के भी तू जाने ना सैयां सैया ,नैनो की भाषा समझे ना  ...हाँ पर समझने और समझाने वाला भी तो होना चाहिए....वक़्त दो वक़्त कहीं ना कहीं कोई ना कोई तो समझाने वाला तो होना चहिये , हाँ भाई नहीं तो जीने का मतलब ही क्या रह जायेगा....
खली वक़्त का सही सदुपयोग हो रहा है मैं यहाँ तनहा हूँ तो अकेलेपन मैं बहुत बेकार की चीजें माथा ख़राब करती है ...वक़्त तो बहुत ही ख़राब होता है , पर क्या करूँ , ये अकेलापन भी बहुत बुरी चीज़ है और तब जब कोई रास्ता ही नहीं दिखाई दे रहा है, मंजिल तो दूर की बात है...और जब भी मैं मंजिल की बात करता हूँ , घबरा जाता हूँ, घबरा ..क्या सोचा था और क्या हो रहा है ...यार यही तो नियति है ....सब कुछ नियत है ...Fixed  है ....२०-२० मैच की  तरह ...सब कुछ अगर fixed  है तो ये  जीने की इतनी जद्दोजहद क्यों है क्यों है अस्तित्व  की लड़ाई .....हाँ  सच है अस्तित्व की ही तो लड़ाई है ..अपने वजूद को बचाए रखने की...पता नहीं कब तक संभल कर रख पाऊंगा  अपने वजूद ko...बस संघर्ष है वजूद का अस्तित्व का ...एक पहचान पाने की ललक है ....तो बहुत ही तीव्र है बहुत ही तीव्र ..जिसमे से एक अपूर्व रोशनी निकलती रहती है और आँखों मैं सपनो को उजाले देती रहती है ..हम जिसे अपने खवाबों से पालते हैं..और पालना भी चाहिए...

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